विकास दिव्य कीर्ति की सबसे फेवरेट स्टूडेंट, बच्चों को ट्यूशन पढ़ाते पढ़ाते 22 की उम्र में IPS 23 में क्रैक किय

IAS Divya Tanwar: काफी सारे लोगों को लगता है कि यूपीएससी क्रैक करने के लिए लाखों की फीस और दिल्ली की कोचिंग के साथ-साथ हाई स्पीड वाई-फाई की जरूरत होती है। लेकिन आज हम आपको हरियाणा के महेंद्रगढ़ की बेटी दिव्या तंवर की कहानी बताने वाले हैं। जिन्होंने बिना किसी मदद और बिना किसी कोचिंग के घर पर एक छोटे से कमरे में बैठकर सिर्फ 22 साल की उम्र में पहले तो IPS और फिर IAS बनकर हर एक युवा की इंस्पिरेशन बन गई।

IAS Divya Tanwar

बचपन में ही चल बसे थे पिता

दरअसल दिव्या तंवर की कहानी एक बड़ी सफलता को दर्शाती है। उनका रास्ता मुश्किलों से भरा था। जब उनकी उम्र सिर्फ 8 से 9 साल थी तो उनके पिता का साया उनके सिर से उठ गया था। तीन बच्चों की जिम्मेदारी उनकी मां ने अकेले संभाली। घर की परेशानियों के बीच मां ने जिस तरीके से बच्चों को संभाला उससे दिव्या को काफी ज्यादा सपोर्ट मिला था। वह हमेशा यही कहती है कि उनकी सबसे बड़ी ताकत उनके मां ही है और उन्होंने यह ठान लिया था कि वह एक दिन ऐसा काम करके दिखाएंगी, जिससे उनकी मां को गर्व महसूस होगा।

SDM को देखकर IAS बनने की पकड़ी राह

दरअसल दिव्या तंवर की शुरुआती पढ़ाई गांव से ही पूरी हुई और इसके बाद उनका सिलेक्शन नवोदय विद्यालय में हुआ। बाकी की पढ़ाई एक सरकारी पीजी कॉलेज से उन्होंने पूरी की थी। स्कूल के वक्त दिव्या ने एक SDM ऑफिसर को देख लिया था। वहां पर उन्होंने मन बना लिया था कि वह अफसर बनेंगी। उन्होंने सोच लिया था कि अगर वह भी अवसर बन जाती है तो उनकी मां को वही सम्मान मिलेगा जो बड़े अधिकारियों के परिवारों को दिया जाता है। यहीं से उन्होंने UPSC की तैयारी करना शुरू कर दिया।

बिना कोचिंग और इंटरनेट के की थी पढ़ाई

अभी के वक्त में ऑनलाइन क्लासेस लेने के लिए बच्चे और महंगे फोन और हाई स्पीड वाई-फाई मांगते हैं। लेकिन तब दिव्या के पास में ऐसा कुछ भी नहीं था और उन्होंने अपनी स्ट्रेटजी बहुत ही सिंपल तरीके से फॉलो की थी। सबसे पहले तो उन्होंने UPSC के आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर पूरा सिलेबस डाउनलोड कर लिया। इसके बाद एग्जाम के पैटर्न को बहुत ही गहराई से समझा।

उनके आसपास या फिर रिश्तेदारों में ऐसा कोई भी नहीं था जो सिविल सर्विसेज की तैयारी करता हो। इसीलिए उन्होंने टॉपर्स के इंटरव्यू देखें और उनके बताए हुए किताबें की लिस्ट बनाकर सेल्फ स्टडी करने लगी। वह घर पर ही एक कमरे में बैठकर कई घंटे तक पढ़ती रहती थी और बेसिक मजबूत करने के लिए दिव्या ने NCERT की किताबों से पढ़ाई की।

खर्च चलाने के लिए बच्चों को पढ़ाती थी ट्यूशन

दिव्या के घर की हालत इतनी भी अच्छी नहीं थी। इसीलिए पढ़ाई का खर्चा और किताबों की फीस को निकालने के लिए उन्होंने गांव के ही एक स्कूल में दो से तीन घंटे पढ़ाना शुरू किया। घर पर बच्चों को ट्यूशन भी दिया करती थी। यहां से जो पैसे मिलते हैं उसे अपने घर के खर्च और अपनी पढ़ाई के खर्च निकाल लेती थी।

पहले अटेम्प्ट में ही क्रैक किया था UPSC

जानकारी के लिए आपको बताते चलें कि दिव्या ने पहली बार 2021 में UPSC की परीक्षा दी थी और पहले ही अटेम्प्ट में 438वीं रैंक हासिल करके IPS बन गई थी। उन्हें मणिपुर कैडर मिला था और वह IAS बनना चाहती थी। साल 2022 में फिर उन्होंने दोबारा परीक्षा दी और यहां पर 105वीं रैंक के साथ वह IAS बन गई थी।

दिव्या तंवर की सैलरी

दिव्या तंवर अभी के वक्त में एक IAS अधिकारी के तौर पर काम कर रही है और उन्हें काफी अच्छा वेतन भी मिलता है। सातवें वेतन आयोग के नियमों की माने तो एक IAS अधिकारी की शुरुआती सैलरी 56,100 प्रतिमाह होती है। इसमें उन्हें महंगाई भत्ता, मकान किराया भत्ता और यात्रा भत्ता जैसे सरकारी भत्ते भी दिए जाते हैं। अगर इन सबको जोड़ दिया जाए तो कुल मिलाकर उन्हें 1 लाख रुपए की सैलरी या उससे ज्यादा मिलती है।

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