कौन हैं अरुण सुब्रमण्यम? भारत का वो जज जिसने अमिरिकी रैपर को चार सालों के लिए भेजा जेल

Who Is Arun Subramanian? 3 अक्टूबर को मशहूर अमेरिकी संगीत कलाकार सीन "डिडी" कॉम्ब्स को महिलाओं के यौन शोषण और वेश्यावृत्ति से जुड़े मामलों में दोषी पाए जाने के बाद चार साल से अधिक की सजा सुनाई गई। यह सजा भारतीय मूल के अमेरिकी न्यायाधीश अरुण सुब्रमण्यम ने सुनाई। उन्होंने इस फैसले के ज़रिए समाज को सख्त संदेश देने की बात कही।
न्यायाधीश सुब्रमण्यम ने कहा कि महिलाओं के खिलाफ हिंसा और शोषण बहुत गंभीर अपराध हैं, और ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई जरूरी है। द न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, कोर्ट ने कॉम्ब्स को पहले से काटी गई सजा को ध्यान में रखते हुए 36 महीने और जेल में बिताने के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही उन पर 5 लाख डॉलर का जुर्माना और 5 साल की निगरानी में रहने की शर्त भी लगाई गई है।
कौन हैं अरुण सुब्रमण्यम:
अरुण सुब्रमण्यम का जन्म 1979 में अमेरिका के पिट्सबर्ग शहर में रहने वाली इंडियन फैमिली में हुआ था। उनके पिता कंट्रोल सिस्टम इंजीनियर थे और मां बुककीपर। उन्होंने केस वेस्टर्न रिज़र्व यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन और फिर 2004 में कोलंबिया लॉ स्कूल से लॉ की पढ़ाई पूरी की।
अपने करियर की शुरुआत उन्होंने अमेरिका के अलग अलग कोर्ट रूम में जजों के साथ क्लर्कशिप करके की, जिसमें सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस रूथ बेडर गिन्सबर्ग भी शामिल थीं। बाद में उन्होंने न्यूयॉर्क की कानूनी फर्म "सुसमैन गॉडफ्रे एलएलपी" में लंबे समय तक काम किया, जहां वह पार्टनर भी बने।
साल 2022 में राष्ट्रपति जो बाइडेन ने अरुण सुब्रमण्यम को जज बनाने के लिए चुना। यह सुझाव चक शूमर नाम के नेता ने दिया था। फिर 2023 में अरुण एक बड़े जज बने। वह इस अदालत में जज बनने वाले पहले भारतीय मूल के व्यक्ति हैं।
कोर्ट में कॉम्ब्स की माफी:
सजा सुनाए जाने से पहले, सीन कॉम्ब्स ने पहली बार कोर्ट में बयान दिया और अपने पुराने व्यवहार के लिए माफी मांगी। उन्होंने कैसांद्रा वेंटुरा और एक अन्य महिला से, जिसने "जेन" नाम से गवाही दी, उसने माफी मांगी। उन्होंने कहा, "मैं अपने किए पर बहुत शर्मिंदा हूं, चाहे लोग कुछ भी कहें।"
कॉम्ब्स ने माना कि वह एक अच्छे पिता नहीं बन पाए और उनके काम और इज़्ज़त को भी बहुत नुकसान हुआ। उन्होंने कहा कि सबसे मुश्किल बात यह थी कि वह अपनी गलती पर सबके सामने माफी भी नहीं मांग सके।
न्यायाधीश का सख्त संदेश:
पीपल मैगज़ीन के अनुसार, न्यायाधीश सुब्रमण्यम ने कॉम्ब्स की दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि उनके "फ्रीक ऑफ्स" नामक यौन पार्टीज़ पूरी तरह सहमति से नहीं होती थीं। उन्होंने कहा कि "जब समाज में यौन हिंसा इतनी आम हो चुकी हो, तो सख्त सजा देना ज़रूरी है ताकि पीड़ितों और दोषियों दोनों को यह संदेश मिले कि ऐसे अपराध बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे।"
उन्होंने कॉम्ब्स को संबोधित करते हुए कहा, "मैं जानता हूं कि आप अभी अंधेरे में हैं, लेकिन आपके अपराध गंभीर हैं।" साथ ही उन्होंने कॉम्ब्स को अपने प्रभाव का उपयोग अच्छे कार्यों के लिए करने की सलाह दी।


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