‘सनफ्लावर’ रिव्यू- जबरदस्ती के संस्पेंस और ह्यूमर के बीच सुनील ग्रोवर का शानदार अभिनय
वेब सीरीज: सनफ्लावर
निर्देशक: राहुल सेनगुप्ता और विकास बहल
स्टारकास्ट: सुनील ग्रोवर, रणवीर शौरी, मुकुल चड्ढा, आशीष विद्यार्थी, गिरीश कुलकर्णी
ओटीटी: जी5
जी5 पर सुनील ग्रोवर, रणवीर शौरी, मुकुल चड्ढा, गिरीश कुलकर्णी, आशीष विद्यार्थी, शोनाली नागरानी की मल्टीस्टारर वेब सीरीज 'सनफ्लावर' रिलीज हो चुकी है। क्राइम कॉमेडी वेब सीरीज 'सनफ्लावर' को कंगना रनौत की क्वीन वाले डायरेक्टर विकास बहल व उनके सहयोगी राहुल सेनगुप्ता ने निर्देशत किया है। उनका नाम वेब सीरीज से जुड़ जाने के बाद इससे उम्मीदें भी बढ़ जाती है। लेकिन क्या वह ओटीटी पर भी क्वीन की तरह सफल साबित हो पाते हैं?
इसका जवाब होगा नहीं। वेब सीरीज देखने के बाद यकीन ही नहीं होता कि ये विकास बहल द्वारा निर्देशित है। हालांकि वेब सीरीज में शानदार कास्ट है। सुनील ग्रोवर से लेकर रणवीर शौरी व आशीष विद्यार्थी जैसे कलाकार, जिन्होंने इस सीरीज को बचाने की कोशिश तो खूब की लेकिन कामयाब नहीं हो पाए।

'सनफ्लावर' को बेवजह बहुत लंबी वेब सीरीज बनाया गया है। कुछ दृश्यों की कतई जरूरत नहीं थीं। वहीं बीच बीच में सुनील ग्रोवर के पंच खूब दर्शकों को गुदगुदाने पर मजबूर भी करते हैं और रणवीर शौरी एक बार फिर इंस्पेक्टर के रोल में काफी जच रहे हैं। 'सनफ्लावर' छोटी छोटी कहानियों के जरिए शानदार मैसेज देने की कोशिश भी करती है।

कहानी
'सनफ्लावर' एक हाउसिंग सोसाइटी का नाम है। जहां 1001 नंबर के अपार्टमेंट में एक मर्डर हुआ है और इस मर्डर मिस्ट्री को सुलझाने पुलिस इंस्पेक्टर (रणवीर शौरी) हाजिर होते हैं। कहानी इसी हत्या की जांच के इर्द गिर्द घूमती है जहां सोसाइटी में सोनू सिंह (सुनील ग्रोवर), मिस्टर अय्यर (आशीष विद्यार्थी) समेत कई निवासियों से हत्या को लेकर पूछताछ होती है। इस पूरे प्रकरण के बीच छोटी मोटी कई दिलचस्प मोड़ में देखने को मिलते हैं।
साथ ही मॉर्डन सोच, महिलाओं के पहनावे, सिंगल वुमन, हिंदू मुस्लिम से लेकर कई समाज के मुद्दों को सोसाइटी के रहने वाले निवासियों के जरिए दर्शाया गया है। ये भी दिखाया गया है कि 'सनफ्लावर' सिर्फ एक फूल ही नहीं बल्कि विश्वास और एक दूसरे को फेस करने का प्रतीक भी है।

अभिनय
सोनू सिंह (सुनील ग्रोवर) का किरदार काफी जबरदस्त है। बैचलर सोनू लड़कियों के सपने तो देखता है साथ ही साथ साफ सफाई और चीजों को व्यवस्थित करने का पागलपन भी सवार है। जो कूड़ेदान में कूड़ा भी व्यवस्थित करके फेंकता है। सोनू का का कॉमिक रोल है जिसे सुनील ग्रोवर ने शानदार तरीके से निभाया है।
वहीं आशीष विद्यार्थी सोसाइटी की सेक्रेटरी मीटिंग के सदस्य है। वह मिस्टर अय्यर के रोल में काफी जच रहे हैं। उनका अनुभव इस सीरीज में साफ देखा जा सकता है। वहीं रणवीर शौरी और गिरीष कुलकर्णी पुलिस की भूमिका में हैं। रणवीर शौरी ने फिर से शानदार भूमिका अदा की है। लेकिन गिरीष का एक एक सीन काफी जबरदस्त है, वह अपने हर संवाद के दौरान दर्शकों को बांधे रखते हैं।

निर्देशन
विकास बहल के साथ राहुल सेनगुप्ता ने 'सनफ्लावर' को निर्देशित किया है। 'सनफ्लावर' का विषय अच्छा है। जहां एक हाउसिंग सोसाइटी के जरिए अलग अलग धर्मों और समुदाय की भावनाओं व तौर तरीकों को भी दिखाया गया है। साथ ही एक मीडिल क्लास लोगों के लिए सोसाइटी में घर लेना कितना मुश्किल है। सोनू सिंह (सुनील ग्रोवर) का किरदार काफी शानदार गढ़ा गया है। लेकिन इन सभी अच्छे बिंदुओं को जोड़ने में निर्देशन कमजोर रह गया। इस वजह से ये सीरीज बोझिल हो जाती है।

कमजोर पक्ष
वेब सीरीज का केंद्र मर्डर मिस्ट्री था लेकिन बीच बीच में जबरदस्ती के ह्यूमर सीन्स की वजह से वेब सीरीज भटक जाती है। कहीं कहीं ये दर्शकों को कुछ जोक्स हंसाते जरूर हैं लेकिन बेवजह के सीन्स सिर दर्द बन जाते हैं। 8 एपिसोड की इस वेब सीरीज का लेखन इसका सबसे बड़ा कमजोर पक्ष रहा है।

देखें या ना देखें
यदि आप सुनील ग्रोवर की कॉमेडी के फैन हैं तो जरूर इस सीरीज को देख सकते हैं। वहीं अगर आप सोच रहे होंगे कि जबरदस्त मर्डर मिस्ट्री और रहस्य आदि देखने को मिलेंगे तो ये सनफ्लावर आपके किसी काम का नहीं है। फिल्मीबीट की ओर से 'सनफ्लावर' को 2 स्टार।


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