कॉमेडी ने पकड़ ली दर्शकों की नब्ज
अगर हास्य सर्वश्रेष्ठ औषधि है तो हिंदी के सामान्य मनोरंजन चैनल (जीईसी) दर्शकों को लुभाने के लिए इसका बेहतर प्रयोग कर रहे हैं। वे नए तरीके से कहानी कहने, हास्यमय मजाक व अन्य नए प्रारूप में हास्यपूर्ण कार्यक्रम परोसकर टीआरपी बढ़ा रहे हैं।
'कॉमेडी सर्कस' के 16वें सीजन को इन कार्यक्रमों की बढ़ती मांग का प्रत्यक्ष उदाहरण है। यह कार्यक्रम सबसे लंबे रियलिटी कॉमेडी कार्यक्रम की श्रेणी में लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हो चुका है।

कलर्स चैनल के 'कॉमेडी नाइट्स विद कपिल' के मेजबान और निर्माता हास्यकार कपिल शर्मा ने कहा, "दर्शक हंसना चाहते हैं और यही वजह है कि टीवी का हास्य शो की ओर झुकाव अधिक है।"
आईएएनएस से बातचीत में कपिल ने कहा, "मैं वही कपिल हूं जो वर्षो से भारतीय टीवी पर कॉमेडी कर रहा है। लेकिन अंतर सिर्फ इतना है कि मैं उसे नए तरीके से बेच रहा हूं और लोग इसी का आनंद ले रहे हैं। मेरी कॉमेडी नहीं, मेरी पैकेजिंग नई है।"
यह सच है कि इससे मिलते-जुलते शो 'मूवर्स एंड शेखर्स' में शेखर सुमन ने भी आमजन से जुड़े मुद्दों को उठाया था। लेकिन निश्चित रूप से 'कॉमेडी नाइट्स विद कपिल' में कुछ नया है।
जहां तक ड्रामे-कॉमेडी सम्मिश्रण से दिल को खुश करने का सवाल तो 1980 और 1990 में-'ये जो है जिंदगी', 'देख भाई देख', 'हम पांच', 'फ्लाप शो', 'श्रीमान श्रीमती', 'जुबान संभालके', 'ऑफिस ऑफिस', 'तू तू मैं मैं', 'यस बॉस' और 'साराभाई वर्सिज साराभाई' जैसे कई शो थे।
वहीं वर्ष 2000 में 'खिचड़ी', 'एफआईआर', 'मालिनी अय्यर', 'करीना करीना', 'कॉमेडी सर्कस', 'द ग्रेट इंडियन कॉमेडी शो', 'द ग्रेट इंडियन लाफ्टर चैलेंज', 'लापतागंज' और 'तारक मेहता का उल्टा चश्मा' ने सास-बहू नाटकों में कटौती कर दर्शकों को हास्य दिया।
चर्चित हास्य कार्यक्रम 'तारक मेहता ..' के निर्माता असित मोदी ने आईएएनएस से कहा, "हमें हास्य के लिए खास हुनर वाले लेखकों और अभिनेताओं की जरूरत है। हर कोई लोगों को नहीं हंसा सकता। भारत में कॉमेडी में रचनात्मक प्रतिभा की कमी है। यहां कमी है और इसलिए इस शैली का दायरा सीमित है। इसके अलावा, टीवी के लिए स्वच्छ कॉमेडी करना मुश्किल भी है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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