कौन हैं शुभ्रा रंजन? जिनकी IAS कोचिंग से पढ़ी हैं टीना डाबी और इशिता किशोर, दिल्ली में है बड़ा नाम!
Who Is Shubhra Ranjan IAS Coaching: ऐसा बेहद कम देखने के लिए मिलता है जहां पर किसी टीचर का नाम उसका ब्रांड बन जाता है और उसके नाम पर लाखों स्टूडेंट ऑनलाइन से लेकर ऑफलाइन यूपीएससी की भी तैयारी करते हैं। लेकिन ऐसा ही उत्तर प्रदेश के सीतापुर के रहने वाले शुभ्रा रंजन ने कर दिखाया है। वह अभी के वक्त में दिल्ली में IAS स्टडी के नाम से एक बहुत ही बड़ा इंस्टिट्यूट चला रही है। जहां से 2015 की टॉपर टीना डाबी और 2022 की टॉपर इशिता किशोर भी पढ़ी है।

इतना ही नहीं अनमोल सिंह बेदी (AIR 2, 2016), दिनेश कुमार (AIR 6, 2016), आनंद वर्धन (AIR 7, 2016), गिरीश बडोले (AIR 30, 2017), गुंजन द्विवेदी (AIR 9, 2018), तृप्ति धोदमिस (AIR 16, 2018), विशाखा यादव (AIR 6, 2019), सत्यम गांधी (AIR 10, 2020) और रिया डाबी (AIR 15, 2020) जैसे बहुत सारे टॉपर यहां से निकले हुए हैं और IAS और IPS बनकर देश की सेवा में है। लेकिन शुभ्रा रंजन की सफलता की कहानी इतनी आसान भी नहीं है। उन्होंने बहुत ही संघर्ष और मेहनत के बाद इस ब्रांड को बनाया है।
दिल्ली से शुरू हुई पूरी कहानी
जानकारी के लिए आपको बता दें कि लोकल 18 के साथ एक इंटरव्यू के दौरान शुभ्रा रंजन ने बताया कि वह उत्तर प्रदेश के सीतापुर के रहने वाली हैं। साल 1990 में अगर सीतापुर से कहीं भी बाहर जाते थे तो ज्यादा से ज्यादा लखनऊ तक ही जाते थे। इसके अलावा लड़कियों को ज्यादा फ्रीडम नहीं मिली थी और तब लड़का लड़की में भी काफी भेदभाव हुआ करता था। लेकिन उनका परिवार काफी एजुकेटेड था क्योंकि तब उनके परिवार में या तो ज्यादातर लोग वकील थे या फिर टीचर थे। उनके पिता भी वकील थे और मां लोकल राजनीति के साथ में एक कवयित्री भी थी।
शुभ्रा रंजन का परिवार टीचर और वकालत से भरा हुआ था। जो उनके बहुत काम आया था। इसी के चलते उनके अंदर पढ़ने लिखने के साथ-साथ कम्युनिकेशन स्किल भी मजबूत हुई। उन्होंने यह भी बताया कि सीतापुर से जब वह दिल्ली आई थी और दिल्ली विश्वविद्यालय में उनका एडमिशन हुआ तो यही से उनके आगे बढ़ने की शुरुआत हुई। यहां पर उन्होंने प्रेसिडेंट का चुनाव भी लड़ा था और जीत भी हासिल की थी। दिल्ली विश्वविद्यालय की लाइब्रेरी ने उनकी पूरी पर्सनालिटी बदल दी और सोचने समझने की भी नई दिशा दी।
2015 में शुरू की IAS स्टडी
शुभ्रा रंजन ने इस बात को बताया कि उत्तर प्रदेश के एक डिग्री कॉलेज में वह पढ़ाया करती थी और वहां पर पूरी तरीके से फ्रीडम नहीं मिलती थी। ऐसा इसीलिए क्योंकि जब आप किसी इंस्टिट्यूट में काम करते हैं तो आपको उनके मुताबिक ही चलना पड़ता है। छुट्टी लेनी होती थी तो भी आवेदन करना पड़ता था। अपने हिसाब से पढ़ा भी नहीं पाते थे। ऐसा इसीलिए क्योंकि पॉलिटिकल साइंस में उन्होंने महारत हासिल की हुई है तो उन्होंने सोचा कि क्यों ना खुद का ही इंस्टिट्यूट बना लिया जाए।
इन सब के बाद में साल 2015 में शुभ्रा रंजन ने ऑनलाइन आईएएस स्टडी की शुरुआत की थी। 2018 से उन्होंने ऑफलाइन और ऑनलाइन पूरे देश में क्लासेस शुरू कर दी थी। लाखों बच्चे इस इंस्टीट्यूट से जुड़े। शुभ्रा रंजन ने बताया कि पॉलिटिकल साइंस ने उनकी सफलता में एक अहम भूमिका निभाई है। पॉलिटिकल साइंस जैसा वह पड़ता है वैसा कोई भी टीचर आज के वक्त में पूरे देश में नहीं पढ़ा सकता। इसी के चलते पॉलिटिकल साइंस पढ़ने के लिए यूपीएससी के बच्चे उन्हें के पास में आते हैं।


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