क्या सगुनी की जिंदगी में 'फिर सुबह होगी'?

सगुनी का जन्म एक बेड़िया परिवार में हुआ है जहां लड़कियों की शादी नहीं होती बल्कि गांव के ठाकुरों द्वारा उनकी सिर ढकाई कर उन्हे खरीद लिया जाता है। सगुनी की मां गुलाबो भी गांव के एक ठाकुर ज्वाला सिंह का बेड़िनी है। और राई करके अपने परिवार की जरुरतों को पूरा करती है। पर सगुनी अपनी मां की तरह बेड़िनी की ज़िंदगी नहीं जीना चाहती। वो चाहती है कि उसका भी एक परिवार हो और उसकी ज़िंदगी एक आम लड़की की तरह रिश्तों के घेरे में महफूज़ रहे।
मगर खुद उसके परिवार के लोग किसी ठाकुर के साथ उसकी सर ढकाई करना चाहते हैं। दिल्ली शहर से राजनाति में अपनी साख बनाने का सपना लिए ठाकुर वीरेन्द्र सिंह सगुनी की इस सोच को काफी प्रोत्साहन देते हैं। लेकिन ठाकुर वीरेन्द्र सिंह की ये दोस्ती कहीं सगुनी की ज़िंदगी में कुछ और ही मोड़ तो नहीं लाने वाली।
सास बहू,लव ट्राइंगल जैसे साधारण विषयों से हटकर ये धारावाहिक आज भी समाज मे औरतों के ऐसे वर्ग को दर्शाता है जो बड़े ठाकुरों द्वारा उनकी दी गई ज़िंदगी कबूल करने के लिए बाध्य की जाती हैं। इस तरह के धारावाहिक समाज में औरतों की ज़िदगी में बहुत बदलाव ला सकते हैं।


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