Review मॉम: मिशन ओवर मार्स - चंद्रयान 2 के लिए उम्मीद बनते हुए ये सीरीज चार चांद लगाती है
बिहार के बेगूसराय की छोटी सी लड़की मौसमी घोष के स्पेस पर पहुंचने के बुलंद हौसले से शुरू होती है मॉम: मिशन ओवर मार्स की कहानी। जो कि बड़े होने पर इसरो की सफल वैज्ञानिक बन जाती है। लेकिन इसके साथ चंद्रयान के फेल होने का दाग उसके पैर को डगमगाने नहीं देता। इसी के साथ शुरू होती है चार महिला वैज्ञानिकों के ईद-गिर्द बुनी गई कहानी जो मिशन ओवर मार्स की तैयारी करने के साथ महिलाओं पर लोगों के अविश्वास को तोड़ती है।
पहले एपिसोड से विषय को पूरी तरह से पकड़ते हुए चांद पर पहुंचने की ये कहानी रफ्तार से बढ़ती है। पूरी सीरीज चार ऐसी महिला वैज्ञानिकों के ईद-गिर्द घूमती है जो कि स्वभाव और सोच से एक दूसरे के बेहद विपरीत हैं। फिर भी एक रॅाकेट पर सवार होने के ख्वाहिशमंद है जो भारत को चांद पर देखती हैं।

नंदिता हरिप्रसाद( साक्षी तंवर) मौसमी घोष( मोना सिंह) नीतू सिंह( निधि सिंह), मेघना रेड्डी( पालोमी घोष) मॅाम का प्रमुख चेहरा हैं।चार महिला वैज्ञानिकों के निजी जीवन में चांद अपनी पैठ कैसे बनाता है ये देखना सीरीज की दिलचस्पी बढ़ाता है। आशीष विद्यार्थी ने प्रोत्साहन देने वाले बॉस, के मुरलीधरन चीफ वैज्ञानिक की भूमिका में हैं।
महिला और चांद पर फोकस की गई इस सीरीज में आशीष विद्यार्थी का किरदार प्रभावित करता है। सीरीज में बड़ी बखूबी तरीके से दिखाया गया है कि चांद पर पहुंचने के लिए विमान से पहले दिल्ली की कुर्सी की मंजूरी सबसे बड़ा पड़ाव है।
राजनीति के नीचे दबे हुए विज्ञान को बड़े प्रभावी तरीके से समझाने की कवायद करती है ये सीरीज। उम्मीद के पंख और हौसले की उड़ान से लबरेज डायलॉग चांद पर पहुंचने के हर कदम को प्रकाश देती जाती हैं।
बोल्ड सीन आते हैं लेकिन वह रॅाकेट की रफ्तार से अपनी जरूरत साबित करते हुए आगे बढ़ जाते हैं। टीवी के दो सबसे बड़े चेहरे मोना सिंह और साक्षी तंवर की जोड़ी सीरीज में मस्ट वॅाच है। भारत की चार सबसे काबिल महिला वैज्ञानिक के किरदारों में साक्षी, मोना,निधि और पालोमी न्याय करती दिखती हैं।
ये सीरीज महिला वैज्ञानिकों के 2013 में मंगल ग्रह पर पहुंचने की यात्रा को अपनी राइटिंग,डायरेक्शन और किरदारों से गौरवान्वित राइड पर ले जाता है। ये सीरीज बताती है कि हर एक भारतीय वैज्ञानिक 130 करोड़ भारतीय की उम्मीद की पहली किरण कैसे बनता है। आपने मिशन मंगल देखी हो या नहीं, इस सीरीज में चांद को छोड़कर कहानी और किरदार के लिहाज से सीरीज ताजगी देती है।
क्यों देखें- भारतीय वैज्ञानिकों की मुमकिन कोशिश के बावजूद चंद्रयान 2 चांद पर पहुंचने से रह गया। इस बीच मिशन ओवर मॅास वैज्ञानिकों के त्याग, उम्मीद और मेहनत को आईने की तरह दिखाती है। चंद्रयान 2 के लिए एक उम्मीद बढ़ती है। मां, महिला और चांद से बुनी इस सीरीज को रेटिंग के लिए स्टार्स की जरूरत नहीं। यहां सिर्फ चार चांद है। इसे आप ALt Balaji और ZEE5 पर देख सकते हैं।


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