पाकिस्तानी Viral MMS अचानक भारत में क्यों ट्रेंड कर रहे हैं? इसके पीछे है खतरनाक ऑनलाइन साजिश
Viral MMS Scam 2026: जनवरी 2026 में साउथ एशिया में एक नया और खतरनाक ऑनलाइन स्कैम सामने आया। इस स्कैम में साइबर ठगों ने सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के नाम पर लीक या प्राइवेट वीडियो होने का दावा किया गया और लोगों को फर्जी लिंक भेजे गए।

इन मैसेज और ईमेल का मकसद सिर्फ एक था- लोगों को क्लिक करवाना और उनके फोन या डेटा तक पहुंच बनाना।
वीडियो टाइमिंग से बनाया जा रहा था भरोसा
ठगों ने लोगों को फंसाने के लिए एक नई तरकीब अपनाई। उन्होंने वीडियो के साथ खास टाइमिंग जैसे 7:11, 4:47 या 19:34 लिखी, ताकि लगे कि वीडियो असली है। असल में ये टाइमिंग सर्च इंजन को गुमराह करने के लिए इस्तेमाल की गई थी, जिससे फर्जी वेबसाइट्स ऊपर दिखें। जैसे ही कोई यूजर लिंक पर क्लिक करता, वह या तो मैलवेयर डाउनलोड वाली साइट पर पहुंच जाता या ऑनलाइन बेटिंग ऐप इंस्टॉल हो जाता, एडल्ट वेबसाइट खुल जाती या फिर स्पैम और फर्जी पेज पर रीडायरेक्ट हो जाता
पैरासाइट SEO से बढ़ाया गया धोखा
इस स्कैम को और खतरनाक बनाने के लिए साइबर अपराधियों ने पैरासाइट SEO जैसी तकनीक का इस्तेमाल किया। इसके तहत उन्होंने फर्जी कंटेंट को सरकारी और यूनिवर्सिटी वेबसाइट्स जैसे भरोसेमंद प्लेटफॉर्म्स पर डाल दिया। इससे लोगों को लगा कि लिंक सुरक्षित है, जबकि हकीकत इसके उलट थी।
किन-किन नामों को घसीटा गया?
इस स्कैम में कई सोशल मीडिया पर्सनालिटी के नाम इस्तेमाल किए गए, जिनमें Alina Amir, Marry और Umair, Payal Gaming, Fatima Jatoi जैसे नाम शामिल हैं। ज्यादातर मामलों में जिन वीडियो की बात की जा रही थी, वे AI से बनाए गए फर्जी डीपफेक थे, पुराने वीडियो को एडिट कर पेश किया गया था या फिर ऐसे वीडियो थे ही नहीं। इन सबका मकसद सिर्फ लोगों को डराकर या उत्सुक बनाकर उनका डेटा चुराना था।
कुछ इन्फ्लुएंसर्स ने दी सफाई
कुछ इन्फ्लुएंसर्स ने इस मामले पर खुलकर प्रतिक्रिया दी। Payal Gaming ने भारत में पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। वहीं Alina Amir ने बयान जारी कर कहा कि AI टेक्नोलॉजी का गलत इस्तेमाल कर लोगों को बदनाम किया जा रहा है और इस पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। कुछ अन्य लोग जैसे Arohi Mim और Marry-Umair कपल ने अफवाहों को बढ़ावा न देने के लिए चुप रहना बेहतर समझा।
एक्सपर्ट्स की चेतावनी
साइबर एक्सपर्ट्स और फैक्ट-चेकर्स ने साफ कहा है कि जिन वीडियो में खास ड्यूरेशन लिखी हो, उनसे सावधान रहें। ऐसे लिंक पर बिल्कुल क्लिक न करें। AI से बने डीपफेक पहचानने के लिए कुछ हिंट भी बताए गए, जैसे- आंखों का अजीब तरीके से झपकना, चेहरे की बनावट का अजीब होना, आवाज और होंठों का मेल न खाना,
सनसनीखेज हेडलाइन भी बढ़ा सकती है खतरा
एक्सपर्ट्स का मानना है कि जब डिजिटल मीडिया बिना जांच के चौंकाने वाली हेडलाइन चलाता है, तो इससे स्कैम्स को और ताकत मिलती है। ज्यादा क्लिक मिलने से फर्जी दावे और तेजी से फैलते हैं।
जनवरी 2026 का यह मामला दिखाता है कि साइबर अपराध अब पहले से कहीं ज्यादा चालाक और खतरनाक हो गया है। ऐसे में जरूरी है कि लोग ऑनलाइन सतर्क रहें। बिना सोचे-समझे लिंक पर क्लिक न करें और किसी भी वायरल दावे को सच मानने से पहले उसकी जांच करें। डिजिटल दुनिया में सुरक्षित रहने के लिए जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार है।


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