Premanand Maharaj के परिवार में है कितने सदस्य? घर से भागकर बदला दो बार नाम, इस जाति से रखते हैं ताल्लुक

Premanand Ji Maharaj Family: वृंदावन के प्रसिद्ध श्री हित राधा केलि कुंज आश्रम के संत प्रेमानंद महाराज अक्सर अपने बयानों और प्रवचनों के चलते सुर्खियों में रहते हैं। वो लोगों को सही राह पर चलने के लिए प्रेरित करते हैं और उन्हें सलाह देते हैं कि कैसे वो रोजमर्रा की जिंदगी में भगवान का नाम लेकर भगवान की शरण में जा सकते हैं।
देश-विदेश में भक्त
प्रेमानंद महाराज की ख्याति सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी फैली हुई है। लोग दूर देशों से उनसे बात करने उनका दर्शन करने आते हैं। रोजाना उनके वृंदावन आश्रम में सैकड़ों श्रद्धालु दर्शन और आशीर्वाद के लिए पहुंचते हैं। कई जानी-मानी हस्तियां भी समय-समय पर उनसे मिलने आती हैं। जिनमें क्रिकेटर विराट कोहली और उनकी पत्नी अनुष्का शर्मा भी उन्हीं में शामिल हैं।
बचपन से ही धर्म की ओर झुकाव
महाराज का जन्म 1969 में कानपुर जिले के अखारी गांव (सरसौल ब्लॉक) में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनका असली नाम अनिरुद्ध कुमार पांडेय है। माता-पिता के नाम रमा देवी और शंभू पांडेय हैं। उनके परिवार में एक छोटा भाई भी है।
बचपन से ही उनका मन भक्ति की ओर आकर्षित था। पांचवीं कक्षा में पढ़ते समय उन्होंने श्रीमद्भगवद गीता का पाठ करना शुरू कर दिया था। महज 13 वर्ष की उम्र में उन्होंने घर-परिवार और सांसारिक जीवन को त्यागकर संन्यास ले लिया। शुरुआती दिनों में उनका नाम आर्यन ब्रह्मचारी रखा गया। इस मार्ग पर उनके गुरु बने श्री गौरांगी शरण।
साधना का सफर
संन्यास लेने के बाद सबसे पहले वह बनारस पहुंचे। वहां वे रोजाना गंगा में स्नान करते और तुलसी घाट पर बैठकर भगवान शिव और मां गंगा की उपासना करते। कई बार उन्होंने भूखे रहकर भी साधना जारी रखी।
बाद में वे वृंदावन पहुंचे और राधा-कृष्ण की भक्ति में लीन हो गए। उन्होंने राधा वल्लभ संप्रदाय से जुड़कर सत्संग और कीर्तन शुरू किए और अब उनका नाम पड़ गया श्री प्रेमानंद महाराज धीरे-धीरे उनकी पहचान पूरे देश में फैल गई और आज वह लाखों श्रद्धालुओं के आध्यात्मिक मार्गदर्शक बन चुके हैं।
बीमारी से जंग
35 साल की उम्र में अचानक तेज पेट दर्द के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया। जांच में सामने आया कि उनकी दोनों किडनियां खराब हो चुकी हैं। तब से अब तक वह हफ्ते में तीन बार डायलिसिस कराते हैं। गंभीर बीमारी के बावजूद उनका जीवन पूरी तरह से भक्ति और साधना में समर्पित है।


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