सब्ज़ी बेचने पर मजबूर सिंधिया का राजकुमार, 400 कमरो-560 किलो सोने से जड़े 4000 करोड़े के महल को किया साइड!

Jyotiraditya Scindia Son Mahanaryaman Scindia

Jyotiraditya Scindia Son Mahanaryaman Scindia: अगर किसी के नाम के आगे 'युवराज' जुड़ा हो और सरनेम 'सिंधिया' हो, तो उसके शाही ठाट-बाट, रुतबे और लग्जरी लाइफस्टाइल का अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं होता। ग्वालियर के राजघराने की विरासत जिनके कंधों पर है, जो 4000 करोड़ रुपये के जय विलास पैलेस में रहते हैं और जिनकी तिजोरी अरबों की दौलत से भरी है उनके शाही अंदाज पर किसी को शक नहीं होगा।

लेकिन ग्वालियर के युवराज महाआर्यमन सिंधिया ने पुश्तैनी दौलत और शोहरत के बजाय अपने जुनून को चुना है। वे अपनी एक अलग पहचान बनाने की कोशिश में लगे हैं। करोड़ों-अरबों की संपत्ति के मालिक होने के बावजूद वे सब्जी-भाजी बेचने वाली एक स्टार्टअप कंपनी चला रहे हैं।

युवराज का अलग अंदाज

अक्सर देखा जाता है कि राजघरानों के युवराज शाही ठाठ-बाट में डूबे रहते हैं और अपार दौलत होने के कारण उन्हें काम-काज की ज्यादा चिंता नहीं होती। लेकिन सिंधिया परिवार के युवराज महाआर्यमन की सोच बाकी सबसे अलग है। उन्होंने न तो पिता ज्योतिरादित्य सिंधिया की राजनीति को चुना और न ही राजघराने की विरासत को ही अपनाया, बल्कि फल-सब्जी बेचने का व्यवसाय शुरू किया। जब उन्होंने यह रास्ता चुना तो लोगों ने ताने मारे कहा गया कि युवराज महल छोड़कर सब्जी बेच रहे हैं। लेकिन आर्यमन ने ठान लिया था कि उन्हें कुछ ऐसा करना है, जो पूरी तरह उनके दम पर हो।

सब्जी-भाजी बेचते हैं युवराज

दून स्कूल में पढ़ाई के दौरान ही आर्यमन ने यह फैसला कर लिया था कि वह अपनी पहचान खुद बनाएंगे। उन्होंने अपने एक दोस्त के साथ मिलकर साल 2021 में 'Myमंडी' नाम से एक स्टार्टअप की शुरुआत की। महाआर्यमन इस कंपनी के को-फाउंडर हैं और अपने इस बिजनेस आइडिया को आगे बढ़ाने में पूरी मेहनत से जुटे हुए हैं। शुरुआत में वह खुद हर सुबह मंडी जाकर ताजे फल और सब्जियां खरीदते थे और फिर उन्हें अपने ऐप के माध्यम से लोगों तक पहुंचाते थे।

विलायत से पढ़ाई

महाआर्यमन ने अपनी शुरुआती शिक्षा दून स्कूल से प्राप्त की और उसके बाद उन्होंने येल यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप और सॉफ्टबैंक जैसे नामी संस्थानों में काम किया। अब वे अपना खुद का कारोबार खड़ा करने में जुटे हुए हैं।

क्या है युवराज की Myमंडी

महाआर्यमन सिंधिया की 'Myमंडी' एक ऑनलाइन एग्रीगेटर स्टार्टअप है, जो फल और सब्जियों की थोक सप्लाई का काम करती है। यह कंपनी ताजा फल-सब्जियों को खरीदकर उन्हें पुशकार्टर्स यानी हाथगाड़ी वालों और अन्य ग्राहकों तक पहुंचाती है। इस स्टार्टअप से कई किसान भी जुड़े हुए हैं। महाआर्यमन ने अपने दोस्त सूर्यांश राणा के साथ मिलकर इस कृषि आधारित स्टार्टअप की शुरुआत की थी। फिलहाल यह स्टार्टअप पांच शहरों में अपनी सेवाएं दे रहा है और धीरे-धीरे अपने विस्तार की ओर बढ़ रहा है।

खड़ी कर रहे करोड़ों की कंपनी

एक इंटरव्यू में आर्यमन ने बताया कि उन्हें अपने इस बिजनेस से इतना लगाव है कि वे आज भी खुद मंडी जाकर सामान खरीदते हैं। भीड़ में पहचान न हो, इसके लिए वे अक्सर अपना चेहरा ढक लेते हैं।

अब तक Myमंडी तीन फंडिंग राउंड पूरे कर चुकी है। सितंबर 2023 में कंपनी ने 1.2 मिलियन डॉलर के वैल्यूएशन पर निवेश हासिल किया था। महाआर्यमन का कहना है कि वे लगभग आठ करोड़ रुपये की अगली फंडिंग जुटाने की योजना पर काम कर रहे हैं, और फिलहाल कंपनी का मूल्यांकन करीब 150 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। इतना ही नहीं, दिग्गज उद्योगपति रतन टाटा भी उनके इस स्टार्टअप में निवेश कर चुके हैं।

सेल्फी लेने की होड़

महाआर्यमन सिंधिया ने महज 13 साल की उम्र से ही अपने पिता के चुनाव प्रचार और जनसभाओं में हिस्सा लेना शुरू कर दिया था। लोगों से मिलना-जुलना और उनके लिए काम करना उन्हें हमेशा से पसंद रहा है। वो सोशल मीडिया पर भी काफी लोकप्रिय हैं, और जब भी कहीं नजर आते हैं तो उनके साथ सेल्फी लेने के लिए लोग कतार में लग जाते हैं।

400 कमरे का महल

ग्वालियर के युवराज महाआर्यमन सिंधिया अपने परिवार के साथ भव्य जयविलास महल में रहते हैं। यह महल साल 1874 में बनकर तैयार हुआ था, और उस समय इसकी निर्माण लागत करीब 1.1 करोड़ रुपये थी।फाइनेंशियल एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, आज के दौर में इस महल की कीमत लगभग 4,000 करोड़ रुपये आंकी गई है।

560 किलो सोने से सजा महल

सिंधिया परिवार का जयविलास पैलेस अपने भव्य दरबार हॉल और सोने-चांदी की शानदार कारीगरी के लिए मशहूर है। इस महल की सजावट में करीब 560 किलो सोने का इस्तेमाल किया गया है।महल को तैयार होने में पूरे 12 साल लगे थे और करीब 146 साल पहले इसके निर्माण पर लगभग 1 करोड़ रुपये खर्च हुए थे। सोने से सजा यह महल आज भी उसकी शाही भव्यता की मिसाल है।

दुनिया का सबसे भारी झूमर

जयविलास महल के दरबार हॉल की छत पर दुनिया का सबसे भारी झूमर लगा हुआ है, जिसका वजन करीब साढ़े तीन हजार किलो है। इस विशाल झूमर को छत से टांगने से पहले कारीगरों ने छत की मजबूती की जांच करने के लिए उस पर दस हाथियों को चढ़ाया था। लगातार दस दिन तक हाथी छत पर चलते रहे, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि छत झूमर का भार सह सके। जब पूरी तरह आश्वस्त हो गए, तभी इस झूमर को टांगा गया। इस अद्भुत झूमर को देखने हर साल बड़ी संख्या में लोग महल पहुंचते हैं, क्योंकि यह दुनिया का सबसे भारी झूमरों में से एक माना जाता है।

किचन से डाइनिंग टेबल तक दौड़ती है चांदी की ट्रेन

जयविलास पैलेस का भव्य डाइनिंग हॉल राजा-महाराजाओं की शाही और भव्य जीवनशैली की झलक पेश करता है। भोजन परोसने के लिए इस हॉल में खासतौर पर चांदी की बनी एक खूबसूरत ट्रेन मौजूद है, जो डाइनिंग टेबल पर लगी पटरी पर चलती है।महल में खाने के लिए सोने और चांदी के बर्तनों का इस्तेमाल होता है। इसके अलावा स्टाफ के लिए अलग कमरे, गार्ड्स, पोलो ग्राउंड, स्विमिंग पूल, जिम जैसी तमाम लग्जरी सुविधाएं आज भी इस शाही विरासत में शामिल हैं।

युवराज को लोगों का भरपूर प्यार

युवराज को जनता का खूब स्नेह और सराहना मिलती है। शाही परिवार से संबंध रखने के बावजूद उन्होंने अपनी अलग राह चुनी और अपने दम पर काम की शुरुआत की। उन्होंने अपनी मेहनत और काबिलियत से खुद को साबित करने की पूरी कोशिश की है, जो लोगों को बेहद प्रेरणादायक लगती है। वो अक्सर आम लोगों के बीच पहुंच जाते हैं और अपने काम को लेकर उनकी राय जानने की कोशिश करते हैं। कभी ग्राहकों से तो कभी थोक विक्रेताओं से फीडबैक लेते हैं, ताकि अपने स्टार्टअप को और बेहतर बना सकें।

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