Iran पर हो रहे मिसाइल से हमले, मारे जा रहे लोग, 16 साल की लड़की के श्राप की वजह से देश हो रहा बर्बाद?

Iran crisis

Iran Israel War 2025: पश्चिम एशिया में तनाव इन दिनों चरम पर है। ईरान के कई शहरों पर इजराइल के हवाई हमलों में अब तक कई टॉप साइंटिस्ट और सेना के अफसरों की मौत हो चुकी है। राजधानी तेहरान समेत बड़े शहरों में डर और दहशत का माहौल है।

अब आशंका जताई जा रही है कि अमेरिका भी इस लड़ाई में इजराइल का खुलकर साथ दे सकता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह जंग ईरान में सत्ता परिवर्तन की ओर इशारा कर रही है। कुछ लोग ये भी कह रहे हैं कि आज ईरान की ये हालत एक श्राप की वजह से हुई है।

कौन थी आतेफा साहलेह?

इस युद्ध जैसे माहौल में सोशल मीडिया पर एक बार फिर 16 वर्षीय आतेफा साहलेह की कहानी वायरल हो रही है। यह घटना 2004 की है, लेकिन इसके जख्म आज भी लोगों के दिलों में ताजा हैं। लोग मानते हैं कि ईरान पर अब उस मासूम लड़की का श्राप लग चुका है, जिसे बिना सुनवाई के सिर्फ 'चरित्रहीनता' के आरोप में फांसी पर लटका दिया गया था।

क्या हुआ था 15 अगस्त 2004 को?

ABC न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के नेका शहर में 15 अगस्त 2004 की सुबह, 16 साल की आतेफा को लोगों के सामने खींचते हुए लाया गया। एक मोबाइल क्रेन को फांसी के फंदे में बदला गया और उसे सरेआम मौत दे दी गई।

आतेफा का गुनाह क्या था?

ईरान की मोराल पुलिस ने उस पर यह आरोप लगाया कि वह एक पुरुष के साथ शारीरिक संबंध में थी। अदालत ने इसे नैतिक अपराध माना और उसे मौत की सजा सुनाई, जिसे हाई कोर्ट ने भी बरकरार रखा।

आतेफा की जिंदगी: दर्द, अकेलापन और संघर्ष

आतेफा की मां की मौत सड़क हादसे में हुई थी और उसके पिता नशे की गिरफ्त में थे। वह अपने दादा-दादी के साथ रहती थी और घर का पूरा काम करती थी। पर अंदर से वह बेहद अकेली थी और बस अपनी जिंदगी की में प्यार और अपनापन चाहती थी। एक मनोवैज्ञानिक रिपोर्ट के अनुसार, वह इमोशनल सहारे की तलाश में थी, जो उसकी मानसिक स्थिति को दर्शाता है।

क्या जज की निजी दुश्मनी ने ली एक मासूम की जान?

BBC की मशहूर डॉक्यूमेंट्री Execution of a Teenage Girl में दावा किया गया है कि केस के जज ने आतेफा से निजी नाराजगी के चलते दस्तावेजों में छेड़छाड़ की। उसकी असली उम्र 16 साल थी, लेकिन उसे 22 साल का दिखाया गया ताकि उसे कानूनी रूप से फांसी दी जा सके। क्योंकि ईरान में 18 साल से कम उम्र वालों को फांसी की इजाजत नहीं है।

फांसी देने के मामले में ईरान दूसरे नंबर पर

ईरान, चीन के बाद दुनिया का दूसरा देश है जहां सबसे ज्यादा फांसी दी जाती हैं। लेकिन यहां फांसी की वजह केवल हत्या या आतंकवाद नहीं है, बल्कि 'चरित्रहीनता', 'नैतिक अपराध' और सामाजिक नियमों के उल्लंघन पर भी मौत की सजा दी जाती है।

क्या आतेफा का श्राप ईरान पर पड़ रहा भारी?

20 साल बाद आतेफा की कहानी फिर से सामने आना सिर्फ इत्तेफाक नहीं माना जा रहा। लोग सोशल मीडिया पर लिख रहे हैं कि उसकी आत्मा आज भी न्याय मांग रही है और शायद आज जो संकट देश पर मंडरा रहा है, वो उसी मासूम की बेआवाज चीखों का असर है।

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