भक्ति या ड्रामा? वायरल वीडियो पर सुधा चंद्रन की हुई थू-थू तो एक्ट्रेस ने खुद कही ये बात, 'मेरी भक्ति...'
Sudha Chandran devotional video controversy: टीवी और फिल्म इंडस्ट्री की जानी-मानी एक्ट्रेस सुधा चंद्रन हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो को लेकर सुर्खियों में आ गई हैं। यह वीडियो 3 जनवरी की शाम आयोजित माता की चौकी का है, जिसका आयोजन खुद सुधा चंद्रन ने किया था।

इस धार्मिक कार्यक्रम में उनके परिवार के साथ-साथ टीवी और फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े कई करीबी दोस्त भी शामिल हुए थे। वीडियो में सुधा चंद्रन भक्ति में पूरी तरह लीन नजर आ रही हैं और एक अलग ही भावनात्मक अवस्था में दिखाई देती हैं।
वीडियो के बाद शुरू हुई ट्रोलिंग
वीडियो सामने आते ही सोशल मीडिया पर लोगों की राय बंट गई। कुछ लोगों ने इसे गहरी आस्था और सच्ची भक्ति का अनुभव बताया, तो वहीं कई यूजर्स ने सुधा चंद्रन को ट्रोल करना शुरू कर दिया। ट्रोल्स का आरोप था कि एक्ट्रेस जानबूझकर ऐसा बर्ताव कर रही हैं ताकि वह लाइमलाइट में बनी रहें। कुछ लोगों ने तो उनकी भक्ति की सच्चाई पर भी सवाल उठा दिए।
ट्रोल्स पर सुधा चंद्रन का जवाब
ट्रोलिंग पर सुधा चंद्रन ने खुलकर अपनी बात रखी है। उन्होंने कहा कि भक्ति हर इंसान के लिए एक पर्सनल एक्सपीरिएंस होती है, जिसे शब्दों में समझाना या साबित करना जरूरी नहीं होता। एक्ट्रेस ने कहा- 'जब इंसान पूरे मन से पूजा करता है, तो उसे एक खास तरह की ऊर्जा और शांति महसूस होती है। सुधा ने कहा कि वह खुद को खुशकिस्मत मानती हैं कि उन्हें ऐसा एक्सपीरिएंस मिला और उनके जरिए कई लोग उस भावना से जुड़ पाए।'
'लोग क्या कहेंगे, मैंने कभी नहीं सोचा'
सुधा चंद्रन ने साफ किया कि वह किसी के सवालों का जवाब देने या खुद को सही ठहराने में यकीन नहीं रखतीं। उनके लिए उन लोगों की भावनाएं ज्यादा मायने रखती हैं, जो इस वीडियो से जुड़ पाए और जिन्हें इससे पॉजिटिव एनर्जी मिली। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी में कभी इस बात की परवाह नहीं की कि समाज या लोग उनके बारे में क्या सोचते हैं।
बचपन का हादसा जिसने जिंदगी बदल दी
सुधा चंद्रन की जिंदगी संघर्षों से भरी रही है। महज 16 साल की उम्र में एक बस हादसे ने उनकी दुनिया बदल दी थी। इस दुर्घटना में उनकी दाहिनी टांग बुरी तरह घायल हो गई थी। इलाज में हुई लापरवाही के कारण उन्हें गैंगरीन हो गया, जिसके चलते उनका दाहिना पैर काटना पड़ा। यह उनके और उनके परिवार के लिए बेहद मुश्किल समय था।
मुश्किलें पार करके लिखी सफलता की कहानी
इतनी बड़ी शारीरिक चुनौती के बावजूद सुधा चंद्रन ने हार नहीं मानी। उन्होंने नकली पैर लगवाया और करीब तीन साल तक कड़ी फिजियोथेरेपी की। अपने आत्मविश्वास और मेहनत के दम पर उन्होंने ना सिर्फ दोबारा चलना सीखा, बल्कि अपने करियर को भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।
'मैं सम्मान के साथ जीती रहूंगी'
आखिर में सुधा चंद्रन ने कहा कि भक्ति एक पर्सनल मामला है और हर किसी का ईश्वर से जुड़ने का तरीका अलग होता है। वह किसी की आस्था पर सवाल नहीं उठातीं और न ही चाहती हैं कि कोई उनकी भक्ति को जज करे। उन्होंने साफ कहा कि वह आगे भी सम्मान, आत्मविश्वास और ईश्वर के आशीर्वाद के साथ अपनी जिंदगी जीती रहेंगी।


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