कितने पढ़े-लिखे हैं Gaur Gopal Das? फैमिली-लाइफस्टाइल देखकर आप भी रह जाएंगे हैरान! जीते हैं लग्जरी लाइफ

Gaur Gopal Das family background: भारत के जाने-माने मोटिवेशनल स्पीकर और आध्यात्मिक गुरु गौर गोपाल दास आज लाखों लोगों की जिंदगी में प्रेरणा का स्रोत बन चुके हैं। उनके शब्द, उनके विचार और जीवन की सीख हर किसी के दिल को छू जाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि साधु बनने से पहले वह एक इंजीनियर थे और एक बड़ी कंपनी में काम भी कर चुके हैं? आइए जानते हैं उनकी जिंदगी से जुड़ी खास बातें।
कहां और कब हुआ जन्म?
गौर गोपाल दास का जन्म 24 दिसंबर 1973 को महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के छोटे से गांव वंबोरी में हुआ। साल 2025 तक उनकी उम्र 51 साल हो चुकी है।
पढ़ाई-लिखाई
उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई के बाद इंजीनियरिंग चुनी। पहले उन्होंने पुणे के कसरो वाडिया इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा किया और फिर कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, पुणे (COEP) से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की।
नौकरी छोड़कर साधु बने
पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने कुछ समय तक HP (Hewlett-Packard) कंपनी में इंजीनियर के तौर पर काम किया। लेकिन 1996 में उन्होंने सबकुछ छोड़कर आध्यात्मिक जीवन अपनाया और ISKCON (इंटरनेशनल सोसायटी फॉर कृष्णा कॉन्शियसनेस) से जुड़ गए। तब से वे ब्रह्मचारी जीवन जी रहे हैं।
गुरु और आध्यात्मिक सफर
गौर गोपाल दास वैष्णव परंपरा से जुड़े हैं। उन्हें प्रसिद्ध संत राधानाथ स्वामी से दीक्षा मिली। आज वह अपने प्रवचनों और लेक्चर्स के जरिए लोगों को जीवन की गहरी सीखें आसान भाषा में समझाते हैं।
परिवार और बैकग्राउंड
वे एक मारवाड़ी जैन परिवार से हैं। उनके पिता भारतीय मौसम विभाग में नौकरी करते थे, लेकिन 2009 में उनका निधन हो गया। उनकी एक छोटी बहन भी है। गौर गोपाल दास ने कभी शादी नहीं की। उन्होंने साधु जीवन अपनाया और खुद को पूरी तरह समाज और अध्यात्म की सेवा में समर्पित कर दिया।
कितनी है नेट वर्थ?
हालांकि वे साधु जीवन जीते हैं, लेकिन उनकी लोकप्रियता दुनियाभर में है। वे मोटिवेशनल स्पीकर हैं, किताबें लिखते हैं और सेमिनार देते हैं। अलग-अलग रिपोर्ट्स के मुताबिक उनकी अनुमानित नेट वर्थ 12 से 17 करोड़ रुपये तक है।
क्यों खास हैं गौर गोपाल दास?
उनका अंदाज सबसे अलग है। वे गंभीर बातों को भी बहुत सरल और मजेदार तरीके से समझाते हैं। यही वजह है कि युवा उन्हें रोल मॉडल मानते हैं। उनकी बातें सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी लोगों को प्रेरित करती हैं।


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