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    अ सूटेबल बॉय वेब सीरीज़ रिव्यू, नेटफ्लिक्स: तबू - ईशान खट्टर - तान्या माणिकतला का A-1 अभिनय

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    रेटिंग - ****

    सीरीज़ - अ सूटेबल बॉय

    निर्देशक - मीरा नायर

    स्टारकास्ट - ईशान खट्टर, तान्या माणिकतला, तबू व अन्य

    प्लेटफॉर्म - नेटफ्लिक्स

    मीरा नायर की बहुप्रतीक्षित वेब सीरीज़ अ सूटेबल बॉय नेटफ्लिक्स पर स्ट्रीम हो रही है और हम आपके लिए लेकर आए हैं इस सीरीज़ का पूरा रिव्यू। सीरीज़ कहानी है चार परिवारों की - मेहरा परिवार, कपूर परिवार, खान परिवार और चटर्जी परिवार।

    मेहरा परिवार की बड़ी बेटी सविता की शादी, कपूर परिवार के बड़े बेटे के साथ होती है और यहीं से सीरीज़ की शुरूआत होती है। जब सविता की मां, अपनी छोटी बेटी लता के लिए भी जल्दी ही एक योग्य वर ढूंढने का ज़िम्मा लेती है।

    अब इसके बाद कहानी इन चार परिवारों के इर्द गिर्द तो घूमती है लेकिन आपको 1950 के पूरे भारत का दर्शन करवा देती है। वहीं हर किरदार अपने साथ कहानी में कुछ नया जोड़ता है और आपको बांधे रखने की पूरी कोशिश करता है। यहां पढ़िए कितनी दिलचस्प है ये सीरीज़ और कहां होती है मीरा नायर से चूक -

    कहानी

    कहानी

    सीरीज़ की कहानी में लता (तान्या माणिकतला) और उसके तीन चाहने वाले शामिल हैं जिनमें से किसी एक को लता को अपने पति के रूप में चुनना है। वहीं दूसरी ओर मान कपूर (ईशान खट्टर), एक ज़मींदार का लड़का है जो अपने पिता के समाज सेवी की छवि को खुद में ना ढूंढकर सईदा बेगम (तबू) के इश्क़ में कैद है। लेकिन इन तीन लड़कों में कौन लता के लायक है और क्या लता वाकई किसी के लायक है, ये आपको पता चलेगा आखिरी एपिसोड में। वहीं दूसरी तरफ, मान और उससे उम्र में दोगुनी तवायफ सईदा बेगम का इश्क़ भी कितना मुकम्मल होता है, ये आपको सीरीज़ का क्लाईमैक्स ही बताएगा।

    किरदार

    किरदार

    इस सीरीज़ में अगर मुख्य किरदारों की बात की जाए तो वो दो ही हैं। मान कपूर (इशान खट्टर) और लता (तान्या माणिकतला)। लेकिन इन दो किरदारों के बीच भी महफिल लूट ले जाने काम तबू को बखूबी आता है और उनका अभिनय यहां वही करता दिखाई देता है। जब भी वो स्क्रीन पर होती हैं आप उनसे नज़रें नहीं हटा पाते हैं। ऐसा नहीं है कि उनके किरदार में कुछ नया है, लेकिन फिर भी तबू उसमें ऐसा जादू डालती हैं कि आपको कुछ पुराना याद नहीं रहता है।

    अभिनय

    अभिनय

    सीरीज़ में कलाकारों की भरमार है। और हर कोई अपना काम बखूबी निभाने की कोशिश करता है। लेकिन यहीं पर आती है दिक्कत। क्यों हर किसी के हिस्से, 6 घंटों में इतना कुछ आ नहीं पाता है जितनी कि दर्शक उम्मीद करते हैं। यहां तक कि मुख्य किरदार ईशान खट्टर आपको तीन घंटे की सीरीज़ के बाद अपने फॉर्म में आते दिखाई देते हैं। दूसरी तरफ लता के रूप में तान्या मनकटला आपको कसकर पकड़ कर रखने की पूरी कोशिश करती हैं।

    सपोर्टिंग कास्ट

    सपोर्टिंग कास्ट

    अगर फिल्म में कलाकारों की बात करें तो राम कपूर, एक राजनेता के रूप में प्रभावी हैं तो मंत्री के छोटे से किरदार में भी विनय पाठक याद रहे जाते हैं। लता की बहन के रूप में रसिका दुग्गल पूरी सीरीज़ में आपको दिखेंगे लेकिन उनके हिस्से कुछ प्रभावशाली नहीं आ पाया है। वहीं शहाना गोस्वामी और रणदीप हुडा के एक्स्ट्रामैरिटल अफेयर और सेक्स सीन कहानी को कहीं ले जाते दिखते हैं पर लेकर नहीं जा पाते। रशीद के रूप में विजय वर्मा और वारिस के रूप में रणवीर शौरी के हिस्से जो भी आया वो उसे पूरी शिद्दत से निभा जाते हैं। लता के भावी पति के उम्मीदवार के रूप में नमित दास छाप छोड़ते हैं।

    निर्देशन

    निर्देशन

    मीरा नायर ने सीरीज़ को कस कर बांधने की कोशिश की है और वो इसमें सफल भी हुई हैं। और उनकी इस सफल कोशिश के लिए वो बधाई की पात्र हैं। सीरीज़ केवल एक लड़की के लिए ढंग का लड़का चुनने पर केंद्रित हो सकती थी लेकिन उन्होंने बेहद ही अच्छे तरीके से इसे विभाजन के बाद देश में उभरे अलग अलग पैसे वाले वर्गों में, हिंदू - मुस्लिम के दंगों में, नए कानून और समाज के लिए पनप रहे विद्रोह में और इन सबको इस्तेमाल करती हुई राजनीति में बेहतरीन ढंग से ढाल दिया है।

    लेखन

    लेखन

    सीरीज़ के लेखक हैं - एंड्र्यू डेविस जिन्होंने विक्रम सेठ के 1993 में छपे उपन्यास अ सूटेबल बॉय के 1359 पन्नों को 8 एपिसोड्स में समेटने की कोशिश की है जिसके लिए वो बधाई के पात्र हैं। बाद में मीरा नायर ने इन आठ एपिसोड्स को और मज़बूती देकर इन्हें 6 भागों में बांटा है। सीरीज़ का लेखन बेहद विस्तार से किया है और 1950 के भारत की हरसंभव तस्वीर पेश की गई है। दिलचस्प है कि कोई भी पहलू ना छोड़ने के बावजूद सीरीज़ सिमटी और एक सूत्र में पिरोई हुई नज़र आती है।

    तकनीकी पक्ष

    तकनीकी पक्ष

    अगर फिल्म के तकनीकी पक्ष की बात करें तो 1950 के दशक में सेट की गई ये सीरीज़ यूं तो 150 करोड़ के बजट पर बनी है। लेकिन ये बजट ना किरदारों के पहनावे में और ना ही शहरों के दिखावे में नज़र आता है। ऐसा करने में डेकलान क्विन का कैमरा और स्टेफनी कैरल की प्रोडक्शन डिज़ाइन बुरी तरह असफल दिखाई देती है। वहीं सईदा बेगम की ग़ज़लें इस सीरीज़ की जान होनी चाहिए थीं लेकिन इसका म्यूज़िक औंधे मुंह गिरता है।

    कहां जीता दिल

    कहां जीता दिल

    इतने बड़े उपन्यास को एक कसी हुई कहानी के रूप में पेश करना मुश्किल है। वो भी केवल छह एपिसोड में, नामुमकिन है। खासतौर से तब जब सीरीज़ में मुख्य कहानी के अलावा भी कई कहानियां चल रही हैं। और यहीं मीरा नायर आपका दिल जीत ले जाती हैं। सीरीज़ लता के लिए योग्य वर ढूंढने की कहानी तो है लेकिन चार परिवारों को साथ लेकर चलते हुए। और ये चार परिवार, कभी भी पटकथा से गायब नहीं होते।

    कहां किया निराश

    कहां किया निराश

    अ सूटेबल बॉय कहीं निराश करती है तो वो है किरदारों के इस्तेमाल में और अपने प्रोडक्शन डिज़ाइन में। दंगों से लेकर कोठों तक, कलकत्ता से लेकर लखनऊ तक, हवेली से लेकर कॉलेज तक कुछ भी आपको 1950 में लेकर नहीं जाता है। अगर इन कमियों को कोई चीज़ ढंकती है तो वो है सीरीज़ की मज़बूत कहानी। लेकिन वो भी कभी कभी आपको बेचैन करती है क्योंकि कुछ किरदार आपको अधूरे छूटे मिलते हैं और उन्हें पूरा करने की कोशिश भी नहीं की गई है।

    क्या होता बेहतर

    क्या होता बेहतर

    सीरीज़ के तकनीकी पक्ष के बारे में बात करते हुए सबसे पहले ये ध्यान रखना ज़रूरी है कि ये सीरीज़ अंग्रेज़ी में बनाई गई है और इसे हिंदी में डब किया गया है। और ये डबिंग निराशाजनक है। आप कभी कभी किरदारों और उनकी आवाज़ों को साथ जोड़ नहीं पाएंगे तो कभी बस हिंदी के डायलॉग्स और उर्दू की शायरियों में उलझे रह जाएंगे। अगर आप इसे सबटाइटल्स के साथ देखने का मन बनाते हैं तो भी शायद आपके हाथ निराशा ही लगेगी।

    देखें या ना देखें

    देखें या ना देखें

    अ सूटेबल बॉय आपके 6 घंटे हक से मांगती है। इसलिए नहीं क्योंकि इस सीरीज़ पर मेहनत की गई। बल्कि इसलिए कि कमियों के बावजूद ये सीरीज़ आपको उतना परोसती है जितने का वादा करती है। अपने पहले ही सीन से ये सीरीज़ आपको कोई झूठा वादा नहीं करती है। और जितना करती है, उतना निभाती है।

    English summary
    A suitable boy web series review - Know whether to watch or not this Ishan Khatter, Tanya Manikatala, Tabu starrer drama.
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