टीवी की सुपरहिट एक्ट्रेस ने लिया संन्यास, मां और बहन के देहांत के बाद भीख मांग-मांगकर पाल रहीं पेट, गुफा में..
TV actress becomes sanyasi: मनोरंजन की दुनिया में जितनी चकाचौंध दिखती है, उतना ही इस दुनिया में अकेलापन और मायूसी है। हर साल किसी ना किसी एक्टर या किसी भी तरीके से एंटरटनेमेंट इंड्स्ट्री से जुड़े शख्स के जान गंवा देने की खबरें सामने आती हैं। लेकिन कुछ एक्टर्स ने अलग फैसला लेते हुए संन्यास की राह भी पकड़ी है और आज हम एक ऐसी ही एक्ट्रेस के बारे में बात करने जा रहे हैं।

टीवी इंडस्ट्री की जानी-मानी एक्ट्रेस रहीं नूपुर अलंकार आज उस जिंदगी को जी रही हैं, जिसकी कल्पना उनके चाहने वाले भी नहीं कर सकते। कभी कैमरे, मेकअप और शूटिंग शेड्यूल में उलझी रहने वाली नूपुर ने ग्लैमर की दुनिया को अलविदा कहकर संन्यास और आध्यात्म का रास्ता चुन लिया है। अब वह 'पीतांबर मां' के नाम से जानी जाती हैं और हिमालय की गुफाओं में साधना कर रही हैं।
दो दशकों का एक्टिंग करियर
नूपुर अलंकार ने करीब 20 से ज्यादा साल तक टीवी इंडस्ट्री में काम किया। 'शक्तिमान', 'अगले जनम मोहे बिटिया ही कीजोट, 'दीया और बाती हम', 'गंगा', 'घर की लक्ष्मी बेटियां' जैसे कई फेमस शोज में वह अहम किरदार निभा चुकी हैं। अपने करियर में उन्होंने लगभग 150 से ज्यादा टीवी शोज में काम कर एक मजबूत पहचान बनाई।
2022 में लिया बड़ा फैसला
साल 2022 नूपुर की जिंदगी का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। लंबे आत्ममंथन और आध्यात्मिक झुकाव के बाद उन्होंने एक्टिंग छोड़ने का फैसला किया। गुरु के मार्गदर्शन में संन्यास दीक्षा ली और सांसारिक जीवन से दूरी बना ली।
PMC बैंक घोटाले ने झकझोर दिया
नूपुर के मुताबिक उनकी जिंदगी में बदलाव की शुरुआत PMC बैंक घोटाले के बाद हुई। इस घोटाले में उनका सारा पैसा फंस गया, खाते फ्रीज हो गए और परिवार आर्थिक संकट में आ गया। इसी दौर में उनकी मां की तबीयत बिगड़ी और इलाज के लिए पैसे नहीं थे। बाद में मां और बहन के निधन ने उन्हें अंदर से तोड़ दिया और फिर उन्होंने वो फैसला लिया जो किसी भी एक्ट्रेस के लिए काफी कठिन हो सकता है।
गुफाओं में बिताए तीन साल
संन्यास लेने के बाद नूपुर ने तीन साल तक हिमालय में यात्रा की। वह गुफाओं, जंगलों और ऊंचाई वाले इलाकों में रहीं, जहां न ही हीटर था और न ही कोई सुविधाएं। उन्होंने ठंड से होने वाले जख्म, चूहों के काटने और गंभीर बीमारियों तक का सामना किया, लेकिन फिर भी इन कठिनाइयों को उन्होंने आत्मिक शांति का रास्ता बताया।
10-12 हजार में गुजारा
नूपुर बताती हैं कि संन्यास के बाद जिंदगी और आसान हो गई। जहां पहले लाइफस्टाइल, बिल और खर्चों की चिंता रहती थी, वहीं अब वह ₹10,000-12,000 महीने में गुज़ारा कर लेती हैं। वह भिक्षाटन करती हैं, सिर्फ चार-पांच जोड़ी कपड़ों में जीवन बिताती हैं और जो मिलता है, उसे भगवान व गुरु को समर्पित कर देती हैं।
अब हैं 'पीतांबर मां'
आज नूपुर खुद को 'पीतांबर मां' कहती हैं। उनके अनुसार पीतांबर न्याय के देवता का नाम है। वह मानती हैं कि उनका उद्देश्य लोगों को नकारात्मकता से बाहर निकालकर ईश्वर से जोड़ना है।
पति और परिवार का मिला साथ
इस फैसले में उनके पति और परिवार ने भी उनका पूरा समर्थन किया। पति ने उन्हें बंधनों से मुक्त किया ताकि वह बिना किसी दबाव के अपने चुने हुए मार्ग पर चल सकें।
सादगी में मिला सुकून
नूपुर अलंकार की कहानी इस बात की मिसाल है कि सच्ची शांति शोहरत में नहीं, बल्कि आत्मिक संतोष में छिपी होती है। जहां कभी उनकी पहचान टीवी स्क्रीन तक सीमित थी, आज वह आत्मिक यात्रा की प्रतीक बन चुकी हैं।


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