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    द फैमिली मैन 2 रिव्यू: बांधे रखेगी मनोज बाजपेयी- सामंथा अक्किनेनी की दमदार अदाकारी और चुस्त कहानी

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    Rating:
    4.0/5

    निर्देशक - राज निदिमोरू, कृष्णा डीके, सुपर्ण वर्मा
    कलाकार- मनोज बाजपेयी, सामंथा अक्किनेनी, शारिब हाशमी, प्रियमणि, सीमा बिस्वास, शरद केलकर, सनी हिंदुजा, सीमा बिस्वास आदि
    प्लेटफॉर्म- अमेज़न प्राइम वीडियो
    अवधि- 9 एपिसोड्स/ प्रति एपिसोड 45 मिनट

    "हम अलग हैं, हम बहुत अलग हैं.. तुम एक राजनेता है और मैं हूं एक सैनिक", तमिल विद्रोहियों का नेता भास्करन (माइम गोपी) सामने बैठे अपने 30 साल पुराने सहयोगी दीपन (अज़गम पेरुमल) से कहता है। 'द फैमिली मैन 2' की कहानी इस बार देश से आगे बढ़कर श्रीलंका, लंदन, पाकिस्तान और फ्रांस तक पहुंच चुकी है।

    'द फैमिली मैन' का पहला सीज़न जहां खत्म किया गया है, निर्देशक ने उसी छोर से दूसरे सीजन की शुरुआत की है। आतंकवादी मूसा मारा जा चुका है, भयावह गैस त्रासदी से दिल्ली को बचा लिया गया है। हालांकि श्रीकांत तिवारी और उनकी टीम अभी भी उस घटना से प्रभावित हैं। क्यों! यह सीरिज में देखना आपके लिए दिलचस्प होगा।

    दूसरे सीजन की शुरुआत होती है उत्तर श्रीलंका में रह रहे तमिल विद्रोहियों से, जहां श्रीलंका की आर्मी धावा बोल देती है और विद्रोहियों का पूरा कैंप तबाह कर देती है। लेकिन वहां से विद्रोहियों का नेता भास्करन अपने विश्वासपात्र दीपन और छोटे भाई सुब्बु के साथ भागने में सफल हो जाता है। भास्करन और दीपन भागकर लंदन पहुंच जाते हैं, वहीं उसका सुब्बु चेन्नई में पनाह लेता है। विद्रोही हथियार और डिप्लोमेटिक दोनों तरीक़ों से अपनी जंग लड़ रहे हैं। भारत में अस्थिरता फैलाने के लिए आईएसआई भी भास्करन से जुड़ जाती है। इधर श्रीलंका में बन रहा बंदरगाह चीन के हाथों से बचा रहे इसीलिए भारतीय प्रधानमंत्री सुब्बु को श्रीलंका सरकार को सौंपने का फैसला सुनाती हैं।

    कहानी

    कहानी

    कहानी के दूसरे छोर पर हैं श्रीकांत तिवारी, जो दिल्ली गैस त्रासदी घटना से प्रभावित अब T.A.S.C छोड़कर 9 से 5 वाली आईटी नौकरी कर रहे हैं। वह अपने पारिवारिक जीवन को पटरी पर लाने की कोशिश करते हैं। सुरक्षित नौकरी करना, बच्चों के साथ समय गुजारना, पत्नी की मदद करना आदि। लेकिन फिर भी कहीं कुछ कमी है। दिल और दिमाग से वह T.A.S.C में ही है।

    इसी बीच अपने दोस्त जेके (शारिब हाशमी) से श्रीकांत को भास्करन से जुड़े खतरनाक मिशन की खबर लगती है। कुछ पारिवारिक मुद्दों के बाद, श्रीकांत की एक बार फिर T.A.S.C में वापसी होती है और शुरू होता है मिशन भास्करन।

    शुरु से अंत तक बांधे रखेगी सीरिज

    शुरु से अंत तक बांधे रखेगी सीरिज

    एक दृश्य में तमिल विद्रोहियों से सहानुभूति रखने वालों के बारे में बात करते हुए श्रीकांत कहता है, "दुनियाभर में आतंकवाद की परिभाषा समय-समय पर बदलती रहती है। जिसकी सरकार उसकी पॉलिसी।"

    द फ़ैमिली मैन का पहला सीज़न अपने रोमांच, देशभक्ति और जासूसी शैली के लिए काफी चर्चित रहा था। दूसरा सीजन भी उम्मीदों पर खरा उतरा है। शुरुआती कुछ एपिसोड्स में दर्शकों को विद्रोहियों के मिशन की जानकारी हो जाती है। लेकिन फिर मिशन का अंजाम तक पहुंचने का सफर आपको अंत तक बांधे रखेगा। खासकर भास्करन के टीम की सदस्य के तौर पर राजी (सामंथा अक्किनेनी) की कहानी आपको भावुक भी करेगी और गंभीर भी। बहरहाल, क्या श्रीकांत तिवारी भास्करन की टीम को हमला करने से रोक पाता है? क्या आईएसआई के मंसूबे एक बार फिर विफल होते हैं? साथ ही क्या श्रीकांत अपने परिवार के बिखराव को रोक पाता है? इन्ही सवालों के जवाब से बुना गया है 'द फैमिली मैन 2'।

    निर्देशन

    निर्देशन

    यह सीरिज दमदार दृश्यों से भरपूर है। खासकर पुलिस स्टेशन सीन और क्लाईमैक्स। बहरहाल, सीरिज के चार एपिसोड्स को राज निदिमोरू और कृष्णा डीके ने निर्देशित किया है, जबकि बाकी के पांच एपिसोड्स के निर्देशन का जिम्मा सुपर्ण वर्मा ने उठाया।

    कोई दो राय नहीं कि ये तीनों एक सफल सीक्वल बनाने में कामयाब रहे हैं। एपिसोड दर एपिसोज सीरिज की गति बढ़ती जाती है और कहानी से एक के बाद एक परत हटते जाते हैं। यह रोमांस, इमोशन और देशभक्ति से भरपूर है। कुछ एक दृश्यों में संवाद के जरीए कॉमेडी भी है। बेहतरीन बात यह है कि सीरिज में श्रीकांत तिवारी के दोनों पक्ष- फैमिली मैन और सीक्रेट एजेंट.. को बराबर दिखाया गया है।

    सीरिज एक ही पक्ष में थोड़ी कमजोर दिखती है वह संस्पेंस। कहानी में आगे क्या होने वाला है.. इसका कहीं ना कहीं अंदाजा पहले ही लगाया जा सकता है। हालांकि, यह कमी आपको ज्यादा नहीं अखरेगी।

    तकनीकी पक्ष

    तकनीकी पक्ष

    9 एपिसोड मेंराज एंड डीके ने इस कथानक को बहुत कुशलता से समेटा है।वहीं, तकनीकी पक्ष में भी सीरिज काफी मजबूत है। सिनेमेटोग्राफी, कॉस्ट्यूम, लोकेशन, बैकग्राउंड स्कोर सीरिज को एक अलग स्तर पर ले जाते हैं।

    हालांकि सीरिज में अच्छा खासा हिस्सा तमिल भाषा में ही फिल्माया गया है। दर्शकों की मदद के लिए हिंदी और अंग्रेजी सब- टाइटल दिये गए हैं। यह भले कुछ लोगों को उकता सकती है, लेकिन सीरिज को वास्तविकता के करीब ले जाती है।

    अभिनय

    अभिनय

    अभिनय की बात करें तो इस सीरिज के सबसे मजबूत पक्ष इसके कलाकार हैं। सभी अपने अपने किरदारों में परफेक्ट। श्रीकांत तिवारी के रोल में मनोज बाजपेयी की जितनी सराहना की जाए, कम है। झुंझलाहट, गुस्सा, प्यार, बेबसी, मजबूती, भावुकता, कर्तव्य निष्ठा.. सभी भाव उनके चेहरे पर बखूबी उभरकर आते हैं। वहीं, भास्करन की सहयोगी राज़ी के किरदार में सामंथा अक्किनेनी ने उम्दा काम किया है। कहना गलत नहीं होगा कि सीरिज में उनसे नजर नहीं हटाया जा सकता है, खासकर एक्शन सीन्स में। सामंथा हर फ्रेम में शानदार लगी हैं।

    क्या अच्छा क्या बुरा

    क्या अच्छा क्या बुरा

    कुल मिलाकर, दूसरे सीजन के साथ 'द फैमिली मैन' ने अपने स्तर को ऊपर बनाए रखा है। सामंथा अक्किनेनी और मनोज बाजपेयी-स्टारर यह सीजन एक मस्ट वॉच है। और हां, अंत में दिखाए गए सीजन 3 के टीज़र के लिए भी। फिल्मीबीट की ओर से सीरिज को 4 स्टार।

    English summary
    Amazon Prime Video web series The Family Man 2 Review- Manoj Bajpayee and Samantha Akkineni brilliant performance will keep you glued to the series throughtout.
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