कौन हैं सतुआ बाबा? 3 करोड़ की डिफेंडर और 5 करोड़ की पोर्शे से माघ मेले में मचाया तहलका
Who is Satua Baba Magh Mela: प्रयागराज में हर साल माघ मेला चलता है और हर बार यहां कुछ अनोखा होता है। इस बार के माघ मेले में इस बार एक संत अपनी धार्मिक कामों की वजह से नहीं बल्कि बेहद महंगी कारों की वजह से चर्चा में हैं। संत सतुआ बाबा मेला परिसर में करीब 4.4 करोड़ रुपये की पोर्श टर्बो 911 कार से पहुंचे, जिसका वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गईं। इससे पहले भी उन्हें लगभग 3 करोड़ रुपये की लैंड रोवर डिफेंडर में देखा गया था।

सतुआ बाबा के शिविर के बाहर खड़ी इन लग्जरी गाड़ियों को देखकर लोग हैरान रह गए। किसी ने इसे साधु-संतों की सादगी से जोड़ा, तो किसी ने सवाल उठाया कि क्या संतों को इतनी महंगी गाड़ियों में चलना चाहिए। यही वजह है कि यह मामला सोशल मीडिया पर बहस का मुद्दा बन गया।
कौन हैं सतुआ बाबा?
सतुआ बाबा का असली नाम संतोष तिवारी है। वह उत्तर प्रदेश के ललितपुर जिले से आते हैं। कहा जाता है कि उन्होंने 11 साल की उम्र में घर छोड़ दिया था और आध्यात्मिक जीवन अपना लिया। वह वर्तमान में वाराणसी के विष्णु स्वामी संप्रदाय के प्रमुख हैं और साल 2012 में इसके 57वें आचार्य बने थे। 2025 के महाकुंभ में उन्हें जगद्गुरु की उपाधि भी मिली थी।
माघ मेले में मिला सबसे बड़ा आश्रम का एरिया
इस साल के माघ मेले में सतुआ बाबा को आश्रम के लिए सबसे बड़ा एरिया दिया गया है। उनके शिविर के बाहर हमेशा लोगों की भीड़ लगी रहती है, जो महंगी गाड़ियों के साथ-साथ बाबा के दर्शन भी करना चाहते हैं। हालांकि आश्रम के अंदर बाबा साधारण कपड़ों में ही नजर आते हैं।
अफसरों और नेताओं की मौजूदगी से भी बढ़ी चर्चा
हाल ही में प्रयागराज के जिलाधिकारी मनीष वर्मा ने सतुआ बाबा के शिविर का दौरा किया था। इसके बाद इस मुलाकात को लेकर उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की टिप्पणी भी सामने आई, जिससे यह मामला और सुर्खियों में आ गया।
ऊंट, ट्रैक्टर और बैलगाड़ी से भी करते हैं यात्रा
जहां एक तरफ उनकी लग्जरी गाड़ियों की चर्चा हो रही है, वहीं दूसरी ओर सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो भी सामने आए हैं, जिनमें सतुआ बाबा ऊंट, ट्रैक्टर और बैलगाड़ी से यात्रा करते दिखते हैं। उनके फॉलोवर इसे सादगी और परंपरा से जोड़कर देख रहे हैं।
ट्रोलिंग पर सतुआ बाबा का जवाब
महंगी गाड़ियों को लेकर उठ रहे सवालों पर सतुआ बाबा ने कहा कि यात्रा का साधन मायने नहीं रखता, बल्कि मंजिल जरूरी होती है। उन्होंने कहा कि कोई भी व्यक्ति किसी भी साधन से यात्रा कर सकता है- कार, ठेला, ऊंट या ट्रेन।
'योगियों के लिए हैं ये सुविधाएं'
NDTV से बातचीत में सतुआ बाबा ने कहा कि ये संसाधन योगियों के लिए हैं, भोगियों के लिए नहीं। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तारीफ करते हुए कहा कि सनातन धर्म और आधुनिक व्यवस्था एक साथ चल सकते हैं।
सोशल मीडिया पर बंटी राय
इस पूरे मामले को लेकर सोशल मीडिया पर लोगों की राय साफ तौर पर बंटी हुई है। कुछ लोगों का कहना है कि संतों को सादा जीवन जीना चाहिए, जबकि कई लोग मानते हैं कि आध्यात्म और आधुनिक सुविधाएं साथ-साथ चल सकती हैं।
माघ मेले में उमड़ रही श्रद्धालुओं की भीड़
विवादों के बीच माघ मेला अपने पूरे रंग में है। एकादशी के दिन हजारों श्रद्धालुओं ने संगम में स्नान किया, जबकि अगला बड़ा स्नान 15 जनवरी को मकर संक्रांति के दिन होगा। इससे पहले पौष पूर्णिमा पर 31 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने संगम में आस्था की डुबकी लगाई थी।


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