IPS KK Bishnoi ने पहले पीया मां का दूध फिर चढ़े घोड़ी, जानिए क्या ये दूध पिलाई की रस्म और क्यों होती है?
IPS KK Bishnoi IPS Anshika Verma Wedding: देश के मोस्ट एलिजिबल बैचलर्स IPS अधिकारियो में शुमार IPS KK Bishnoi अब बला सी खूबसूरत IPS अधिकारी अंशिका वर्मा को दुल्हन बनाने के लिए निकल पड़े हैं। केके बिश्नोई की शादी की रस्में शुरू हो चुकी हैं। हल्की लगने के बाद अब वो घोड़ी भी चढ़ चुके हैं।

IPS KK Bishnoi ने पीया मां का दूध
इसी बीच सोशल मीडिया पर उनकी शादी का एक वीडियो सामने आया है। इस वीडियो में केके बिश्नोई अपनी मां का दूध पीते दिख रहे हैं। नेटिजंस इस रस्म को लेकर काफी हैरानी जता रहे है और सवाल कर रहे हैं आखिर उन्होंने दूल्हा बनकर घोड़ी चढ़ने से पहले मां का दूध क्यों पीया? तो चलिए बताते हैं आपको शादी में क्यों की जाती है दूध पिलाई की रस्म।
क्या होती है दूध पिलाई रस्म
राजस्थान की शादियों में घोड़ी पर चढ़ने से पहले दूल्हे बने बेटे को मां द्वारा स्तनपान कराने की ये रस्म काफी पुरानी है। सोशल मीडिया पर इस रस्म के काफी सारे वीडियो वायरल होते रहते हैं। कई बार लोग कमेंट सेक्शन में इस रस्म पर बहस भी करते दिखाई देते हैं।
राजे-रजवाड़ों के काल से चली आ रही है परंपरा
जानकारी के लिए आपको बता दें कि यह परंपरा राजे-रजवाड़ों के काल से चली आ रही है और मुख्य रूप से शीतला माता मंदिर से जुड़ी हुई है। आधुनिक युग में यह प्रथा प्रतीकात्मक रूप ले चुकी है, जहां वास्तविक स्तनपान के बजाय मां दूल्हे को पताशा या दूध का प्रतीक खिलाकर आशीर्वाद देती है। यह रस्म न केवल पारिवारिक भावनाओं को उजागर करती है, बल्कि सामाजिक और धार्मिक मूल्यों को भी प्रतिबिंबित करती है।
इसलिए पिलाते हैं दूध
इस रिवाज की जड़ें बिजोलिया के शीतला माता मंदिर में हैं, जहां विवाह से पूर्व पूजा-अर्चना के दौरान यह रस्म निभाई जाती है। मान्यता के अनुसार, मां शीतला माता से प्रार्थना करती है कि उसने अपने बेटे को दूध पिलाकर और खून से सींचकर बड़ा किया है, अब वह शादी के योग्य हो गया है, इसलिए देवी मां और भावी बहू की रक्षा करें।
याद दिलाती है मां का बलिदान
यह परंपरा राजस्थान के राजसी परिवारों से प्रारंभ हुई, जहां दूल्हे को विवाह से पहले मां के आशीर्वाद से नव जीवन की शुरुआत करने का अवसर मिलता था। ऐतिहासिक दृष्टि से, यह रस्म मातृभक्ति और संतान के प्रति मां के बलिदान को याद दिलाती है। पुराने समय में यह वास्तविक रूप से की जाती थी, लेकिन समय के साथ यह सांकेतिक हो गई, ताकि आधुनिक समाज में स्वीकार्य बनी रहे।


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