क्या है टीना डाबी की जाति जिसके कारण UPCS में मिली थी रैंक 1? बोलीं- भारत की असलीयत बदलने में समय लगेगा
Tina Dabi Caste UGC Bill Controversy: देश की सबसे चर्चित आईएएस अधिकारियों में से एक टीना डाबी का नाम एक बार फिर से सुर्खियों में आ गया है। दरअसल, यूजीसी बिल को लेकर उठे विवाद के कारण टीना डाबी के जाति और उनसे यूपीएससी सेलेक्शन को लेकर लोग चर्चा कर रहे हैं। हालांकि ऐसा पहली बार नहीं इससे पहले भी टीना डाबी की जाति की चर्चा होती रहती है।

साल 2015 के यूपीएससी रिजल्ट आने के बाद ही सोशल मीडिया पर चर्चा होने लगी थी कि टीना डाबी ने जाति का फायदा उठाकर एग्जाम में टॉप किया है। लोग आरक्षण पर सवाल उठाने लगे और टीना को कोसने लगे। दरअसल, तब टीना डाबी यूपीएससी एग्जाम के पहले फेज (prelims) में रिजर्वेशन के कटऑफ के तहत पास हुई थीं। वह SC/ST कैटेगरी के कम कटऑफ मार्क्स की वजह से मेंस एग्जाम दे पाई थीं। जबकी उनसे ज्यादा नंबर लाकर भी जनरल कैटेगरी के कई कैंडिडेट्स मेंस के लिए क्वालीफाई नहीं कर सके थे।
हालांकि, फाइनल रिजल्ट में वो ओवरऑल टॉपर रही थीं। जिसमें prelims के मार्क्स नहीं जुड़े थे। फिर भी रिजर्वेशन के पैमाने को लेकर तब खूब बहस हुई थी। क्योंकि टीना एससी कैटेगरी से होने के बावजूद आर्थिक तौर से मजबूत परिवार से आती हैं। इसके बाद वो कई मंचों से पिछड़ों को लेकर बात करती दिखी थीं।
मुंबई के बाबासाहेब अंबेडकर रिसर्च एंड ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट ने टीना को उनकी उपलब्धि के लिए सम्मानित भी किया था। इस मौके पर उन्होंने कहा था कि आज मैं जो कुछ भी हूं वो सब अंबेडकर की देन है। बाबासाहेब के संघर्षों से मुझे लगातार प्रेरणा मिलती रही है। टीना डाबी ने कहा था- भारत की असलीयत बदलने में अभी काफी समय लगेगा। हमें सिस्टम और संविधान पर भरोसा रखना चाहिए, जो पिछड़ों को अधिकार देती है।
क्या है यूजीसी विवाद
देश की उच्च शिक्षा व्यवस्था से जुड़े UGC (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) बिल पर सुप्रीम कोर्ट की रोक ने केंद्र और राज्यों के बीच अधिकारों की बहस को फिर से तेज कर दिया है। अदालत ने फिलहाल इस बिल के कुछ प्रावधानों के क्रियान्वयन पर अंतरिम रोक लगाते हुए सभी पक्षों से जवाब मांगा है।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह बिल राज्यों के संवैधानिक अधिकारों में दखल देता है और शिक्षा जैसे समवर्ती विषय पर केंद्र को अत्यधिक शक्तियां देता है। सुप्रीम कोर्ट अब यह तय करेगा कि यह कानून संघीय ढांचे के अनुरूप है या नहीं।
क्या है UGC बिल?
UGC बिल का उद्देश्य देश की उच्च शिक्षा प्रणाली में सुधार करना और विश्वविद्यालयों की निगरानी के लिए एक नया ढांचा तैयार करना है। इस प्रस्तावित कानून के तहत:
विश्वविद्यालयों को मान्यता देने की प्रक्रिया बदली जाएगी
फैकल्टी नियुक्ति और पाठ्यक्रम निर्धारण में नए नियम लागू होंगे
UGC की जगह एक नया नियामक ढांचा लाने की बात कही गई है
सरकार का दावा है कि इससे शिक्षा की गुणवत्ता सुधरेगी और वैश्विक स्तर पर भारतीय विश्वविद्यालयों की प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।


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