Interview टीवी के इस मर्द को होता है सबसे ज्यादा दर्द
टीवी शो कुमकुम भाग्य में पैरलल किरदार निभाने के बाद एक्टर फैजल रशीद को हर मर्द का दर्द में लीड किरदार मिलना आसन नहीं था।
मर्द को दर्द नही होता। यह फिल्मी डायलॉग केवल सुनने में अच्छा लगता है। दर्द हर मर्द को होता है। फिर चाहे वह असल जिंदगी हो या पर्दे की। टीवी एक्टर फैजल रशीद भी इसे मानते हैं। जल्द ही वह नए शो हर मर्द का दर्द लेकर कॉमेडी शो की फेहरिस्त में शामिल होने जा रहे हैं। हाल ही हुई मुलाकात में उन्होंने अपने असल जिंदगी के दर्द हमसे बयान किए।
फैजल कहते हैं, मैं कश्मीर से हूं। वहीं पर मेरी परवरिश हुई है। मेरी पढ़ाई शिमला में हुई है। हमारे स्कूल में एक बढ़िया सिस्टम यह था कि साल में एक या दो बार हर बच्चे को स्टेज पर जाने का मौका मिलता था। हर बच्चे के लिए यह अच्छा मौका था। इस वजह से हर साल स्टेज पर जाने की मेरी आदत बन गई। मैं स्कूल के अपने उन दिनों का शुक्रगुजार हूं। वहां से मेरी दिलचस्पी एक्टिंग की तरफ बढ़ी।

स्कूल और कालेज की पढ़ाई पढ़ाई खत्म करने के बाद मैं दिल्ली की तरफ रवाना हुआ। मुझे एक्टिंग में करियर बनाना था। मैंने वर्कशॉप किया। थिएटर में छोटे-बडे़ किरदार निभाए। उन्होंने आगे कहा,मुंबई आने के बाद मैंने यहां पर कई प्रोक्शन हाउस में ऑडिशन दिए। कई शो में पैरलल किरदार निभाए।
कुमकुम भाग्य में भी एक अहम किरदार निभाया था। सच कहूं तो मुझे यकीन था कि हर मर्द का दर्द में मुझे लीड किरदार के लिए मुझे कास्ट नहीं किया जाएगा। यहां पर आडिशन के बाद पहले पायलेट सीन की शूटिंग की जाती है। इस पायलट सीन पर चैनल की मंजूरी ली जाती है। तब जाकर लीड एक्टर को कास्ट किया जाता है।
फैजल खुद के बारे में बताते हैं, हर किसी की तरह मेरे सफर में भी स्ट्रगल वाला शब्द है। इसके बारे में बात करके कोई मतलब नहीं है। स्ट्रगल चलता रहता है। इस शो में लीड में आने के बाद भी यह चलता रहेगा। इसके बाद एक काम के बाद दूसरे काम को खोजने का स्ट्रगल है। क्या करें, यह तो चलता ही रहेगा।
काम होने पर हर एक्टर की तरह मैं भी खुश हो जाता हूं। काम नहीं होगा तो निगेटिव हो जाता हूं। फिलहाल अभी खुश हूं। हाल ही में मेरी शादी हुई है। लीड के तौर पर यह शो मिल गया है। शादी शुदा होने का थोड़ा फायदा इस किरदार को मिला है।


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