For Quick Alerts
    ALLOW NOTIFICATIONS  
    For Daily Alerts

    कोटा फैक्ट्री सीजन 2 रिव्यू- दमदार तरीके से वापस आए हैं सबके फेवरिट जीतू भैया, बढ़िया कंटेंट

    |
    Rating:
    3.5/5

    निर्देशक - राघव सुब्बु
    कलाकार- जितेंद्र कुमार, मयूर मोरे, रंजन राज, आलम खान, अहसास चन्ना, रेवती पिल्लई, समीर सक्सेना आदि
    प्लेटफॉर्म- नेटफ्लिक्स
    अवधि- 5 एपिसोड्स/ प्रति एपिसोड 40 मिनट

    'बाकी सब पढ़ाते हैं यार, जीतू भैया फील कराते हैं'; वैभव (मयूर मोरे) माहेश्वरी कोचिंग में बने अपने नए दोस्त शुश्रुत से कहता है। जी हां, TVF की बहुप्रतीक्षित वेब सीरीज 'कोटा फैक्ट्री' की दूसरी श्रृंखला स्ट्रीमिंग के लिए उपलब्ध हो चुकी है। 5 एपिसोड्स में बंटी ये सीरीज एक बार फिर आईआईटी की तैयारी करते छात्रों की जिंदगी के उथल पुथल से अवगत कराती है।

    कहानी सीजन 1 से आगे बढ़ती है। वैभव माहेश्वरी क्लासेस में सेट हो रहा है। वर्तिका (रेवती पिल्लई) समेत बाकी सभी प्रोडिजी क्लासेस में हैं और दूसरे वर्ष के लिए जेईई एडवांस की तैयारी शुरू कर रहे हैं। और इन सबके बीच सभी के चहेते जीतू भैया (जितेंद्र कुमार) अपना खुद का ड्रीम वेंचर शुरू कर रहे हैं। प्रोडिजी क्लासेस छोड़कर अब वो अपनी कोचिंग इंस्टिट्यूट शुरु करने की प्लानिंग कर रहे हैं। कहना गलत नहीं होगा कि एक बार फिर जीतू भैया अपना जादू चलाने में सफल रहे हैं।

    कहानी

    कहानी

    एक दृश्य में जीतू भैया अपने छात्र से कहते हैं- "आईआईटी तुम लोगों का सपना होना भी नहीं चाहिए। सपने देखे जाते हैं, aim एचीव किये जाते हैं.. aim बोलोगे तो चीजें doable लगेंगी.." इस सीजन में छात्रों की मुश्किल सुलझाने के साथ साथ जीतू भैया भी जिंदगी का इम्तिहान देते नजर आ रहे हैं। पुरानी कोचिंग क्लास छोड़कर वह अपनी खुद की कोचिंग इंस्टिट्यूट शुरु कर रहे हैं। जहां सीजन 1 में सभी किरदारों के हमारी पहचान भर हुई थी, नए सीजन में लेखक उन्हीं किरदारों और उनकी परिस्थिति की गहराई में उतरते गए।

    दमदार कंटेंट

    दमदार कंटेंट

    'कोटा फैक्ट्री' की शुरुआत फैक्ट्री के चिमनी से निकलते हुए धुएं से होती है। ग्याहरवीं- बाहरवीं क्लासेस के साथ साथ आईआईटी की तैयारी करने के लिए देश भर से आए छात्र कोटा शहर के कोचिंग यानि की 'फैक्ट्री' में अपनी दिन- रात झोंक रहे हैं। माहेश्वरी क्लासेज़ पहुंच चुके वैभव के मन में उत्साह और सकारात्मकता है, लेकिन भारी प्रतिस्पर्धा के बीच अलग अलग मुश्किलों से उसका सामना होता रहता है। माहेश्वरी के orientation क्लास के दौरान छात्रों से भले हॉल में माहेश्वरी सर (समीर सक्सेना) कहते हैं- "आप अपनी जिंदगी में कहां पहुंचेगें, आपका कितना बड़ा घर होगा, आपकी कितनी सुंदर लड़की से शादी होगा, आपके बच्चे छुट्टियों में यूरोप जाएंगे या ननिहाल, आपकी एसयूवी चलाएंगे या सेडान.. ये सब कुछ इस एग्जाम से डिसाइड होगा।"

    इस सबसे बीच वैभव, वर्तिका, उदय, मीना, शिवांगी की दोस्ती अभी जारी है। जबकि यह शो कड़ी मेहनत के मूल्य का महिमामंडन करती है, यह अपने तरीके से छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी बात करती है। यहां शिक्षा प्रणाली को बदलने की बात नहीं की जा रही है, बल्कि हमें कड़वी सच्चाई से सामना कराती है। कोटा फैक्ट्री आपको क्या सही है और क्या गलत है का ज्ञान नहीं देता। लेकिन आपको खुद से सवाल करने की अनुमति देता है कि आपको किससे असली खुशी मिलेगी और अपनी क्षमताओं को किस तरह परख सकते हैं।

    निर्देशन

    निर्देशन

    निर्देशक राघव सुब्बू सिनेमेटोग्राफर श्रीदत्त नामजोशी के साथ मिलकर वो कोटा एक चरित्र के रूप में उभारते हैं। कहानी का लगभग हर दृश्य इमोशन और ह्यूमर के साथ बुना गया है। इस सीरीज में खासकर जीतू भैया के किरदार पर काफी फोकस किया गया है। शायद पहले सीजन में इस किरदार की लोकप्रियता को देखते हुए यह किया गया होगा। बहरहाल, इस सीरीज के हर किरदार से एक जुड़ाव सा हो जाता है, जिस वजह से आप उनके साथ ही हंसते हैं, इमोशनल होते हैं, उनके साथ ही तनाव महसूस करते हैं। आईआईटी की तैयारी करते हुए छात्र किस तरह की मानसिक, साइकोलॉजिकल, सामाजिक समस्याओं से जूझ रहे होते हैं, यह भी दिखाया गया है, हालांकि इसमें नयापन नहीं है।

    अभिनय

    अभिनय

    शो की जिम्मेदारी इस बार जीतू भैया के कंधों पर दिखती है और जितेंद्र कुमार उसे उठाने में पूरी तरह से सफल रहे हैं और एक टीचर के रूप में प्रभावी दिखते हैं। पहले सीजन में उनके किरदार में जो हाव भाव थे, उसे उन्होंने यहां भी बरकरार रखा है। वहीं, मीना के किरदार में रंजन राज सीरीज की जान हैं। उनके किरदार का एक अलग अंदाज है, जिसे उन्होंने जबरदस्त पकड़कर रखा है। मयूर मोरे, आलम खान, अहसास चन्ना, रेवती पिल्लई ने भी अपने किरदारो से पूरा न्याय किया है। वहीं, माहेश्वरी सर के किरदार में समीर सक्सेना कुछ मिनटों के ही नजर आए, लेकिन छाप छोड़ने में सफल रहे।

    तकनीकि पक्ष

    तकनीकि पक्ष

    5 एपिसोड में राघव सुब्बु ने इस कथानक को बहुत कुशलता से समेटा है। वहीं, कहानी और अभिनय के अलावा जो बात सीरीज के प्रति आकर्षित करती है वह है बैकग्राउंड म्यूजिक, जिससे इसके पात्रों को गहराई मिलती है। सीरीज का संवाद दिल जीतता है, जिसे लिखा है अभिषेक यादव, पुनीत बत्रा, मनोज कलवानी और सौरव खन्ना ने। सिनेमेटोग्राफर श्रीदत्त नामजोशी ने सराहनीय काम किया है। कोचिंग क्लासेस, हॉस्टल, कोटा की सड़कों से लेकर हर किरदार के हाव भाव तक.. उन्होंने बड़ी खूबसूरती से अपने कैमरे में कैद किये हैं।

    देंखे या ना देंखे

    देंखे या ना देंखे

    कोटा फैक्ट्री के फैंस को इसका सीक्वल भी बेहद पसंद आने वाला है। बहुत कम शो ऐसे होते हैं, जिसकी सीक्वल दर्शकों की उम्मीदों पर खरी उतरती है। हां, कोटा फैक्ट्री में कुछेक खामियां हैं, कहानी कहीं कहीं धीमी हो जाती है और ध्यान भटकाती है, लेकिन इसके किरदार इतने पक्के हैं कि वो आपको बांधे रखते हैं। शिक्षा व्यवस्था के नाम पर देश में चल रहे बिजनेस और प्रतिस्पर्धा के बीच छात्र किस मनोस्थिति से गुजरते हैं, और ऐसे में यदि कोई उन्हें समझने वाला मिल जाए.. तो क्या होता है; यह 'कोटा फैक्ट्री' में बेहतरीन दिखाया गया है। फिल्मीबीट की ओर से 'कोटा फैक्ट्री' सीजन 2 को 3.5 स्टार।

    English summary
    Netflix web series Kota Factory Season 2 Review- Brilliant performances of Jitendra Kumar and the rest, will keep you glued to the series throughtout.
    तुरंत पाएं न्यूज अपडेट
    Enable
    x
    Notification Settings X
    Time Settings
    Done
    Clear Notification X
    Do you want to clear all the notifications from your inbox?
    Settings X
    X