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    'मॉडर्न लव मुंबई' रिव्यू - प्यार से सजी 6 खूबसूरत कहानियां, दिल छूने वाली दमदार अदाकारी और संगीत

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    Rating:
    3.5/5

    प्लेटफॉर्म- अमेज़न प्राइम वीडियो

    'मॉडर्न लव मुंबई' एक एंथोलॉजी यानि की संकलन है, जहां 6 कहानियां हमें प्यार के अलग अलग रूप और रंग से परिचित कराती है। ये प्रेम कहानियां अलग-अलग पृष्ठभूमि के 6 किरदारों का सफर है, जिसमें अलग-अलग अनुभव और अलग अलग उम्मीदें हैं। मॉडर्न लव की ये कहानियां ना केवल रोमांस बल्कि आत्म-प्रेम, पारिवारिक प्रेम, साझेदारी, दोस्ती और अपनेपन को दिखाती है। सबसे महत्वपूर्ण.. यह स्वयं से प्यार करना सीखाती हैं। ये सीरीज दिखाती है कि एक महानगर, एक विकासशील शहर कैसे लोगों को आकार देता है और.. कभी कभी बिल्कुल अजनबी लोगों को जोड़ता है। ये 6 कहानियां, सपनों के शहर मुंबई के अलग अलग रूप, परिवेश और चेहरे से भी रूबरू कराती है।

    'मॉडर्न लव मुंबई' के साथ छह जाने माने निर्देशक- विशाल भारद्वाज, हंसल मेहता, शोनाली बोस, ध्रुव सहगल, अलंकृता श्रीवास्तव और नूपुर अस्थाना साथ आए हैं। दिलचस्प विषय और दमदार अभिनय के अलावा इस सीरीज को जो खास बनाती है, वो है संगीत। कैसी बातें करते हो, रात रानी, रात भर हिज्र में, शुरु से शुरु को.. जैसे कुछ बेहतरीन गाने इसके एल्बम में हैं, जो इस सीरीज को एक स्तर ऊपर ले जाती है।

    रात रानी

    रात रानी

    निर्देशक- शोनाली बोस

    कलाकार- फातिमा सना शेख, भूपेंद्र जादावत, तनिष्ठा चटर्जी, दिलीप प्रभावलकर

    लाली एक कुक है और उसका पति लुत्फी एक सुरक्षा गार्ड है। दोनों अपने पैतृक स्थान कश्मीर से दूर मुंबई में रहने आए हैं क्योंकि घरवाले उनकी शादी के खिलाफ थे। दोनों की 10 सालों की शादी शुदा जिंदगी में हलचल तब मचती है, जब अचानक ही एक दिन लुत्फी लाली को छोड़कर भाग जाता है। वह कहता है- 'मजा नहीं आ रहा..'। लाली का ना सिर्फ दिल टूटता है, बल्कि उसके सपने की चकनाचूर हो जाते हैं। एक पुरानी साइकिल के अलावा उसके पास कुछ नहीं है। अपनी जिंदगी में आए बदलाव को लाली कैसे गले लगती है.. वह और उसकी साइकिल मिलकर बेहतर जीवन के लिए कैसे पुल को पार करते हैं.. पूरी कहानी इसी के इर्द गिर्द घूमती है।

    लगभग 40 मिनट की ये फिल्म सभी जंजीरों को तोड़कर आजादी से जीने और खुद से प्यार करने के महत्व को दिखाती है। लाली के किरदार में फातिमा सना शेख ने बेहतरीन काम किया है। प्यार, डर, घबराहट, आजादी, खुशी.. हर भाव को वो खूबसूरती से दिखाती हैं। राम संपत का संगीत दिल छूता है। कवीन जगतियानी की सिनेमेटोग्राफी अच्छी है और कहानी को मजबूती देती है।

    बाई

    बाई

    निर्देशक- हंसल मेहता

    कलाकार- प्रतीक गांधी, तनुजा, रणवीर बरार, मानसी जोशी रॉय

    सीरीज की सबसे मजबूत प्रेम कहानी में है बाई। कहानी है एक रूढ़िवादी घराने में पले-बढ़े एक समलैंगिक व्यक्ति मंज़ू की.. जो अपनी बीमार बाई (दादी) और अपनी जिंदगी की सच्चाई के बीच फंसा हुआ है। घर के घुटन भरे माहौल से भागकर वह गोवा पहुंचता है। गोवा में अपने करियर और जिंदगी में मशगूल मंजू की मुलाकात होती है शेफ राजवीर से। जल्द ही दोनों रिश्ते में आ जाते हैं। मंजू आजादी को पहली बार महसूस करता है। इसी बीच उसे किसी काम से अपने पैतृक घर वापस जाना होता है, जहां अतीत एक बार फिर उसे जकड़ लेता है। अपनों से मिला दुख और पीड़ा एक बार फिर वो अनुभव करता है। लेकिन इतने सालों बाद क्या मंज़ू को बाई को अपनी सच्चाई बताने की ताकत मिलेगी? इसी के इर्द गिर्द घूमती है कहानी।

    इस फिल्म की कहानी इतनी खूबसूरती और संवेदनशीलता से लिखी और प्रस्तुत की गई है कि यह सीधे दिल को छूती है। कहानी में कई छोटे छोटे लम्हे हैं जो आपको प्रभावित करते हैं। यह फिल्म न केवल दो लोगों के बीच बल्कि एक परिवार के सदस्यों के बीच प्यार और स्वीकार्यता के बारे में है। प्रतीक गांधी और रणवीर बरार का अभिनय कहानी को एक पायदान ऊपर ले जाता है। वहीं, सोनू निगम की आवाज में गाया गया ट्रैक "कैसी बातें करते हो" से आपको प्यार हो जाएगा।

    मुंबई ड्रैगन

    मुंबई ड्रैगन

    निर्देशक- विशाल भारद्वाज

    कलाकार- मेयांग चांग, येओ यान यान, वामीका गब्बी, नसीरुद्दीन शाह

    सीधे और सरल विषय पर सबसे अनोखी कहानी लेकर आए हैं विशाल भारद्वाज। कहानी है एक इंडो-चाइनीज महिला की, जो अपने बेटे के एक ऐसी लड़की के साथ रिश्ते में होने से असहज है जो उनके समुदाय से नहीं है। अपने बेटे को उसकी प्रेमिका से दूर रखने के लिए वह भरसक प्रयास करती है। लेकिन क्या वो इसमें सफल हो पाती है? 1962 में भारत-चीन युद्ध के दौरान भारत में चीनी प्रवासियों को क्या झेलना पड़ा, इसकी पृष्ठभूमि में सेट, यह कहानी दिखाती है मुंबई में कितनी अलग-अलग संस्कृतियां एक साथ रहती हैं।

    विशाल भारद्वाज द्वारा निर्देशित मुंबई ड्रैगन, हर माता-पिता की दुविधा को दिखाती है। लेकिन रिश्तों में कभी कभी आजादी देना भी जरूरी होता है, ये कहानी है प्यार के उस रूप की। परंपरा और संस्कृति का पालन करने के लिए किसी को प्यार से दूर करने की आवश्यकता नहीं होती है। इंडो-चाइनीज मां और बेटे की भूमिका में येओ यान यान और मेयांग चांग अच्छे लगे हैं। वामीका गब्बी और नसीरुद्दीन शाह अपने किरदारों में प्रभावी हैं।

    माई ब्यूटीफुल रिंकल्स

    माई ब्यूटीफुल रिंकल्स

    निर्देशक- अलंकृता श्रीवास्तव

    कलाकार- सारिका, दानेश रज़वी, तन्वी आज़मी, एहसास चन्ना

    कहानी है 63 वर्षीय दिलबर सोढी की, जो किसी अपने के खोने के दुख और नए सिरे से जिंदगी जीने के बीच कहीं असमंजस के साथ खड़ी है। उनके प्रेमी की मौत एक कार एक्सिडेंट में हो जाती है, और उसके लिए वह खुद को दोषी मानती हैं। अपराधबोध की भावना उन्हें खुश होने और किसी भी तरह से बदलाव को अपनाने से रोकता है। ऐसे में उनकी मुलाकात एक युवा लड़के कुणाल से होती है, जो अपने करियर की शुरुआत करने के लिए मुंबई आया है। वह दिलबर की ओर आकर्षित है.. और दिलबर उसकी ओर। हालांकि, दोनों के रास्ते अलग होते हैं, लेकिन वो एक दूसरे को ज़िंदगी से लड़ने और खुश रहने की प्रेरणा देते हैं।

    ये कहानी बताती है कि अपने प्रियजन को खोने का मतलब यह नहीं है कि आप खुश नहीं हो सकते। दूसरी कहानियों के बीच ये कंटेंट के मामले में थोड़ी कमजोर दिखती है। साथ ही यहां किरदारों का प्रभाव लंबे समय तक नहीं रह पाता।

    आई लव ठाणे

    आई लव ठाणे

    निर्देशक- धुव्र सहगल

    कलाकार- मसाबा गुप्ता, ऋत्विक भौमिक

    "मैं 34 की हूं, लेकिन मेरे दांत असली हैं".. साईबा हंसते हुए सामने बैठे लड़के से कहती है, जिससे वह एक डेटिंग साइट के जरीए मिलने आई है। अपनी करियर में सेटल साईबा को डेटिंग ऐप्स पर पुरुषों की भीड़ के बीच एक 'सही माडर्न लड़के' की तलाश है। ऐसे में उसकी मुलाकात होती है पार्थ से, जो कि उसके मापदंडों के बिल्कुल ही अपोजिट है। लेकिन कुछ मुलाकातों के बाद दोनों में नजदीकियां बढ़ती हैं। यह एक प्यारी सी भावपूर्ण प्रेम कहानी है, जिससे निश्चित रूप से दर्शक काफी रिलेट कर पाएंगे। यह डेटिंग ऐप्स के जमाने में एक सच्चे साथी को पाने के संघर्ष को दिखाती है।

    इस कहानी के जरीए धुव्र सहगत आपको सीधे ठाणे की सड़कों पर ले आते हैं, जो इसे बेहद खास बनाता। अनिरूद्ध पटनकर की सिनेमेटोग्राफी खूबसूरत है। हालांकि 41 मिनट की यह कहानी कहीं कहीं पर थोड़ी धीमी लगती है। मुख्य किरदारों में मसाबा गुप्ता और ऋत्विक भौमिक ने अच्छा काम किया है।

    कटिंग चाय

    कटिंग चाय

    निर्देशक- नुपुर अस्थाना

    कलाकार- अरशद वारसी, चित्रांगदा सिंह

    ये कहानी है एक लेखिका लतिका की, जो शादी और परिवार में उलझकर अपने ख्वाबों को पूरा करने में खुद को असमर्थ पाती है। वह सालों से एक उपन्यास पूरा करता चाहती है, लेकिन नहीं कर पाती, जिसका उसे पछतावा है। एक दिन वह खुद को अब तक के जीवन में अपने सभी विकल्पों का पुनर्मूल्यांकन करती हुई पाती है, यहां तक कि उसकी शादी भी। जैसे-जैसे कड़वी यादें और 'क्या हुआ अगर' कल्पनाएँ उसके दिमाग में समानांतर चलती हैं, वह समझती है कि उसके अतीत पर सवाल उठाना व्यर्थ है.. क्योंकि सभी जवाब उसके भीतर हैं।

    यह कहानी है जिंदगी में लिए गए विकल्पों की। विषय नया नहीं है.. लेकिन जिस तरह से पटकथा को लिखा गया है और निर्देशित किया गया है, उसमें नयापन है। मुख्य किरदारों में चित्रागंदा सिंह और अरशद वारसी परफेक्ट लगे हैं।

    देंखे या ना देंखे

    देंखे या ना देंखे

    प्यार से बंधी ये 6 कहानियां आपके वीकेंड को खूबसूरत बना सकती है। निर्देशन और अदाकारी इस सीरीज के मजबूत पक्षों में है। तमाम नकारात्मकता से दूर, ये वास्तविक और अनफ़िल्टर्ड प्रेम कहानियां आपके दिल को छूती हैं। फिल्मीबीट की ओर से मॉडर्न लव मुंबई को 3.5 स्टार।

    English summary
    Modern Love Mumbai is an anthology of 6 diverse yet universal stories of multiple human emotions, all rooted in love. It's streaming on Amazon Prime Video. Read the review here.
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