Review काफिर: गलती से भारत पहुंची पाकिस्तानी लड़की की ये कहानी रूह में बस जाती है
कश्मीर, भारत, पाकिस्तान और आतंकवाद। अफसोस सब एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। सीमा पार के दोनों तरफ के रहने वाले लोगों पर इनका गहरा असर है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इन सबके बीच इंसानियत भी है, जो कहीं ना कहीं आतंकवाद के बीच अपना दम घोट कर बैठी है।
जी 5 की वेब सीरीज 'काफिर' इंसानियत की ऐसी ही कहानी है जो आपसी दुश्मनी के बीच इंसानियत को जिंदा रखने की सफल कोशिश है। कश्मीर की हसीन वादियों के बीच से ये कहानी एक ऐसी महिला को दिखाती है जिस पर आतंकवादी होने का इल्जाम है। वह भारत की जेल में बंद है। जेल में उसकी बेटी पैदा हुई है।

जो भारती राष्ट्रगान गाती है लेकिन मां के टोकने पर पाकिस्तान का राष्ट्रगान गाने लगती है। दिया मिर्जा और मोहित रैना इस सीरीज से वेब की दुनिया में अपना डेब्यू कर चुके हैं। खुजली और गिप्पी जैसी फिल्मों का निर्देशन कर चुकी सोनम नायर ने काफिर को भी निर्देशित किया है। इस सीरीज की पूरी कहानी कायनाज Kainaaz के महिला आंतकवादी होने या ना होने को लेकर गुजरती है। जो हर फ्रेम में ऐसे कई सवाल खड़े कर देती है जिससे आपकी रूह कांप जाएगी।
कैसे नदी में बहती हुई भारत पहुंच चुकी पाकिस्तानी लड़की और जेल में पैदा हुई उसकी बेटी को भारतीय वकील वेदांत उसके देश पहुंचाता है। कायनाज और वेदांत का ये रूहानी सफर दिल में नहीं बल्कि रूह में बस जाता है। लेखक भवानी अय्यर ने बड़ी खूबसूरती से इस सीरीज के जरिए इंसानियत के मायने को पर्दे पर उतारने की कवायद की है।
इस सीरीज के अंत में जीत की खुशी होगी तो वहीं हार का तूफान आपको झकझोर कर रख देगा। भारत और पाकिस्तान के बीच चल रही नफरत के बीच काफिर इंसानियत का एक ऐसा पहलू दिखाती है जो कि हम आतंकवाद की आड़ में भूलते जा रहे हैं।
कश्मीर की खूबसूरत वादियों में इंसानियत में पनपती में 8 एपिसोड की ये कहानी हर फ्रेम में इंसानियत के बदलते रंग को दिखाती हुई नजर आती है। फिल्मीबीट की तरफ से इस वेब सीरीज को 4.5 स्टार दिया जाता है। अगर आपने अभी तक नहीं देखा तो एक बार जरूर देखिए। अपने अंदर के इंसान को जगाने का मौका ये सीरीज देती है।


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