जिला गाजियाबाद- फिल्म रिव्यू
कहानी- जिला गाजियाबाद एक बायोपिक फिल्म है जो गैंगस्टर ओमप्रकाश (बबलू श्रीवास्तव) की जिंदगी पर आधारित है। फिल्म में दो गुर्जर दुश्मन ग्रुप दिखाए गये हैं। एक ग्रुप को सत्बीर गुर्जर (विवेक ऑबरॉय) लीड करता है और दूसरे ग्रुप को महेंद्र फोजी बाइसला (अरशद वारसी) फिल्म की कहानी 1990 में घटी कुछ घटनाओं पर आधारित है। फिल्म के किरदार भी रियल लाइफ पर आधारित है। फिल्म में ठाकुर पुलिस वाला (प्रीतम सिंह) बने हैं।
एक जमीन के प्लॉट को लेकर बाहुबली राशित खान (रवि किशन) और चेयरमैन (परेश रावल) के बीच झड़प होती है। राशित की मां गांव के पंचो द्वारा इस विवाद को निपटाना चाहती हैं। राशिद के वकील नकली अदालती डॉक्यूमेंट के बल पर इस प्लॉट पर राशिद का हक जताता है। पंचायतमें सतबीर उर्फ मास्टर जी (विवेक ऑबरोय) राशित के पेपर्स को नकली बताता है। सभी पंच इस प्लॉट को चेयरमैन को देने का फैसला सुनाते हैं। फौजी (अरशद वारसी) चेयरमैन के लिए लठैत और वसूली का काम करता है। फौजी अपनी बहन दिव्या दत्ता की शादी के लिए 20 लाख रुपये मांगता है लेकिन चेयरमैन सिर्फ 7-8 लाख रुपये देने को राजी होता है। फौजी इस बात पर गुस्सा होता है और चला जाता है।
एक दिन फौजी के घर पर हमला होता है और सबका शक सतबीर पर जाता है। राशिद इसी समय फौजी को मोटी रकम देकर अपने साथ मिला लेता है। फौजी सतबीर के भाई (चंद्रचूड़ सिंह) की हत्या कर देता है जो कि शहर से आया है। इसी के बाद से दोनों के बीच गैंगवार की शुरुआत होती है और पूरा गाजियाबाद जिला इस गैंगवार की चपेट में आ जाता है। इस गैंगवार को खत्म करने के लिए इंस्पेक्टर प्रीतम सिंह (संजय दत्त) को बुलाया जाता है। प्रीतम सिंह का मानना है कि अपराधी को सुधारना नहीं चाहिए बल्कि उनसे खत्म कर देना चाहिए।
अभिनय- फिल्म में अरशद वारसी की एक्टिंग बेहतरीन है। विवेक ऑबरॉय और संजय दत्त ने भी अपनी एक्टिंग का बेहतरीन प्रदर्शन किया है।


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