'जब लोग किरदार के नाम से बुलाएं, तो समझिए आपका काम हमेशा याद किया रखा जाएगा'- रसिका दुग्गल
Rasika Dugal on Mirzapur Movie: आज के दौर में दर्शक फिल्मों और वेब सीरीज़ के कलाकारों से ज़्यादा उनके यादगार किरदारों को याद रखते हैं। चाहे कोई दमदार नायक हो या ग्रे शेड्स वाला किरदार, वही पॉप कल्चर का हिस्सा बन जाता है।

ऐसे में कलाकारों के लिए सबसे बड़ी चुनौती होती है कि वे अपने लोकप्रिय किरदार की पहचान को बरकरार रखते हुए हर नए प्रोजेक्ट में खुद को नए अंदाज़ में पेश करें।
इस बात को रसिका दुग्गल से बेहतर शायद ही कोई समझता हो। मिर्जापुर फ्रेंचाइज़ी में उनके निभाए बीना त्रिपाठी के किरदार ने भारतीय मनोरंजन जगत की सबसे चर्चित महिला किरदारों में अपनी खास जगह बनाई है। अब जब मिर्जापुर: द मूवी के ज़रिए यह लोकप्रिय फ्रेंचाइज़ी बड़े पर्दे पर आने जा रही है, रसिका ने उस किरदार के बारे में बात की है जिसने अपनी अलग पहचान बना ली है। एक बेबस महिला से लेकर मिर्जापुर की सबसे समझदार और अप्रत्याशित ताकतवर खिलाड़ियों में से एक बनने तक, बीना त्रिपाठी का सफर आज की भारतीय कहानी कहने की शैली का एक अहम हिस्सा बन चुका है।
हालांकि बीना त्रिपाठी का नाम अब रसिका दुग्गल की पहचान बन चुका है, लेकिन उन्होंने दिल्ली क्राइम, मंटो, हामिद, आउट ऑफ लव और लार्ड कर्ज़न की हवेली जैसे अलग-अलग प्रोजेक्ट्स के ज़रिए अपनी बहुमुखी प्रतिभा भी साबित की है। इसके बावजूद, वह मानती हैं कि बीना के साथ दर्शकों का जो भावनात्मक जुड़ाव बना है, वह बेहद खास है।
अपने इस यादगार किरदार के बारे में रसिका दुग्गल ने कहा, "एक कलाकार होने की सबसे खूबसूरत बात यह है कि कभी-कभी कोई किरदार आपका कम और लोगों का ज़्यादा हो जाता है। मेरे दूसरे प्रोजेक्ट्स के लिए लोग अक्सर कहते हैं, 'आपकी परफॉर्मेंस बहुत पसंद आई।' लेकिन मिर्जापुर के लिए ज़्यादातर लोग मुझे सिर्फ 'बीना!' कहकर बुलाते हैं। वे मुझसे ऐसे बात करते हैं जैसे वे उसे व्यक्तिगत रूप से जानते हों। मेरे लिए इससे बड़ा सम्मान कुछ नहीं हो सकता, क्योंकि इसका मतलब है कि उस किरदार ने लोगों की कल्पना और दिलों में अपनी जगह बना ली है।"
उन्होंने आगे कहा, "आज के समय में यह देखना दिलचस्प है कि लोग कलाकारों से ज़्यादा किरदारों को याद रखते हैं। कई साल बाद शायद लोगों को यह याद न रहे कि उन्होंने आपको पहली बार कहाँ देखा था, लेकिन उन्हें यह ज़रूर याद रहेगा कि किसी किरदार ने उन्हें कैसा महसूस कराया था। यही कहानी कहने की असली ताकत है। हम सिर्फ अभिनय को याद नहीं रखते, बल्कि उन किरदारों की ज़िंदगी और सफर को याद रखते हैं। अगर कोई किरदार शो खत्म होने के बाद भी लोगों के साथ बना रहे, तो समझिए आपने कुछ सही किया है।"
बीना त्रिपाठी के सफर पर बात करते हुए रसिका ने कहा, "बीना को खास बनाने वाली बात यह है कि उसका किरदार लगातार बदलता और आगे बढ़ता रहा। वह ऐसा किरदार नहीं था जो हर सीज़न में एक जैसा रहे। उसने हालात के अनुसार खुद को बदला, संघर्ष किया, सीखा और आगे बढ़ी। मुझे लगता है कि दर्शक इसी बदलाव से जुड़ पाए, क्योंकि वे कभी पूरी तरह अंदाज़ा नहीं लगा पाए कि वह आगे क्या करेगी। वह न तो हीरो बनने की कोशिश कर रही थी और न ही विलेन। वह बस उस दुनिया में अपने तरीके से जीने और आगे बढ़ने की कोशिश कर रही थी, जिसमें वह फँसी हुई थी। शायद यही बात उसे इतना वास्तविक और यादगार बनाती है।"


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