सोमवार से इमैजिन टीवी पर 'अरमानों का बलिदान आरक्षण'
नया धारावाहिक 'अरमानों का बलिदान आरक्षण' पिछड़ी जातियों को आरक्षण के खिलाफ 1990 में हुए मंडल आयोग के विरोध को उभारता है। धारावाहिक की कहानी में एक लड़की इन विरोध प्रदर्शनों में अपने भाई को खो देती है। कहानी में नया मोड़ तब आता है जब उसी लड़की को एक दलित लड़के से प्रेम हो जाता है।
इमैजिन टीवी के प्रसारण प्रमुख ने बताया, "धारावाहिक की पृष्ठभूमि आरक्षण-विरोधी मुद्दा है लेकिन इसे एक प्रेम कहानी के रूप में पेश किया गया है।" उन्होंने कहा, "हमने सिक्के के दोनों पहलुओं को उभारने की कोशिश की है। इसमें दिखाया गया है कि आरक्षण के निर्णय से कुछ जिंदगियां किस तरह बर्बाद हो गईं और कुछ लोगों को किस तरह इसका फायदा मिला। यह अब भी एक धधकती हुई बहस है और आरक्षण जैसे मुद्दे पर चर्चा की आवश्यकता है। हम उम्मीद करते हैं कि इस शो से चर्चा शुरू हो सकेगी।"
वर्ष 1989 में एक सदस्यीय मंडल आयोग ने अपनी रिपोर्ट सौंपी थी, जिसमें सरकारी नौकरियों और शैक्षिक संस्थानों में पिछड़ी जातियों के लिए आरक्षण की अनुशंसा की गई थी। तत्कालीन प्रधानमंत्री वीपी सिंह के आरक्षण लागू करने के साथ ही 1990 में देशभर में इसका विरोध शुरू हो गया था। ऊंची जातियों के लोगों का मानना था कि आरक्षण से योग्यता का महत्व कम हो जाएगा। इसके बाद विरोध में कई छात्रों द्वारा आत्मदाह करने के मामले सामने आए।
'अरमानों का बलिदान आरक्षण' कमलापति मिश्रा और उनके परिवार की कहानी है, जो बताती है कि किस तरह समाज के इस उच्च वर्गीय परिवार का जीवन मंडल से बदल जाता है। मिश्रा का बेटा मंडल आयोग की अनुशंसाओं के विरोध में आत्मदाह कर लेता है। इसके कुछ साल बाद उनकी बेटी को दलित लड़के से प्यार हो जाता है। यह लड़का आरक्षण का फायदा लेते हुए जिला मजिस्ट्रेट बन जाता है। कुछ राजनीतिक दल इस स्थिति का फायदा उठाने की कोशिश करते हैं। सोमवार से इमैजिन टीवी पर इस शो का प्रसारण शुरू हो जाएगा।


Click it and Unblock the Notifications











