..................... Zwigato Movie Review: अच्छा अभिनय लेकिन कमजोर कहानी, औसत रही कपिल शर्मा की कमबैक फिल्म | Zwigato Movie Review: Kapil Sharma's comeback from Nandita Das's film is not upto the mark - Hindi Filmibeat

Zwigato Movie Review: अच्छा अभिनय लेकिन कमजोर कहानी, औसत रही कपिल शर्मा की कमबैक फिल्म

Rating:
2.5/5

kapil

कलाकार- कपिल शर्मा, शहाणा गोस्वामी
लेखक व निर्देशक-
नंदिता दास

'वो मजदूर है, इसीलिए मजबूर है, या शायद वह मजबूर है, इसलिए मजदूर है'...के बीच उलझी हुई कपिल शर्मा की फिल्म 'ज्विगाटो' 17 मार्च को बड़े पर्दे पर रिलीज होने के लिए तैयार है। फिल्म में नौकरी, घर और बच्चों के बीच उलझी एक जिंदगी को दिखाया गया है। फिल्म का निर्देशन नंदिता दास ने किया है, जो कि अपनी शानदार कहानियों के लिए जानी जाती हैं।

kapil sharma

फिल्म की कहानी- फिल्म की शुरुआत मानस (कपिल शर्मा) से होती है, जो कि अपनी पत्नी प्रतिमा (शहाणा गोस्वामी) के सपने देख रहा होता है और कुछ पुराने काम को लेकर सोच रहा है, तभी अचानक से उनकी पत्नी उसको नींद से जगा देती है। मानस फूड डिलीवरी का काम करता है, जहां उसे रेंटिग के लिए और कोई टिप मिल जाए उसके लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है।

परिवार और काम के बीच उलझा मानस बहुत परेशान रहता है। उसके बच्चे भी उसके काम को ज्यादा पसंद नहीं करते हैं। लेकिन उसे अपना घर भी चलाना है, जिसमें एक बूढी मां और दो बच्चे और पत्नी रहती है। कड़ी मेहनत करने के बाद भी उसको अच्छी रेटिंग नहीं मिलती है और एक दिन अचानक से मानस का अकाउंट ब्लॉक हो जाता है कि क्योंकि किसी ग्राहक ने उसकी कंप्लेन कर दी होती है। इसके चक्कर में मानस की नौकरी चली जाती है।

मानस जो कभी भी अपनी पत्नी को उसके काम के लिए सपोर्ट नहीं करता है परंतु नौकरी खोने के बाद आखिर में अपनी सोच उसे बदलनी ही पड़ती है। इस तरह से पूरी कहानी एक निम्न मध्यम वर्ग परिवार के ऊपर दिखाई गई है जहां आम इंसान नौकरी में कितना उलझा हुआ रहता है।

खास बात है कि कहानी जो मैसेज देना चाहती थी वह सटीक तरीके से नहीं दे पाई और आखिर में दर्शकों को निराशा हाथ लगी। कहानी का पहला हिस्सा ट्रैक पर है, जबकि दूसरे पार्ट में तो बस कहानी जैसे मानों जबरदस्ती खीची गई हो।

kapil sharma

डायलॉग और संगीत- वो मजबूर है इसीलिए मजदूर है या वह मजदूर है इसीलिए मजबूर है....मर्दों की तरह पेंट पहन लिया है तो मर्दों की तरह गाड़ी पर बैठना भी सीख लो....जैसे बहतरीन डायलॉग फिल्म में दिखाए गए हैं। फिल्म में मानस ने मौके मौके पर शानदार डायलॉग बोले हैं। और गानों की बात करें तो फिल्म में सिर्फ एक गाना है, जो क्रेडिट के दौरान आता है और काफी धीमा है।

किरदार- फिल्म के किरदारों का जवाब नहीं है। बेहतरीन एक्टिंग कपिल शर्मा ने की, वहीं जब जब पर्दे पर उनकी पत्नी के किरदार में शहाणा गोस्वामी नजर आई दर्शकों के चेहरे पर अलग खुशी आई क्योंकि उन्होंने अपनी कला का जादू बिखेरा।

निर्देशन- फिल्म का निर्देशन नंदिता दास ने किया है, जो कि अपनी अनोखी और अलग कहानियों के बारें में जानी जाती है, लेकिन इस बार उनकी कहानी कमजोर रही। उन्हें कहानी का अंत खूबसूरत दिखाना था लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। कहानी जो मैसेज देना चाहती थी वह कहीं ना कहीं नहीं दे पाई। निर्देशन में कमी नजर आई क्योंकि इतने अच्छे कलाकारों के साथ बेहतर फिल्म बनाई जा सकती थी।

रेटिंग- अगर आप कपिल शर्मा के फैन है तो आप सिनेमाघरों में जा कर फिल्म देख सकते हैं परंतु फिल्म में ऐसा कुछ खास नहीं है जिसके लिए आप तीन घंटे बैठें। कलाकार अच्छे हैं परंतु कहानी कमजोर है। इसीलिए फिल्मीबीट की तरफ से हम इसको 2.5 स्टार देते हैं।

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