'साधु' का ऑडिशन देने पहुंचे तो मिल गया 'रावण' का रोल, लोगों से मिली नफ़रत तो एक्टिंग छोड़ राजनीति में जमाए कदम
Arvind Trivedi Career: रामानंद सागर की 'रामायण' आज से 39 साल पहले टेलीकास्ट हुई थी। जो अपनी कहानी के साथ-साथ अपनी स्टार कास्ट और हर एक सीन को लेकर काफी ज्यादा पसंद की गई। तब यह सबसे ज्यादा लोकप्रिय है पौराणिक टीवी शो माना गया। शो में राम से लेकर सीता और हनुमान से लेकर रावण जैसे हर एक किरदार निभाने वाले एक्टर ने अपनी एक अलग पहचान बना ली थी। लेकिन आज हम आपको ब्रह्मानंद सागर की रामायण में रावण का किरदार निभाने वाले अरविंद त्रिवेदी के बारे में बताने वाले हैं। जिन्होंने लंकापति रावण के तौर पर शो को अमर कर दिया।

रावण का किरदार निभाने के बाद लोगों से मिली नफरत
जानकारी के लिए आपको बता दें कि अरविंद त्रिवेदी आज हमारे बीच नहीं है। उनको इस दुनिया से गए हुए तकरीबन 5 साल हो चुके हैं। लेकिन इसके बावजूद भी रामायण शो में उनके रावण का किरदार आज भी उन्हें जिंदा रखता है। बहुत कम लोगों को पता है कि वह असल जिंदगी में बहुत ही धार्मिक और शांत रहने वाले व्यक्ति थे। वह भगवान राम के भक्त भी थे। लेकिन इसके बावजूद भी रावण का किरदार निभाने की वजह से उन्हें काफी लोग नफरत भी करने लगे थे। अरविंद त्रिवेदी को अपने अभिनय के लिए गुजरात सरकार से 7 बार सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार भी मिल चुका है।
एक्टिंग के बाद राजनीति में रखा कदम
बहुत कम लोगों को पता है की रामायण सीरियल के लिए अरविंद त्रिवेदी ने साधु के लिए स्क्रीन टेस्ट दिया था। लेकिन जैसे ही उन्होंने अपने डायलॉग बोलना शुरू किया तो उनकी आवाज और उनके डरा देने वाली हंसी देखकर रामानंद सागर ने उन्हें रावण का किरदार ऑफर कर दिया था। लेकिन बाद में अरविंद त्रिवेदी ने और राजनीति में कदम रखा और 1991 में वह गुजरात के साबरकांठा से लोकसभा सांसद चुने गए थे। इसके बाद में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के सदस्य के तौर पर 5 साल तक संसद में काम भी किया था।
कैसे शुरू हुआ अरविंद त्रिवेदी का करियर?
बताते चलें कि 8 नवंबर 1938 को मध्य प्रदेश के इंदौर में अरविंद त्रिवेदी का जन्म हुआ। वह बचपन से ही एक्टर बनने की चाहत रखते थे। पढ़ाई खत्म हो जाने के बाद में उन्होंने थिएटर से एक्टिंग सीख ली थी। इस दौरान अरविंद के साथ उनके बड़े भाई उपेंद्र त्रिवेदी भी अभिनय की दुनिया में अपनी किस्मत को आजमा रहे थे। अरविंद त्रिवेदी ने अपने करियर में तकरीबन 300 से भी ज्यादा फिल्मों में काम किया और इसमें हिंदी और गुजराती दोनों भाषाओं की फिल्में थी।


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