'चारों तरफ पर्दा लगाया और जीप में...', सेट पर इस तरह कपड़े बदलने को मजबूर थीं ये हसीना, छलका दर्द
Smita Bansal Shocking Revelation: टीवी इंडस्ट्री में अक्सर कलाकारों के लिए वैनिटी वैन और मेकअप रूम के अलावा बाकी की सुविधा भी दी जाती हैं। लेकिन हाल ही में बालिका वधू की एक्ट्रेस स्मिता बंसल का कहना है कि उनके वक्त हालात पूरी तरीके से अलग थे। हाल ही में उन्होंने अपनी शुरुआती संघर्ष को लेकर बात की और कई किस्से भी सुनाए।

वैनिटी वैन ना होने पर इस एक्ट्रेस को झेलना पड़ी ये चीज़ें
हाल ही में बॉलीवुड बबल के साथ बातचीत के दौरान स्मिता बंसल ने बताया कि "अभी के समय में वैनिटी वैन में भी लेवल होते हैं। लेकिन तब के समय कुछ भी नहीं होता था। वैनिटी वैन हमारे लिए लग्जरी हुआ करती थी। लेकिन आज के वक्त में जो बच्चे इंडस्ट्री में आते हैं उनके लिए पहले ही सब कुछ सेट होता है। उन्हें वो वाला स्ट्रगल नहीं देखना पड़ा जो हमने देखा है।"
अभिनेत्री ने आगे कहा कि "ऐसा नहीं है कि मैं इसको एंजॉय नहीं करती हूं। हमने दोनों दौड़ देखे हुए हैं और मैं भी अब वैनिटी वैन की मांग करती हूं। लेकिन अगर कहीं आउटडोर शूट में नहीं मिलती तो भी मैनेज कर सकती हूं और हम दोनों तरीके से काम कर सकते हैं।"
जीप के अंदर बदले थे कपड़े
पुराने वक्त को याद करते हुए स्मिता बंसल ने एक मजेदार और हैरान कर देने वाला किस्सा भी सुनाया। उन्होंने बताया कि "एक बार मैं हॉरर शो की शूटिंग के लिए गई थी और वहां पर हमने ओपन जीप में कपड़े बदले थे। जीप के चारों तरफ से पर्दा लगा दिया गया था और उसके अंदर बैठकर हमने कपड़े बदले थे। क्योंकि तब ना तो कुर्सी होती थी और ना ही मेकअप रूम होता था। हमने सोचा कि पेड़ के पीछे जाकर कपड़े बदलने से तो अच्छा है कि जीप का इस्तेमाल करें।"
दूसरों के घर जाना पड़ता था वॉशरूम
स्मिता बंसल ने बताया कि तब के दौर में महिला कलाकारों को सबसे ज्यादा परेशानी वॉशरूम की हुआ करती थी। उन्होंने बताया कि "जब भी किसी गली या फिर मोहल्ले में शूटिंग हुआ करती थी तो हमें लोगों के घरों का दरवाजा खटखटाकर कहना पड़ता था कि प्लीज हमें वॉशरूम इस्तेमाल करने दो। आदमी तो कहीं भी चले जाते हैं लेकिन महिलाओं के लिए ऐसा करना संभव नहीं होता है।"
स्मिता बंसल ने इस पर आगे बात करते हुए कहा कि "काफी सारे लोग तो बहुत खुश हो जाते थे कि उनके इलाके में शूटिंग हो रही है। वह हमारा दिल खोलकर स्वागत भी करते थे, पानी पिलाते थे और हमारी मदद भी करते थे। लेकिन कुछ लोग हमसे साफ मना कर देते थे कि हम शूटिंग वालों को घर में नहीं आने देंगे। हमने स्वागत भी देखा है और रिजेक्शन भी देखा है।"
वॉशरूम जाने के डर से पानी नहीं पीती थी एक्ट्रेस
स्मिता बंसल आगे बताती है कि "मेकअप रूम तो बाद में आने लग गए थे लेकिन टॉयलेट की सुविधा तब भी नहीं थी। दिन में सिर्फ एक बार बस आती थी और इसमें कलाकारों को वॉशरूम लेकर जाया जाता था। अगर बीच शूट के वक्त जरूरत पड़ जाए तो कोई भी ऑप्शन नहीं था। इसी वजह से हम लोग अपनी ही नहीं पीते थे जिससे कि बार-बार वॉशरूम जाने की जरूरत ना पड़े।"
स्मिता बंसल ने बताया कि समय के साथ-साथ इंडस्ट्री में बहुत ही ज्यादा बदलाव आए हैं और सुविधाएं भी बेहतर हो चुके हैं। धीरे-धीरे चीजें बदली गई है और सुविधाएं भी आने लगी है। लेकिन वह संघर्ष भरे दिन भी हमारी जिंदगी का बहुत जरूरी हिस्सा है और उन्हें अनुभवों ने हमें बहुत ही मजबूत बनाया। साथ ही बहुत कुछ सिखाया भी है।


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