विराट-अनुष्का की तरह प्रेमानंद महाराज से लेनी है गुरु दीक्षा? अपनाएं ये तरीका और नियम, आप भी बन जाएंगे शिष्य!

Premanand Maharaj Guru Diksha Process: वृंदावन में रहने वाले प्रेमानंद जी महाराज आज दुनिया भर में जाने जाते हैं। उनके करोड़ों भक्त हैं, जो उन्हें अपना मार्गदर्शक और गुरु मानते हैं। हाल ही में पावर कपल माने जाने वाले विराट कोहली और अनुष्का शर्मा ने भी प्रेमानंद महराज जी से गुरु दीक्षा ली और उनकी शरण में चले गए। अगर आप भी प्रेमानंद महाराज से दीक्षा लेना चाहते हैं तो हम आपको इस आर्टिकल के जरिए पूरी जानकारी देंगे।

Premanand Maharaj Guru Diksha Process

देश ही नहीं, विदेशों से भी लोग प्रेमानंद जी महाराज के दर्शन करने और सत्संग के लिए वृंदावन आते हैं। आम लोगों के साथ-साथ बड़े नेता, अभिनेता, अधिकारी और कई मशहूर हस्तियां भी उनसे मिलने पहुंचती हैं।

आज के समय में प्रेमानंद महाराज के सत्संग सोशल मीडिया पर भी खूब देखे और सुने जाते हैं। लाखों लोग रोज़ उनके प्रवचन सुनते हैं और उनसे जीवन से जुड़ी सीख लेते हैं। उनकी बातें सरल होती हैं, लेकिन दिल को छू जाती हैं। यही वजह है कि बहुत से लोग उन्हें अपना गुरु बनाना चाहते हैं।

गुरु बनने की परंपरा क्या है?

हिंदू धर्म में किसी संत को गुरु मानने के लिए दीक्षा लेना जरूरी माना जाता है। ब्रज क्षेत्र की परंपरा के अनुसार, जब कोई व्यक्ति दीक्षा लेता है तो गुरु उसे कंठी पहनाते हैं। इसके बाद ही वह व्यक्ति पूरी तरह से गुरु का शिष्य माना जाता है।

प्रेमानंद महाराज से दीक्षा कैसे लें?

अगर आप प्रेमानंद जी महाराज को अपना गुरु बनाना चाहते हैं, तो इसके लिए आपको वृंदावन में स्थित उनके आश्रम राधा केली कुंज जाना होगा। यहीं पर उनके दर्शन के साथ-साथ दीक्षा भी ली जाती है।

दीक्षा के लिए कोई तय दिन या समय नहीं होता। आप अपनी श्रद्धा और इच्छा के अनुसार कभी भी दीक्षा लेने आ सकते हैं। इसके लिए सुबह लगभग 9:30 बजे आश्रम पहुंचना होता है। वहां आश्रम से जुड़े सेवक आपको महाराज जी से मिलने के लिए एक टोकन देते हैं।

दीक्षा से पहले क्या बताया जाता है?

टोकन लेते समय आपसे पूछा जाता है कि आप दीक्षा क्यों लेना चाहते हैं।

अगर आप गृहस्थ जीवन में रहते हुए दीक्षा लेना चाहते हैं, तो उसके नियम अलग होते हैं।

और अगर आप दीक्षा लेकर वैराग्य का मार्ग अपनाना चाहते हैं, तो उसके लिए अलग नियम होते हैं।

इन सभी नियमों और बातों की पूरी जानकारी आपको आश्रम में समझा दी जाती है। इसके बाद आपको दीक्षा का समय दिया जाता है, जिस दिन प्रेमानंद जी महाराज स्वयं आपको दीक्षा देते हैं।

भक्ति और अनुशासन का रास्ता

प्रेमानंद महाराज से दीक्षा लेना सिर्फ एक रस्म नहीं है, बल्कि भक्ति, अनुशासन और सच्चे मार्ग पर चलने का संकल्प है। इसी कारण आज उनके शिष्यों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।

कंठी माला पहनने के नियम

प्रेमानंद जी महाराज से दीक्षा लेने पर जो तुलसी की कंठी पहनाई जाती है, उसके भी कई नियम हैं, जिनका पालन करना जरूरी है। इसे पहनने से पहले शुद्ध किया जाता है और भगवान को अर्पित किया जाता है। जो लोग इसे धारण करते हैं, उनसे साफ-सुथरी आदतें, सादा जीवन और नियमित पूजा-पाठ की उम्मीद की जाती है। अशुद्ध कार्यों के दौरान या मांसाहार, प्याज, लहसुन और शराब का सेवन करते समय इसे नहीं पहनना चाहिए। माला को साफ रखना चाहिए और जमीन पर गिरने नहीं देना चाहिए। इसे एक आस्था और जिम्मेदारी के रूप में देखा जाता है।

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