Dahaad Review: इस दमदार क्राइम- थ्रिलर सीरीज में चमकते हैं सोनाक्षी सिन्हा और विजय वर्मा, बांधे रखती है कहानी

निर्देशक- रीमा कागती और रुचिका ओबेरॉय
मेकर्स- रीमा कागती और ज़ोया अख्तर
कलाकार- सोनाक्षी सिन्हा, विजय वर्मा, सोहम शाह, गुलशन देवैया, जोया मोरानी
प्लेटफॉर्म- अमेज़न प्राइम वीडियो
"अगर इंसाफ की जाति पूछ लो ना तो वो भी ऊंची जाति का ही मिलेगा..", हर दिन भेदभाव से जूझती एक महत्वपूर्ण दृश्य में सब- इंस्पेक्टर अंजलि भाटी (सोनाक्षी सिन्हा) कहती है। वह राजस्थान के मंडावा में हो रही मौतों की जांच अधिकारी है। जो शुरुआत में आत्महत्या का मामला प्रतीत होता है, लेकिन एक के बाद एक मामले सामने आते हैं और सभी में एक पैटर्न दिखता है। एक सीरियल किलर जो खुले घूम रहा है, उसे कब, कहां, कैसे रोका जाएगा, यहां से शुरु होती है एक बांधे रखने वाली कहानी।
कहानी
इस संस्पेंस- क्राइम- थ्रिलर सीरीज में 8 एपिसोड हैं और प्रत्येक एपिसोड लगभग घंटे भर का है। कहानी की शुरुआत एक लड़की के लापता होने के मामले से होती है। जो बाद में शादी का जोड़ा पहने एक सार्वजनिक शौचालय में मृत पाई जाती है। जब मामले की जांच शुरु होती है तो पता चलता है कि सिर्फ एक नहीं, बल्कि 20 से भी ज्यादा लड़कियां गायब हैं। फिर एक के बाद एक सबकी लाशें मिलनी शुरु होती हैं। हर मामले का एक ही पैटर्न होता है.. घर से पैसा, जेवर लेकर भागी युवती और जहर खाकर मौत। जांच अधिकारी सब-इंस्पेक्टर अंजलि भाटी, एसएचओ देवी प्रसाद सिंह (गुलशन देवैया) और इंस्पेक्टर कैलाश पारघी (सोहम शाह) को शक हो जाता है कि ये एक सीरियल किलर का काम है। उनकी जांच उन्हें आनंद सवणकर (विजय वर्मा) तक ले जाती है, जो एक सहज दिखने वाला व्यक्ति है और लड़कियों के स्कूल में हिंदी साहित्य पढ़ाता है। लेकिन इस जघन्य अपराध के लिए क्या आनंद इतनी आसानी से पुलिस के हाथों में आ जाएगा? क्या अंजलि एक और लड़की की मौत रोक पाएगी? इन्हीं सवालों पर बढ़ती है पूरी सीरीज।
अभिनय
कास्टिंग के मामले में दहाड़ पूरे अंक पाती है। सोनक्षी सिन्हा ने अपने इंटरव्यू में कहा कि वो लंबे समय से ऐसे किरदार का इंतजार कर रही थीं। और सीरीज देखते हुए इस बात का अहसास होता है। कहना गलत नहीं होगा कि ये सोनाक्षी ने यहां अपना बेस्ट परफॉर्मेंस दिया है। वो बहुत व्यवस्थित रूप से भूमिका निभाती हैं। अंजलि के किरदार को निर्देशक ने कई परतों में ढ़ाला है और सोनाक्षी उसे निभाने में सफल रही हैं। वो एक ऐसी महिला को आकार देती हैं जो एक निश्चित तबके में पैदा होने के कारण कई चीजों की शिकार होती है। गुलशन देवैया अपने किरदार में कमाल करते हैं। सोहम शाह भी मजबूत नजर आए हैं। लेकिन जिसने इस सीरीज में कमाल किया है, वो हैं विजय वर्मा। इससे पहले उन्होंने डार्लिंग्स में भी नकारात्मक भूमिका निभाई थी, लेकिन यहां वो बिल्कुल अलग अंदाज में नजर आते हैं। उनके किरदार को काफी मजबूती के साथ लिखा गया है। एक सीरियल किलर के रूप में उनके किरदार की दुष्टता और विकृति उनके कुटिल लहजे और भयानक भावों से सामने आती है। वो एक मध्यवर्गीय शादीशुदा व्यक्ति के रूप में भी ध्यान आकर्षित करते हैं, जो संघर्ष कर रहा है।
निर्देशन व तकनीकी पक्ष
रीमा कागती और ज़ोया अख्तर लगातार कहानी की गंभीरता को बनाए रखते हैं। हालांकि वो सीरियल किलर की पहचान सामने लाने में समय बर्बाद नहीं करते। कहानी का मूल विषय जातिगत भेदभाव है, लव जिहाज की हल्की झलक भी दिखती है। उदाहरण के लिए पिछड़े वर्ग की अंजलि भाटी को उच्च वर्ग के घरों में प्रवेश करने की अनुमति नहीं है। अनेकों सीन दर्शकों को याद दिलाती रहती है कि समाज में भेदभाव अभी भी मौजूद है, जो दुर्भाग्यपूर्ण लेकिन वास्तविक है। राजस्थान के विभिन्न हिस्सों में फिल्माई गई, तनय साटम की सिनेमेटोग्राफी गांवों को खूबसूरती से कैमरे में कैद करती है, और सीरीज में एक यथार्थवाद लाती है। गौरव रैना और तराना मारवाह का मूल स्कोर भी अच्छी तरह से मेल खाता है। दहाड़ का हर एपिसोड लगभग घंटे भर का है। यदि इसकी एडिटिंग थोड़ी और कसी हुई होती तो ओटीटी पर बिंज वॉच के लिए परफेक्ट होती। हालांकि, दहाड़ को जो बाकियों से अलग करता है, वो है इसका मजबूत लेखन और दमदार परफॉमेंस, जो आपको अंत तक बांधे रखती है।
रेटिंग- 3.5 स्टार
रीमा कागती की क्राइम- थ्रिलर सीरीज 'दहाड़' बिना हो- हल्ला किये, कई तरह के मुद्दों को छूती है और गहनता से बात करती है। इसकी कहानी मल्टीलेयर्ड है। वहीं, निर्देशन से लेकर अभिनय, फिल्म का हर पक्ष मजबूत दिखता है। फिल्मीबीट की ओर से अमेजन प्राइम वीडियो की सीरीज दहाड़ को 3.5 स्टार।


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