'सिटी ऑफ ड्रीम्स सीजन 2' वेब सीरीज रिव्यू: सत्ता की इस लंबी लड़ाई में दमदार हैं कलाकार, लेकिन नएपन की कमी

Rating:
3.0/5

निर्देशक- नागेश कुकुनूर

कलाकार- प्रिया बापट, एजाज खान, अतुल कुलकर्णी, सचिन पिलगांवकर, सुशांत सिंह, संदीप कुलकर्णी आदि

प्लेटफॉर्म- डिज्नी प्लस हॉटस्टार

एपिसोड- 10 /प्रति एपिसोड 40-45 मिनट

महाराष्ट्र की राजनीति के पृष्ठभूमि पर बनी वेब सीरीज सिटी ऑफ ड्रीम्स के पहले सीजन की कहानी जहां पर खत्म होती है, सीजन 2 की कहानी उसके कुछ महीनों बाद शुरु होती है। आशीष गायकवाड़ (सिद्धार्थ चंदेकर) की मौत के बाद अब परिवार की बेटी पूर्णिमा गायकवाड़ (प्रिया बापट) मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालने को तैयार है। उनके पिता अमेय राव गायकवाड़ उर्फ साहेब (अतुल कुलकर्णी) लकवाग्रस्त हैं लेकिन खामोशी के साथ अपनी वापसी की तैयारी कर रहे हैं। सिटी ऑफ ड्रीम्स सीजन 2 राजनीति, पॉवर और व्यक्तिगत नुकसान के बारे में है। यहां परिवार के बीच की दरार अब खुलकर सामने आ गई है।

City Of Dreams season 2 review

मुख्यमंत्री की कुर्सी की लड़ाई में पूर्णिमा का साथ देते हैं साहेब के पूर्व सहयोगी और पूर्व मुख्यमंत्री जगदीश गुरव (सचिन पिलगांवकर) और एनकाउंटर स्पेशलिस्ट पुलिस से राजनेता बने वसीम खान (एजाज खान)। पहले सीजन में जहां भाई और बहन के बीच का दांव पेंच देखने मिला था। इस सीजन में पिता और बेटी राजनीतिक बिसात पर आमने सामने खड़े हैं। पार्टी बेटी के सपोर्ट में है, लेकिन साहेब का अहंकार यहां आड़े आता है। उनका मानना है कि विरासत को सिर्फ एक बेटा ही आगे ले जा सकता है। लिहाजा, अपने बेटे की मौका का बदला लेना और सियासत में अपनी वापसी को पुख्ता करने के लिए वह अपनी बेटी के खिलाफ ही षड्यंत्र रचते हैं। वहीं, पूर्णिमा के लिए व्यक्तिगत तौर पर भी यह सफर आसान नहीं है। उसके अतीत से जुड़ी बातें चुनाव अभियान के दौरान बाहर आने लगती हैं। कुर्सी पर अपनी पकड़ बनाने के लिए कौन किस हद तक जा सकता है, वह यहां देखा जा सकता है।

इस सीरीज में एक साथ कई सब-प्लॉट साथ साथ चलते हैं। अलग अलग किरदारों के पीछे की अपनी कहानियां हैं, कुछ पहले सीजन से जुड़ती चली आई है, तो कुछ नई घटनाएं हैरान करेंगी। सभी कथानक अपने आप में दिलचस्प हैं और कलाकारों का दमदार अभिनय उसे और रोमांचक बनाता है। प्रिया बापट और अतुल कुलकर्णी अपने किरदारों में शानदार दिखे हैं। खासकर पूर्णिमा यानि की प्रिया के किरदार को कई परतों में दिखाया गया है और अभिनेत्री ने शुरु से अंत तक अपनी पकड़ बनाए रखी है। वहीं, एजाज़ वसीम के रूप में मजबूत दिखे हैं, उन्होंने किरदार के आंतरिक संघर्ष को बखूबी से दिखाया है। सचिन पिलगांवकर और सुशांत सिंह ने अपने किरदार के साथ न्याय किया है।

नागेश कुकुनूर द्वारा निर्देशित इस राजनीतिक ड्रामा में बहुत ज्यादा नयापन नहीं दिखता है, लेकिन इसके किरदार दिलचस्पी बनाए रखते हैं। सीरीज के संवाद और बैकग्राउंड स्कोर औसत है।

सिटी ऑफ ड्रीम्स सीजन 2 के कमजोर पक्षों की बात करें तो वो है इसकी धीमी गति। पांचवें- छठे एपिसोड के बाद सीरीज थोड़ी तेज होती है। लेकिन पटकथा में एक साथ बहुत सारे कथानक लाने की कोशिश में मुख्य कहानी कहीं पीछे छूटती दिखती है। सीरीज में कई ट्विस्ट डालने की कोशिश की गई है, जो कि एक थ्रिलर के लिए जरूरी है, लेकिन यहां लगभग हर ट्विस्ट का पुर्वानुमान पहले ही लग जाता है। ऐसे में कहानी से दिलचस्पी कम होने लगती है। हालांकि क्लाईमैक्स तक जाते जाते शो फिर रोमांचक हो जाता है। सीजन के अंत के साथ ही निर्देशक नागेश कुकुनूर अगले सीजन की हिंट देते हैं। यदि आप राजनीतिक ड्रामा देखना पसंद करते हैं, तो 'सिटी ऑफ ड्रीम्स सीजन 2' एक बार जरूर देखी जा सकती है।

More from Filmibeat

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+
X