..................... How Premanand Maharaj travels in luxury cars Premanand Maharaj luxury car controversy - Hindi Filmibeat

ना बैंक खाता... ना ही प्रॉपर्टी, फिर भी कैसे महंगी गाड़ियों की सवारी करते हैं Premanand Maharaj, सामने आया सच

Premanand Maharaj

Premanand Maharaj luxury car controversy: प्रेमानंद महाराज वृंदावन के एक प्रसिद्ध संत हैं, जो राधा-कृष्ण की गहरी भक्ति के लिए जाने जाते हैं। लेकिन जब से प्रेमानंद जी फेमस हुए हैं तब से सुख-सुविधआएं उनके आसपास रहती हैं। प्रेमानंद महाराज का दावा है कि उनके पास ना तो बैंक अकाउंट है और ना ही कोई प्रॉपर्टी लेकिन इसके बावजूद वो अक्सर महंगी-महंगी कारों में घूमते नजर आते हैं। क्या आप जानते हैं कैसे?

महंगी-महंगी गाड़ियों में घूमते प्रेमानंद महाराज

मजबूत Land Rover Defender से लेकर चमचमाती Porsche Cayenne तक, प्रीमियम Audi Q3, Skoda Kodiaq और ऊंची Toyota Fortuner Legender तक, इन गाड़ियों की लाइन देखकर कोई भी कार लवर कैमरा निकालकर फोटो खींचने से खुद को रोक नहीं पाता। लेकिन जब ये गाड़ी एक ऐसे संत के पास नजर आती है जो सादगी और त्याग की बात करता है तो मामला थोड़ा गड़बड़ाता सा लगता है।

ये गाड़ियां आखिर हैं किसकी?

दरअसल, इन कारों का मालिकाना हक खुद महाराज जी के पास नहीं है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, जिन गाड़ियों में वे सफर करते हैं, वे सब उनके भक्तों की होती हैं। उनके फॉलोवर्स उन्हें आराम देने के लिए नहीं, बल्कि भक्ति और सेवा के भाव से अपनी गाड़ियां समर्पित करते हैं। कई भक्त तो खुद ही महाराज जी को ड्राइव कराना पसंद करते हैं। उनके लिए अपनी कार देना किसी दिखावे के लिए नहीं, बल्कि एक श्रद्धा का प्रतीक है।

हर दिन जब महाराज जी अपने निवास से श्री हित राधा केली कुंज आश्रम, वराह घाट की ओर निकलते हैं, तो वो नजारा एक चलती-फिरती आस्था की यात्रा में बदल जाता है। जो लग्जरी SUV आमतौर पर हाईवे पर दौड़ती दिखती हैं, वे अब वृंदावन की संकरी गलियों में भक्तिभाव से चलती हैं।

प्रेमानंद महाराज के बारे में

प्रेमानंद महाराज जी का असली नाम अनिरुद्ध कुमार पांडे है। उनका जन्म 30 मार्च 1969 को उत्तर प्रदेश के कानपुर के पास एक छोटे से गांव में हुआ था। बचपन से ही उनका मन ईश्वर भक्ति में लगा था और इसी कारण वो सांसारिक जीवन से दूर रहना चाहते थे।

वो बेहद छोटी से उम्र में ही प्रेमानंद महाराज ने घर छोड़ दिया और साधु-संतों की संगति में रहने लगे। उन्होंने कठोर तपस्या और साधना की। वृंदावन पहुंचकर उन्होंने राधा-कृष्ण की भक्ति में पूरी जिंदगी समर्पित कर दी। वे रोजाना राधा का नाम जपते हैं और लोगों को भी भगवान का नाम लेने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।

उनकी भाषा बहुत सरल और भावनात्मक होती है जिससे लाखों लोग उनसे जुड़ते हैं। बचपन से ही वे बहुत साधारण जीवन जिए हैं। उन्हें भौतिक चीजों में कम रुचि थी और वे हमेशा दूसरों की सेवा में लगे रहते थे। उनके प्रवचन जीवन को सुधारने वाले और पॉजिटिव सोच देने वाले होते हैं।

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