Success Story: पिता का उठा साया, मां ने मजदूरी करके पढ़ाया, दिव्या तंवर ने IAS-IPS बनकर रचा इतिहास
IAS Success Story: यूपीएससी एक ऐसा सपना है जो कि कई युवा हर साल देखते हैं लेकिन काफी कम इसमें कामयाब हो पाते हैं। अगर आपका निश्चय पक्का हो तो कोई बड़ी बात नहीं होती है कि अगले अधिकारी आप ही होंगे।

ऐसी ही एक कहानी है दिव्या तंवर की जिन्होंने काफी कम उम्र में अपने पिता को खो दिया था लेकिन फिर भी मां के सहारे उन्होंने सफलता हासिल की। मां मजदूरी करती थी और उनको पढ़ाती थी। दिव्या तंवर की कहानी जानकर यकीनन आप हैरान होने वाले हैं।
बता दें कि दिव्या तंवर ने महज 21 वर्ष की आयु में इतिहास रच दिया था और आईपीएस अधिकारी बनीं थीं। इसके बाद वो मेहनत करती रहीं हैं और बाद में आईएएस अधिकारी बनीं गईं थीं। आज वो अपने उम्र की हर बेटी के लिए एक प्रेरणा बनी हुई हैं जोकि आईएएस या फिर आईपीएस बनने का सपना देखती है।
कौन हैं दिव्या तंवर?
हरियाणा के निम्बी गांव में पैदा होने वाली दिव्या तंवर शुरु से ही पढ़ने में काफी अच्छी थीं। ये गांव महेंद्रगढ़ जिला में पड़ता है और वहां शिक्षा के लिए लड़कियों को उतना प्रेरित नहीं किया जाता है। दिव्या का सफर आसान नहीं था क्यों काफी कम उम्र में ही उनके सिर से पिता का साया उठ गया था। साल 2011 में उनके पिता का देहांत हो गया था और उनकी मां अकेली पड़ गईं थीं। उनकी मां का नाम बबीता तंवर हैं जो कि दिव्या की शिक्षा के लिए मजदूरी करतीं थीं और इसी तरह से उन्होंने बेटी को पढ़ाया। कहा जा है कि वो कपड़े सिलती थीं और घर चलाती थीं।
आईपीएस- आईएएस दोनों बनीं
दिव्या तंवर ने इतनी मेहनत की थी कि आप हैरान हो जाएंगे। लोग एक बार यूपीएससी निकालने में थक जाते हैं लेकिन पहली बार में दिव्या ने आईपीएस निकाला और दूसरी बार में आईएएस बन गईं। साल 2021 में 438वीं रैंक आई थी और साल 2022 105वीं रैंक आई थी। कहा जाता है कि वो विकास दिव्यकीर्ति सर की फेवरिट विद्यार्थीं हैं और उन्होंने ही मार्गदर्शन किया है।


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