..................... Heeramandi real story based on pakistani prostitution red light area in lahore Sanjay Leela Bhansali 14 years of efforts - Hindi Filmibeat

Heeramandi: पाकिस्तान में मुगलों ने बसाया शाही मोहल्ला जो बना तवायफखाना, भंसाली ने 14 सालों तक...

Heeramandi, Sanjay Leela Bhansali

Heeramandi Real Story: डायरेक्टर संजय लीला भंसाली 'गंगूबाई काठियावाड़ी' के बाद अब 'हीरा मंडी' से दर्शकों को रू-ब-रू कराने वाले हैं। भंसाली की इस वेब सीरीज का दर्शक काफी बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। ऐसे में आज हम आपको हीरा मंडी के बारे में सब कुछ बताने जा रहे हैं। आखिर किस पर आधारित है भंसाली की ये नेटफ्लिक्स पर रिलीज होने वाली वेब सीरीज और क्या है हीरामंडी की हकीकत।

क्या है हीरामंडी?

हीरा मंडी पाकिस्तान के लाहौर में रेड लाइट एरिया है। हीरा मंडी यानी हीरों का बाज़ार। कभी लाहौर की इन गलियों में दाखिल होने वाले हर शख्स को हवेलियों से घुंघरू की आवाज आती थी। लगता था मानों पूरा शहर ही ढोलक की थाप पर थिरक रहा हो। नाच गाना पेश करने वाली इन लड़कियों को तवायफ कहा जाता था। आज ये नाम कुछ कालिख ओढ़ चुका है लेकिन ऐसा हमेशा से नहीं था। शायरी, संगीत, नृत्य और गायन जैसी कलाओं में तवायफों को महारत हासिल होती थी और एक कलाकार के तौर पर उनको बेहद इज्ज़त मिलती थी। ऐतिहासिक दस्तावेज़ बताते हैं कि उन्नीसवीं सदी के अंत में लखनऊ की तवायफें राजकीय ख़ज़ाने में सबसे ज़्यादा टैक्स जमा किया करती थीं।

तवायफ से रणजीत सिंह की महोब्बत

1799 में, रणजीत सिंह नाम के एक 22 वर्षीय मिसलदार ने लाहौर पर कब्जा कर लिया और 1801 में खुद को पंजाब का महाराजा घोषित कर दिया। उन्होंने तवायफों की संस्कृति और उनके दरबारी डांस सहित मुगल शाही रीति-रिवाजों को फिर से शुरू किया। एक बार फिर, शाही मोहल्ले की तवायफों को शाही दरबार में मौका मिला। 1802 में, रणजीत सिंह को मोरन नाम की एक मुस्लिम तवायफ से प्यार हो गया, जिसके कारण उन्होंने शाही मोहल्ले के पास पापड़ मंडी में एक अलग हवेली बना ली। 1839 में सिंह की मौत के बाद, जनरल से प्रधानमंत्री बने हीरा सिंह डोगरा ने शाही मोहल्ले को अपने तरीके से चलाना शुरू किया।

शाही महोल्ला कैसे बना वेश्यावृति का अड्डा

एक ऐसा दौर आया जब शाही मोहल्ले की शान और शौकत को नजर लग। मुगलों का शासन बदला और इस इलाके की किस्मत भी बदल गई। तवायफों की कला के लिए पहचाने जाने वाला ये शाही मोहल्ला जिस्मफरोशी का अड्डा बन गया। गुजरते दौर के साथ इलाके का नाम बदलकर हीरामंडी पड़ गया। ब्रिटिश शासन ने तो इस मोहल्ले की हालत और बदत्तर कर दी। तवायफों को उन्होंने सीधा प्रॉस्टिट्यूट का नाम दे दिया। तब से ये इलाका बदनामी की अंधेरी गालियों में खोता चला गया।

पाकिस्तान में हीरामंडी का विरोध

संजय लीला भंसाली की फिल्म से पाकिस्तानी बिल्कुल भी खुश नहीं है। उनका कहना है कि कोई भारतीय फिल्म निर्माता भारत में पाकिस्तान के बारे में फिल्म कैसे बना सकता है। जब 2021 में इस प्रोजेक्ट की घोषणा की गई, तो एक्ट्रेस उशना शाह ने इसका विरोध भी किया। इस बीच, शो की ऑफिशियल स्ट्रीमिंग की तारीख का इंतजार है, जिसमें मनीषा कोइराला, सोनाक्षी सिन्हा, अदिति राव हैदरी, ऋचा चड्ढा, शर्मिन सहगल और संजीदा शेख लीड रोल्स में हैं।

हीरामंडी बनाने में भंसाली को लगे 14 साल

इस प्रोजेक्ट का आइडिया 14 साल से भी पहले मोईन बेग ने भंसाली को दिया था। हालांकि, भंसाली यह प्रोजेक्ट नहीं बना सके क्योंकि वह उस समय शाहरुख खान, ऐश्वर्या राय और माधुरी दीक्षित स्टारर 'देवदास' में व्यस्त थे। इसके बाद उन्होंने 'सांवरिया', 'गुजारिश' और फिर 'बाजीराव मस्तानी' जैसी फिल्में बनाईं और 'हीरामंडी' परवान नहीं चढ़ सकी। इसके बाद, बेग ने भंसाली से अपनी स्क्रिप्ट वापस देने के लिए कहा क्योंकि उन्होंने इसके साथ कुछ नहीं किया था। उन्होंने भी नहीं सोचा था कि यह इतनी बड़ी नेटफ्लिक्स वेब सीरीज बन जाएगी।

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