वॉट द फिश रिव्यू- बेहतरीन कॉमेडी लेकिन कहानी में काफी झोल!

वॉट द फिश फिल्म की कहानी आंटी (डिंपल कपाड़िया) के इर्द गिर्द घूमती है जो कि बहुत ही साफ सफाई पसंद महिला हैं। वो नोटों को भी धोकर सुखा कर यूज करती हैं क्योंकि उनका मानना है कि पता नहीं किन किन गंदे हाथों से होकर ये नोट वहां पहुंच होंगे। एक दिन आंटी अपने बेटे और बहू से मिलने विदेश जाती है और अपने घर की जिम्मेदारी अपनी भांजी पर छोड़ जाती है। आंटी की भांजी को भी किसी काम से बाहर जाना पड़ता है और वो अपने होने वाले पति यानी अपने मंगेतर को घर की जिम्मेदारी दे जाती है। घर में आंटी की एक प्यारी फिश है और आंटी का मनी प्लांट है जिसे आंटी ने बहुत ही प्यार से लगाया है।
आंटी के घर से जाने के बाद घर की क्या दुर्दशा होती है और घर की चाभी किन किन हाथों से होते हुए वापस आंटी के हाथों तक पहुंचती यही सफर मजेदार है। आंटी के वापस आने के बाद क्या आंटी को उनका घर वैसा ही मिलता है जैसा वो छोड़ गयी थीं या फिर उनके घर की दुर्दशा हो रखी होती है। ये जानने के लिए तो आपको सिनेमाहॉल में जाकर वॉट द फिश देखनी होगी। फिल्म में डिंपल कपाड़िया की बेहतरीन एक्टिंग है। फिल्म के गाने कुछ खास नही हैं और फिल्म इंटरवल के बाद काफी ऐसे टर्न लेती है जो कि बोरिंग हो जाते हैं। लेकिन ओवरऑल वीकेंड को लाइट एंटरटेनिंग बनाने के लिए वॉट द फिश देखना बुरा फैसला नहीं होगा। हमारी तरफ से फिल्म को 2 स्टार।


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