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Veere Di Wedding Review: पुरानी कहानी में चार लड़कियों की मस्ती का तड़का, प्यार शादी और कंफ्यूजन

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चार सहेलियां जिंदगी से जूझती हुई, प्यार, शादी और टूटा हुआ दिल। क्या ये कॉन्सेप्ट पहले देखने को नहीं मिला है? लेकिन शशांक घोष की लेटेस्ट फिल्म वीरे दी वेडिंग को खास बनाती है इस फिल्म की चार लड़कियां। 2 घंटे 5 मिनट की इस फिल्म में आपको जमकर ग्लैमर, लड़कियों की बॉन्डिंग और खूबसूरत लोकेशन्स देखने को मिलेंगी। जो इसे 'सेक्स एंड द सिटी' से कंपेयर कर रहे हैं उन्हें ये फिल्म शायद उतनी अच्छी न लगे।

वीरे दी वेडिंग की शुरूआत चार टीनएज लड़कियों से होती है। जो लॉकर रूम में फाइनस एक्जाम के बारे में बात कर रही हैं। दस साल बाद ऑडिएंस को इन लड़कियों के एडल्टहुड में ले जाया जाता है। कालिंदी (करीना कपूर) को कमिटमेंट फोबिया है, जो कि उनके टूटे हुए घर की वजह से है। अवनी (सोनम कपूर) जो कि एक तलाकशुदा वकील हैं, उनकी मां शादी को लेकर अक्सर फोर्स करती रहती हैं। साक्षी (स्वरा भास्कर), एक अमीर लड़की है जिसकी शादी टूटने की कगार पर है। मीरा (शिखा तल्सानिया) जिसके बड़े पापा उनसे रिश्ता इसलिए तोड़ देते हैं क्योंकि उसने एक फिरंगी से शादी की है।

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सबकी जिंदगी में बड़ा टिविस्ट तब आता है जब कालिंदी का ब्यॉफ्रेंड रिशभ (सुमीत व्यास) घुटनों पर बैठकर उसे शादी के लिए प्रपोज करता है। कालिंदी पहले तो झिझकती है लेकिन बाद में शादी के लिए तैयार हो जाती है। इसके बाद वो खुद को बनारसी साड़ियों और वेस्ट दिल्ली के मल्होत्रा की ज्वैलरी के बीच दबा हुआ पाती है। और तो और अपने रोका के लिए फेयरी 'प्रिंसेस गाउन' में खुद को फिट करने के लिए भी स्ट्रगल करती नजर आती है। इन सबके बीच उसके पास उसकी बेस्टीज यानी 'वीरे' हैं। हालांकि ये सारी खुशी तब काफूर हो जाती है जब कालिंदी ये शादी कैंसिल कर देती है और बवाल हो जाता है।

जल्द ही, ये 'वीरे' अपनी पुरानी अच्छी यादों तो ताजा करने और अपनी जिंदगी से जुड़े बड़े फैसले लेने से पहले एक साथ फुकेत के लिए निकल जाती हैं।

शशांक घोष की इस बात की तारीफ मिलनी चाहिए कि उन्होंने एक ऐसी फिल्म बनाई जिसकी बॉलीवुड को काफी वक्त से जरूरत थी। इस फिल्म में सेक्स टॉक और कसमे वादे नहीं बल्कि उनकी लड़कियों को खास बनाता है कि उनके गलतियों के निशान और उन्हें गर्व से एक्सेप्ट करने की हिम्मत। सोसाइटी उन्हें 'पवित्र' तो नहीं बुलाएगी लेकिन सोसाइटी की ये सोच इन लड़िकयों को अपने दिल की करने से रोक नहीं पाएगी।

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    English summary
    Veere Di Wedding movie review: From the times where the heroine was always supposed to be Ms Two Goody-Shoes who abstained from getting between the sheets before marriage to women now being shown inhibited when it comes to their life, sexuality and desires, Bollywood has come a long way.

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