VIDEOS: मां का दूध पीकर IPS केके बिश्नोई ने निकाली IPS अंशिका वर्मा की बारात? पापा के साथ जमकर डांस
IPS KK Bishnoi IPS Anshika Verma Wedding: देश भर में इन दिनों IPS अधिकारी केके बिश्नोई और IPS अंशिका वर्मा की शादी के चर्चों जोरों पर हैं। इस शादी के लिए फैंस किसी बॉलीवुड ग्रैंड वेडिंग की तरह ही एक्साइडेट दिखाई दे रहे हैं। सगाई के बाद अब शादी की रस्में भी शुरू हो चुकी हैं और सोशल मीडिया पर लगातार तस्वीरें और वीडियो सामने आया का सिलसिला जारी है।

पापा के साथ IPS केके बिश्नोई ने किया डांस
IPS केके बिश्नोई की हल्दी सेरेमनी से कुछ वीडियो सामने आए हैं जिन्हें फैंस देखना बेशक ही काफी पसंद कर रहे हैं। सबसे पहले और सबसे खूबसूरत वीडियो की बात करें तो इसमें IPS केके बिश्नोई अपने पिता के साथ डांस करते और खुशियां सेलिब्रेट करते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में दोनों सफेद कुर्ता पजामा में नजर आ रहे हैं दूल्हे राजा ने अपने कंधे से एक कटारी बांधी हुई जिससे वो किसी राजकुमार जैसे लग रहे हैं। वीडियो में वो अपने पिता के दोनों हाथ पकड़कर डांस कर रहे हैं। वहीं पीछे उनकी मां भी झूमती दिखाई दे रही हैं।
मां-पिता ने कटोरे से IPS केके बिश्नोई को पिलाया दूध
इसके साथ ही इस राजस्थानी शादी से जुड़ा एक और वीडियो सामने आया है। इस वीडियो में केके बिश्नोई की हल्दी की रस्मे चल रही हैं। इस बीच उनके माता पिता उन्हें कटोरे से कुछ पिलाते दिखाई दे रहे हैं। परंपराओं और देसी रीति रिवाजों से हो रही ये शादी हर किसी के बीच चर्चा का बिषय बनी हुई है।
वायरल हो रहा है एक और वीडियो
इसके साथ ही सोशल मीडिया पर एक और वीडियो वायरल हो रहा है जिसे कुछ लोग केके बिश्नोई की शादी से ही जोड़कर देख रहे हैं। ये वीडियो है दूध पिलाई की रस्म का। ये रस्म राजे-रजवाड़ों के काल से चली आ रही है और मुख्य रूप से शीतला माता मंदिर से जुड़ी हुई है जिसे कई राजस्थानी और राजपूती शादियों में निभाया जाता है।
क्या है वायरल वीडियो की सच्चाई
वायरल हो रहे वीडियो में लोगों का मानना है कि ये वीडियो केके बिश्नोई और उनकी मां का है। हालांकि आपको बता दें कि ये किसी और का वीडियो है। वीडियो में दिख रहा दूल्हा IPS केके बिश्नोई नहीं हैं। ये काफी पुराना वीडियो है।
क्या होती है असली रस्म
जानकारी के लिए आपको बता दें कि यह परंपरा राजस्थान के राजसी परिवारों से प्रारंभ हुई, जहां दूल्हे को विवाह से पहले मां के आशीर्वाद से नव जीवन की शुरुआत करने का अवसर मिलता था। ऐतिहासिक दृष्टि से, यह रस्म मातृभक्ति और संतान के प्रति मां के बलिदान को याद दिलाती है। पुराने समय में यह वास्तविक रूप से की जाती थी, लेकिन समय के साथ यह सांकेतिक हो गई, ताकि आधुनिक समाज में स्वीकार्य बनी रहे।


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