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खत्म हुआ सत्यमेव जयते का सफर- एक नज़र

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Aamir Khan
बैंगलोर। 6 मई को टेलीविजन की दुनिया में एक नये दौर की शुरुआत हुई इस दौर को शुरु किया मिस्टर परफैक्शनिस्ट आमिर खान ने। महाभारत, रामायण ने जैसे दौर की शुरुआत की थी रविवार की सुबह के साथ कुछ वही समय वापस लाना चाहते थे आमिर और काफी हद तक वो इसमें सफल भी हुए। 29 जुलाई को इस शो का समापन हुआ आमिर द्वारा देश में समानता के अधिकार से वंचित वर्ग की चर्चा से।

देश में व्यापत हजारों कुप्रथाओं में से चुनकर कुछ बड़ी प्रथाओं से जुडे तथ्यों को नेशनल टेलीविजन पर लाने की कोशिश में सत्यमेव जयते की टीम ने काफी मेहनत की। पहले एपिसोड से ही आम नागरिक से लेकर राजनीती के दिग्गजों ने इस शो की सराहना की। 13 एपिसोड के इस सफर के दौरान कई बार किसी वर्ग विशेष की तरफ से मुश्किलों का सामना भी करना पड़ा शो की टीम को। लेकिन इसके बावजूद आमिर ने अपने आगे बढ़े कदमों को पीछे नहीं किया।

पहले एपिसोड में कन्या भ्रूण हत्या जैसे नाजुक मसले के साथ शुरु हुए इस शो ने लगातार 13 एपिसोड में दहेज प्रथा, डॉक्टरों के गैरकानूनी रुप से किए जानी वाली प्रैक्टिसेस, शराब की समस्या, समानता का अधिकार, खाद्य पदार्थो में पेस्टिसाईड्स की समस्या जैसी समस्याओं और कुप्रथाओं को लेकर देश के कोने कोने में रिसर्च की और ऐसे तथ्यों को सामने लाया जिन्हें देखकर देश के कानून बनाने वाले भी हतप्रद रह गए।

अपने 13वें और आखिरी एपिसोड में आमिर ने समानता के अधिकार को लेकर समाज में व्याप्त समस्या को दिखाया और साथ ही इस समस्या से जूझ रहे लोगों की जिंदगी को भी दर्शाया। शो के फिनाले की शुरुआत आमिर ने अपने देश के संविधान के पहले पेज से की। आमिर ने बताया कि देश के स्वतंत्रता सेनानियों द्वारा देश के लिए देखे गए सपने को संविधान के पहले पेज पर लिखा गया है। इसमें जो तस्वीर दिखाई गई है उसमें भारत देश को एक धर्मनिर्पेक्ष राज्य दिखा या गया है और यहां लोगों को स्वतंत्र रुप से बोलने और सोचने की स्वतंत्रता दी गई है।

लेकिन आज के भारत की तस्वीर इस तस्वीर से कहीं अलग है। कई लोगों को बोलने और सोचने के साथ साथ अपनी जिंदगी जीने तक की स्वतंत्रता नहीं दी गई है। इस एपिसोड में आमिर ने शो के जरिए पहले सर्वोदय ट्रस्ट की सराहना की जिन्होने 2001 में भूकंप में दौरान बेघर और अनाथ हो चुके हिंदू मुस्लिम बच्चों को एक छत दी। साथ ही रेप पीड़ित महिला सुनीता द्वारा रेप की शिकार हो चुकी महिलाओं और प्रोस्टिट्यूट्स को एक बेहतर जिंदगी देने के लिए चलाई जा रही संस्था प्रज्वला के लिए भी सुनीता को भी काफी सराहा।

सुनीता ने रेप की शिकार हो चुकी महिलाओं के बारे में कहा "लोग इनपर डॉक्यूमेंट्री बनाना चाहते हैं फिल्में बनाना चाहते हैं लेकिन कोई इन्हें अपनी बहु, पत्नी, बेटी या बहन नहीं बनाना चाहता। जो लोग बच्चियों को खरीदते हैं वो आराम से इस सभ्य समाज का हिस्सा हैं लेकिन इन लड़कियों को सभ्य समाज का हिस्सा नहीं माना चाहता।"

इसी एपिसोड में आमिर ने एक अपाहिज महिला नसीम हुज़रुक के भी प्रयासों की सराहना की। नसीम एक संस्था चलाती हैं जिसके द्वारा वो अपाहिज लोगों की मदद करती हैं।

इस आखिरी एपिसोड से आमिर ने बड़ी ही खूबसूरती के साथ लोगों से विदा ली और साथ ही अपने इस सत्यमेव जयते के सफर को खत्म किया।

सत्यमेव जयते से जुड़े विवाद-

सत्यमेव जयते ने जहां समाज के बड़े बड़े और इज्जतदार तमगों पर प्रश्नचिह्न लगा दिया तो इसके चलते की विवादों का भी जन्म हुआ। शुरुआत हुई डॉक्टरों द्वारा की जा रही गैरकानूनी प्रैक्टिसेस से जुड़ एपिसोड से। डॉक्टरो ने आमिर पर इल्जाम लगया कि उन्होने डॉक्टरो और मरीजों और के रिश्ते को खराब करने की कोशिश की है और डॉक्टरों के इज्जतदार प्रोफेशन को दागदार करने की कोशिश की है। उन्होने तो यहां तक कहा कि अगर आमिर ने माफी नहीं मांगी तो वो लोग आमिर की फिल्मों का बहिष्कार करेंगे। लेकिन आमिर ने अपने इस एपिसोड को लेकर किसी भी प्रकार की माफी मांगने से इंकार कर दिया। ये कहते हुए कि उन्होने किसी भी व्यक्ति विशेष या प्रोफेशन को ठेस नहीं पहुंचाई है।

इसके बाद खाप पंचायत द्वारा भी गैरजाति में विवाह या प्रेम विवाह करने को लेकर दिखाए गए एपिसोड पर सवाल उठाए गए। साथ ही खाप पंचायत ने आमिर के खिलाफ काफी कुछ कहा भी लेकिन इस बार भी आमिर ने खामोश रहकर सभी सवालों का जवाब दे दिया।

सत्यमेव जयते की सफलता-

अपने पहले ही एपिसोड से सत्यमेव जयते ने टेलीविज की दुनिया में एक क्रांति सी ला दी। कन्या भ्रूण हत्या के एपिसोड के बाद दो हफ्तों तक देश के कोने-कोने से इस कुप्रथा के विरोध में काफी आंदोलन चलाए गए। साथ ही सरकार द्वारा भी इस समस्या को काफी गंभीरता से लिया गया।

देश भर में मैला ढ़ोने की प्रथा को लेकर दिखाए गए एपिसोड के बाद आमिर इस प्रथा को बंद कराने के लिए देश के प्रधानमंत्री से भी मिलने गए जहां उन्होने आश्वासन दिया गया कि जल्द जल्द इस प्रथा को बंद कराया जाएगा। उसके बाद महाराष्ट्र में दो दिनों के अंदर इस प्रथा को खत्म भी कर दिया गया।

एक टेलीविजन शो के तौर पर बात की जाए तो रविवार को सुबह सुबह टेलीकास्ट होने वाले इस शो ने टीआरपी के मद्देनजर काफी सफलता पाई। कुछ एपिसोडों की टीआरपी कम रही पर इसके बावजूद टेलीविजन के सफल शो में इसका नाम शामिल हो गया।

निष्कर्ष-

सास बहु और रिश्तों के भंवर से निकाल कर इस रियेलिटी शो ने भले ही लोगों की जिंदगी ना बदली हो लेकिन किसी ना किसी हद तक इसके लोगों को सोचने के लिए कई नये आयाम जरुर दिये हैं। एक सेलिब्रिटी के तौर पर आमिर ने अपनी हद में रहकर काफी कुछ करने की कोशिश की है अब एक नागरिक के तौर पर हम इस पहल को कहां तक ले जाते हैं ये हमें तय करना है। समाज को बदलना मुश्किल है मगर खुद को बदलना उससे आसान है। तो अब देखना है कि आमिर द्वारा जलाई गइ इस मशाल को हम कब तक जलाए रख पाते हैं।

कुछ लोग थे जो वक्त के सांचे में ढ़ल गए... कुछ लोग थे जो वक्त के सांचे बदल गए...

बने बनाए सांचो में ढ़लना आसान है लेकिन सांचे को बदलना मुश्किल तो अब हमें तय करना है कि हम किन लोगों में से हैं। अंत में आमिर की इस पहल को हमारा सलाम। सत्यमेव जयते!

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    English summary
    Satyamev Jayate ends with beautiful note of Aamir Khan. Aamir discussed about right of independence given by the constitution to the citizens of India.

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