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कैसे दिखते हैं भगवान शिव? Premanand Maharaj ने बताया महादेव की कद-काठी और रंग-रूप!

Premanand Maharaj

Premanand Ji Maharaj On Lord Shiva: भारत की पावन भूमि पर सदियों से संत और महात्मा जन्म लेते रहे हैं, जिन्होंने लोगों को धर्म, भक्ति और जीवन का सच्चा मार्ग दिखाया। इन्हीं महान संतों में एक नाम है प्रेमानंद महाराज का, जो भगवान शिव के परम भक्त थे। उनका पूरा जीवन शिवभक्ति और समाज सेवा को समर्पित रहा।

कभी शिव भक्त थे प्रेमानंद जी महाराज

प्रेमानंद महाराज का जन्म भारत में हुआ था। बचपन से ही वे धर्म और अध्यात्म की ओर झुके हुए थे। उन्हें संतों की संगति और शास्त्रों के अध्ययन का अवसर मिला, जिसने उनके जीवन की दिशा तय की। प्रेमानंद महाराज कभी भगवान शिव के अनन्य भक्त हुआ करते थे। वे हर मौके पर शिव नाम का ध्यान करते और अपने अनुयायियों को भी शिवभक्ति का महत्व बताते थे।

कैसे दिखते हैं भगवान शिव

लेकिन वो बाद में वृंदावन आ गए और फिर राधा रानी की भक्ति में लग गए। कुछ लोगों का तो ये भी मानना है कि प्रेमानंद जी महाराज को भोलेनाथ के साक्षात दर्शन भी हुए हैं। ऐसी ही जिज्ञासा मन में लिए एक भक्त प्रेमानंद जी महाराज के पास पहुंचा और पूछ बैठा कि आखिर महादेव कैसे दिखते हैं? जिसका जवाब सुनने के लिए और भी भक्त वहां उत्सुक हो गए।

प्रेमानंद जी महाराज ने जवाब दिया कि बेटे को देख लो तो बाप का अनुमान लग जाता है ना। उनकी जटा बहुत बड़ी है। अपार सौंदर्य समुद्र हैं... सुंदरता के समुद्र हैं भगवान शिव।

प्रेमानंद जी की शुरुआती जिंदगी

प्रेमानंद जी का प्रारंभिक जीवन बहुत ही सादगी और भक्ति से जुड़ा हुआ था। उनका जन्म एक साधारण परिवार में हुआ था। बचपन से ही वे भगवान के प्रति गहरी आस्था रखते थे। घर के माहौल और माता-पिता की संस्कारपूर्ण परवरिश ने उनके जीवन पर गहरा असर डाला।

छोटी उम्र से ही वे धार्मिक कार्यों, भजन-कीर्तन और साधु-संतों की संगति में समय बिताना पसंद करते थे। उन्हें पढ़ाई-लिखाई के साथ-साथ अध्यात्म और वेद-पुराणों में गहरी रुचि थी। परिवार वालों ने भी उनकी भक्ति और अध्यात्म की ओर लगन को देखकर उनका पूरा साथ दिया।

युवावस्था तक आते-आते उनका मन पूरी तरह से भगवान की भक्ति में रम गया। उन्होंने सांसारिक इच्छाओं से दूरी बनाकर अपने जीवन को धर्म और समाज सेवा के लिए समर्पित कर दिया। यही कारण है कि लोग उन्हें बचपन से ही संत स्वभाव और ईश्वर-भक्त के रूप में पहचानने लगे।

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