आखिर क्यों सोने के गहने पिंक पेपर में ही लपेटे जाते थे? सुनार इन वजहों से चुनता था वो खास गुलाबी कागज
Why gold jewellery is wrapped in pink paper: सोने चांदी की कीमतें दिन ब दिन आसमान चूम रही हैं। कभी सोना घटता है तो लोग राहत की सांस लेते हैं लेकिन बढ़ता है तो लोगों आशाएं भी चूर होने लगती हैं। पहले तो बॉलीवुड में लार्जर सिनेमा को दिखाने के लिए खूब सोने चांदी का इस्तेमाल होता था लेकिन समय के साथ बॉलीवुड भी अब इस तरह की फिल्मों को कम दिखा रहा है, जिसमें सोने की भरपूर मात्रा में नुमाइश हो।

जब भी पहले कभी आप सोना खरीदने जाते होंगे तो आपने देखा होगा कि सुनार अक्सर एक गुलाबी रंग के पेपर से चमचमाता हुआ सोने का गहना निकालता है। लेकिन क्या आपको पता है कि सोने के गहनों को पिंक कलर के पेपर पर ही क्यों रखा जाता था?
पूरे भारत में थी यह परंपरा
पहले के समय में सुनार के पास आज जैसी लग्जरी पैकेजिंग की सुविधा नहीं होती थी। वे गुलाबी कागज सबसे ज्यादा इस्तेमाल करते थे, क्योंकि इस रंग की वजह से लोगों को लगता था कि इस कागज में लिपटा हुआ सामान महंगा और कीमती होगा। यही नहीं, गुलाबी रंग के पेपर के साथ सोने की चमक और भी निखरती हुई नजर आती थी।
ये था खास कारण
कई लोग सोचते हैं कि यह सिर्फ परंपरा या दिखावे के लिए किया जाता था, लेकिन इसके पीछे काम की वजह भी थी। गुलाबी कागज में अक्सर हल्की सी एक ऐसी परत होती है जो गहनों को नमी और हवा से कुछ हद तक बचाया करती थी। आपको बता देंस हवा और नमी धातुओं की चमक को कम कर सकती हैं। इसलिए गुलाबी कागज गहनों को सुरक्षित रखने में मदद करता था।
खरोंच और धूल से भी बचाव
गहनों को कागज में लपेटने से वे धूल, नमी और छोटी-मोटी खरोंच से भी सुरक्षित रहते थे। स्टोरेज या ले जाने के दौरान पत्थर ढीले पड़ने या हल्की घिसावट का खतरा कम हो जाता था।
अब क्यों कम हो गई यह परंपरा?
आज के समय में बड़ी जूलरी कंपनियां आकर्षक बॉक्स, वेलवेट पैकिंग और एंटी-टार्निश पाउच देती हैं। अब पैकेजिंग सिर्फ सुरक्षा के लिए नहीं, बल्कि ब्रांड और कस्टमर एक्सपीरिएंस के लिए भी की जाती है। फिर भी, गुलाबी कागज में गहने लपेटने की यह पुरानी परंपरा हमें याद दिलाती है कि पहले साधारण चीजें भी कितनी समझदारी से इस्तेमाल की जाती थीं।


Click it and Unblock the Notifications











