Review द वर्डिक्ट: स्टेट वर्सेस नानावती: उम्दा अभिनय के साथ देश के सबसे विवादित केस की रियल कहानी

रिव्यू: द वर्डिक्ट: स्टेट वर्सेस नानावती (वेब सीरीज)
सृजक: एकता कपूर
कलाकार: मानव कौल, सुमीत व्यास, कुबरा सैत, एली अवराम, अंगद बेदी, सौरभ शुक्ला, स्वानंद किरकिरे, मकरंद देशपांडे आदि।
ओटीटी: जी5, AltBalaji

जाति-धर्म देश और मीडिया। इन सभी शब्दों को एक साथ जोड़ने पर एक जवाब जरूर आता है वो है कंट्रोवर्सी। सोशल मीडिया के जमाने में आज किसी भी देश से जुड़े किसी भी विवाद को वायरल होने में देर नहीं लगती। सोशल मीडिया खबरों का एक बड़ा जखीरा बन गया है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि एक वक्त ऐसा भी रहा है जब बिना किसी सोशल मीडिया,मोबाइल के भी कई ऐसे गंभीर मामले रहे हैं जिसने देश की दिल की धड़कन तेज कर दी थी।

ऐसा ही एक केस रहा है पारसी नौसेना अधिकारी का। साल 1959 में 27 अप्रैल के दिन एक तेजतर्रार पारसी नौसेना अधिकारी ने अपने रिवाल्वर से तीन गोलियों के साथ एक अमीर सिंधी व्यापारी को छलनी कर दिया । फिर जाकर पुलिस के सामने अपना क्रूर अपराध कबूल कर लिया। इसी पर आधारित है आल्ट बालाजी और जी5 की वेब सीरीज द वर्डिक्ट-स्टेट वर्सेस नानावती।

The Verdict: State vs Nanavati

कुछ साल पहले अक्षय कुमार इसी विषय पर आधारित फिल्म रुस्तम लेकर आए थे। लेकिन रुस्तम से अलग मानव कौल, सुमित व्यास, अंगद बेदी और एली अबराम अभिनीत ये सीरीज पूरे केस के साथ एक फ्रेश बर्ताव करती है। यहां पर केवल एक पारसी नौसेना अधिकारी नहीं है। बल्कि उसके साथ पारसी-सिंधी धर्म जुड़ा है। मीडिया की अहम भूमिका होने के साथ देश की इज्जत और सुरक्षा भी है।

10 एपिसोड की ये सीरीज इस केस से जुड़े हर उस पहलू की हकीकत बयान करती हैं जो इस कोर्ट रूम ड्रामा को रोमांचक मोड़ देता है। सीरीज की शुरुआत भारत के मशहूर वकील राम जेठमलानी से होती है। जो कि इस पूरी कहानी के इतिहास में जाकर इसे खोद रहे हैं। राम जेठमलानी की भूमिका में सुमित व्यास हैं। सुमित व्यास ने इस किरदार में राम जेठमलानी के कद को शानदार अभिनय से सटीक बैठा कर रखा है।

तेज तरार वकील के किरदार में सुमित व्यास अपने कॅामेडी लहजे से थोड़ी राहत भरते हैं। नानवती के मुख्य किरदार में मानव कौल अपनी पैठ जमाने में सफल हुए हैं। एली अबराम नानवती की पत्नी मिसेज सिल्विया नानावती की भूमिका में सहज दिखाई दी हैं। अंगद बेदी और सुमित व्यास के कोर्ट रूम सीन अच्छे बन पड़े हैं। रिसर्च वर्क गहन होने से ये सीरीज हर एपिसोड में दिलचस्पी बढ़ाते जाती है।

यादगार भूमिका निभाई है सौरभ शुक्ला,स्वानंद किरकिरे और मकरंद देशपांडे ने। इन तीनों का अभिनय इस कोर्ट रूम ड्रामा को मजबूत बनाता है। उम्दा कलाकारों की फेहरिस्त ने मिलकर सीरीज को सबल बनाया है। बॉम्बे को हर फ्रेम में देखना सुखद अहसास दिलाता है। 1959 के हिसाब से सभी किरदारों के कॉस्ट्यूम भी प्रभावित करते हैं।

डायलॉग और स्क्रीनप्ले के लिहाज से ये सीरीज कहानी को हर एपिसोड में साथ दिलचस्प मोड़ दे जाती है। अगर आप कोर्ट रूम ड्रामा देखना पसंद करते हैं और नानावती की ऐतिहासिक रियल स्टोरी के पर्दे के पीछे की कहानी जानना चाहते हैं तो ये सीरीज आपके लिए मस्ट वॅाच है। फिल्मी बीट की तरफ से इसे 3 स्टार की रेटिंग दी जाती है।

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