Zara Hatke Zara Bachke Review: विक्की कौशल-सारा अली खान का रोमांटिक ड्रामा 'हटके' तो नहीं, लेकिन एंटरटेनिंग है

निर्देशक- लक्ष्मण उतेकर
कलाकार- विक्की कौशल, सारा अली खान, इनामुलहक, शारिब हाशमी, सुष्मिता मुखर्जी, राकेश बेदी, नीरज सूद
"मकान तो ईंट पत्थरों से खड़ा होता है, लेकिन वो घर तो बनता है वहां रहने वालों से".. ये संवाद हमने कई फिल्मों में सुना है, कई किताबों में पढ़ा है। लक्ष्मण उतेकर की ये फिल्म भी इसी सोच के इर्द गिर्द घूमती है। जहां एक खुशहाल शादीशुदा जोड़ा है, जो संयुक्त परिवार में रहता है, लेकिन एक दिन वो अचानक तलाक लेने का फैसला ले लेते हैं। जब बात परिवार तक पहुंचती है तो कंफ्यूजन बढ़ता है, और यहां से शुरु होती है कॉमेडी ऑफ एरर्स।
कहानी
"देखो मैंने देखा है ये एक सपना, फूलों के शहर में हो घर अपना.." जब सौम्या और कपिल अपने लिए फ्लैट देखने आते हैं तो इस गाने के साथ हमें उनकी ललक और रोमांच का आभास होता है। इंदौर का ये जोड़ा एक संयुक्त परिवार में रहता है, जहां मां- पिता, मामा- मामी सभी साथ रहते हैं। परिवार में प्यार बहुत है, लेकिन मध्यमवर्गीय होने की वजह से घर में रहने की जगह कम है। कपिल और सौम्या दोनों बाहर जॉब करते हैं, लेकिन रोमांस इन्हें परिवारवालों से नजरें बचाकर ही करना पड़ता है। लिहाजा, अपनी निजी जिंदगी के बारे में सोचते हुए दोनों अलग घर लेने की प्लानिंग करते हैं। लेकिन जैसा कि हर मिडिल क्लास जोड़े के साथ होता है, घर इनके बजट से बाहर होता है। दोनों निराश हो जाते हैं, जब उन्हें "जन आवास योजना" की जानकारी मिलती है। अपने घर लेने के सपने को पूरा करने के लिए दोनों कुछ ऐसे फैसले लेते हैं, जो उनके रिश्ते को काफी प्रभावित कर जाता है। घर मिलने तक कपिल और सौम्या का रिश्ता उसी प्यार के साथ बरकरार रह पाता है या आ जाती है उसमें दरार? यही आगे की कहानी बनती है।
अभिनय
कहना गलत नहीं होगा कि फिल्म पूरी तरह से विक्की कौशल के कंधों पर ही टिकी है। फिल्म में इनामुलहक, शारिब हाशमी, सुष्मिता मुखर्जी, राकेश बेदी, नीरज सूद जैसे कई दमदार कलाकार हैं, लेकिन उन्हें स्क्रीन पर उतनी जगह ही नहीं मिली है कि वो अपनी छाप छोड़ पाएं। सबसे हिस्से में इक्के दुक्के प्रभावी सीन और संवाद पड़े हैं और वहां उन्होंने अपना बेस्ट देकर दिखाया है। मुख्य किरदारों में विक्की कौशल इमोशनल दृश्यों में दमदार लगे हैं, वहीं कॉमेडी में भी वो एक लय बनाए रखने की पूरी कोशिश करते हैं। हालांकि अभिनेता अपना सर्वश्रेष्ठ गंभीर भूमिकाओं में ही देते हैं, चाहे वो मसान हो, सरदार उधम हो या उरी। सारा अली खान और विक्की के बीच की केमिस्ट्री अच्छी लगी है। दोनों के बीच एक कंफर्ट लेवल है, जो पर्दे पर भी दिखता है। सारा को अपनी संवाद अदायगी पर थोड़ा काम करने की जरूरत है। हालांकि, इस फिल्म में निर्देशक ने उन्हें कॉमेडी करने के लेकर इमोशंस दिखाने तक का सही मौका दिया है और वो भी अच्छी कोशिश करती दिखी हैं।
निर्देशन व तकनीकी पक्ष
लक्ष्मण उतेकर ने इससे पहले 'लुका छुपी' और 'मिमी' जैसी फिल्में दी हैं। 'जरा हटके जरा बचके' भी उसी फ्लेवर की फिल्म है, लेकिन यहां पटकथा थोड़ी कमजोर नजर आती है। फिल्म का जो विचार है, वो काफी दिलचस्प है। लेकिन उसे पर्दे पर लाने में कहीं थोड़ी चूक दिखती है। फिल्म का फर्स्ट हॉफ काफी तेजी से गुजरता है और एंटरटेन भी करता है। लेकिन सेकेंड हॉफ में कहानी खिंचती हुई लगती है। फिल्म को बांधने के लिए एक मजबूत point of conflict होना जरूरी था, जो यहां हम मिसिंग पाते हैं। क्लाईमैक्स तक पहुंचते पहुंचते कहानी काफी कमजोर पड़ जाती है। हालांकि निर्देशक ने बीच बीच में काफी हल्के फुल्के तरीके से सामाजिक मुद्दों को भी छेड़ा है, चाहे वो सरकारी दफ्तर के काम करने का अंदाज हो.. या हर बार सौम्या का खुद को सौम्या चावला दुबे कहना हो। ये बातें इसे एक फैमिली एंटरटेनर बनाती हैं।
मनीष प्रधान द्वारा फिल्म की एडिटिंग थोड़ी और कसी हुई हो सकती थी.. खासकर सेकेंड हॉफ में। फिल्म का संगीत एक पॉजिटिव पक्ष है.. जो सचिन-जिगर द्वारा रचित है। और गाने के बोल अमिताभ भट्टाचार्य ने लिखे हैं।
रेटिंग
घर बैठकर ओटीटी पर परिवार के साथ देखने के लिए ये एक अच्छी फिल्म साबित हो सकती है, जहां कुछ सीन्स आप फास्ट फॉरवर्ड भी कर सकते हैं। फिल्म हल्के- फुल्के अंदाज से आपको हंसाती है, इमोशनल भी करती है और एंटरटेन भी। विक्की कौशल- सारा अली खान स्टारर 'जरा हटके जरा बचके' को फिल्मीबीट की ओर से 3 स्टार।


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