Why Cheat India Movie Review: शानदार इमरान हाशमी, सीटीमार डायलॉग, जबरदस्त एंटरटेंमेंट
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ऊपरवाला दुआ कबूल करता है, मैं सिर्फ कैश लेता हूं'.. रॉकी aka राकेश सिंह (इमरान हाशमी) कुछ ऐसा ही कहकर कॉम्पटीटिव एग्जाम में स्कोर नहीं कर पाने वाले स्टूडेंट्स को नोटों की गड्डी के बदले प्रॉक्सी स्टूडेंट दिलाता है जो उनके बदले एग्जाम लिख सकते हैं। वाई चीट इंडिया ऐसे ही मामलों को उजागर करती है कि किस तरह छात्र और उनके हताश माता-पिता प्रतियोगी प्रवेश परीक्षा किसी हालत में पास करने के लिए चीटिंग का शिकार हो जाते हैं।

सौमिक सेन द्वारा निर्देशित ये फिल्म शुरू होती है सत्येंद्र दुबे aka सत्तू (स्निग्धदीप चैटर्जी) से, जो कि लखनऊ का एक इजीनियरिंग छात्र है। उनकी जिंदगी तब बदलती है जब वो एक एंट्रेंस एग्जाम क्रैक कर लेता है और उसपे नजर पड़ती है मौकापरस्त राकेश सिंह की.. राकेश इस छात्र को शिक्षा के भ्रष्टाचार में घुसने के लिए फुसलाता है। 'तुम अपने ज्ञान का फायदा उन्हें दो, वो अपनी अमीरी का फायदा तुम्हे देंगे' राकेश कुछ ऐसे सत्तू को मनाने की कोशिश करता है।
इसी बीच सत्तू की बहन नुपुर (श्रेया धनवंत्री) को राकेश से प्यार हो जाता है। हालांकि राकेश उसे बड़े ही प्यार से रिजेक्ट कर देता है। राकेश का प्लान होता है 'बड़ा गेम' खेलने का जिससे उसे बड़ा पैसा भी मिलेगा.. लेकिन क्या ये सब इतना आसान होता है?
राइटर-डायरेक्टर शौमिक सेन ने शानदार कॉनसेप्ट लिया है हालांकि उनकी ढ़ीली-ढ़ाली राइटिंग और असंगत स्क्रीनप्ले फिल्म के साथ न्याय नहीं कर पाता। कुछ सीन तो जबरदस्ती ठूसे लगते हैं और फिल्म का बिखरा नैरेटिव आपको निराश करता है।
परफॉर्मेंस की बात करें तो, वाई चीट इंडिया सिर्फ और सिर्फ इमरान हाशमी की फिल्म है। फिल्म में ये इमरान घोटालेबाज कैरेक्टर को इतने शानदार तरीके से निभाते हैं कि आप देख सकते हैं कि उन्होंने इतने सालों में कितनी मेहनत की है। गिरगिट की तरह रंग बदलने से लेकर सस्पेंस भरा एक्सप्रेशन देने तक इमरान की वजह से ही आपकी नजरें स्क्रीन से नहीं हट पाएंगी।
इमरान हाशमी की फिल्म हो और जबरदस्त डायलॉग न हों ऐसा तो हो नहीं सकता। जी हां! फिल्म में आपको कई सीटीमार डायलॉग मिलेंगे। जैसे कि- 'मुझे हीरो बनने की इच्छा नहीं है और विलेन बनने का बिल्कुल टाइम नहीं है, खिलाड़ी हूं, खेल रहा हूं' ऐसी पंचलाइन्स आपको फिल्म से जोड़े रखेंगी।
श्रेया धनवंतरी ने बॉलीवुड में काफी प्रॉमिसिंग एंट्री ली है और वे कुछ सीन में बेहतरीन लगी हैं। सत्येंद्र दुबे उर्फ सत्तू के किरदार में स्निग्धदीप चैटर्जी ने ठीक-ठाक काम किया है।
Y. अल्फोंस रॉय की सिनेमैटोग्राफी अच्छी है। हालांकि दीपिका कालरा की एडिटिंग कुछ और बेहतर हो सकती थी। दूसरी तरफ 'फिर मुलाकात होगी' के अलावा फिल्म के गाने कुछ खास असर नहीं कर पाते।
वाई चीट इंडिया इमरान हाशमी के कॉन्फिडेंट और शानदार परफॉर्मेंस के चलते बेहतरीन और एंटरटेनिंग फिल्म है। अगर शौमिक सेन का लेखन और निर्देशन थोड़ा और स्पष्ट होता तो फिल्म परफेक्ट हो जाती। हमारी तरफ से फिल्म को 3 स्टार।


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