सलमान के रथ पर सवार 'वीर'
निर्देशक - अनिल शर्मा
स्टार कास्ट - सलमान खान, जरीन खान, मिथुन चक्रवर्ती, जैकी श्राफ
निर्माता - विजय गिलानी
रिलीज डेट - 22 जनवरी 2010
रेटिंग मीटर - 2/5
समीक्षा- फिल्म वीर में देखने लायक है एक्शन सीन्स, सिनेमेटोग्राफी और क्लासिक सेंस ऑफ डिजाइन। फिल्म में सलमान का लुक काबिले तारीफ है और जरीन की खूबसूरती देखने लायक। इसके अलावा सलमान की फिल्म में नया क्या है या खास क्या है, ये देखने वाली बात नहीं बल्कि सोचने वाली बात है। वांटेड फिल्म से बॉलीवुड में अर्से बाद चमके सलमान इस फिल्म के बाद फिर से ढलान पर खिसक सकते हैं। हालांकि सलमान ने वीर के लिए अपनी जान लड़ा दी है।
लेकिन जिसे फिल्म की खासियत बताया जा रहा है फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी ही वही है। फिल्म की कहानी सलमान ने आज से लगभग बीस साल पहले लिखी थी। लेकिन इस फिल्म को सलमान की कहानी कहा जाए या उनके इतने दिनों फिल्मी दुनिया में रहने का अनुभव। फिल्म हैरतअंगेज तरीके से कई हॉलीवुड फिल्मों का मिश्रण मालूम होती है। स्टोरी की इसी कमजोरी की वजह से वीर को चलने के लिए सलमान का ग्लूकोज लेना पड़ रहा है।
सच कहा जाए तो पूरी वीर सलमान के कंधों पर लदी हुई और जरीन की खूबसूरती पर टंगी हुई महसूस होती है। जगह- जगह एक्शन सीन्स का टॉनिक पी कर और खूबसूरत लोकेंशंस की हवा में सांस ले कर फिल्म आगे बढ़ती रहती है। सलमान के प्रशंसकों को ये फिल्म भायेगी ऐसा मुश्किल लगता है। इसके अलावा जो दर्शक सलमान की कहानी देखने गए हैं उन्हे केवल निराशा हाथ लगेगी।
स्टोरी लाइन - फिल्म की कहानी उस समय के भारत की कहानी है जब देश पर अंग्रेज राज कर रहे थे। उस समय रह रियासत अंग्रेजों के अधिकार में थी। लेकिन पिंढारी राज्य इन रियासतों से जुदा था। ये रियासत एक आजाद रियासत थी और अपनी आजादी हर कीमत पर बनाए रखना चाहती थी।
इसी रियासत का कद्दावर सिपाही है वीर (सलमान खान)। जो अपनी दुश्मन रियासत की राजकुमारी यशोधरा (जरीन खान) से प्यार करता है। वीर के ऊपर दो जिम्मेदारियां हैं एक अपनी रियासत को बचाना दूसरा अपने प्यार को बचाना। यशोधरा के पिता मतलब माधवगढ़ के राजा का किरदार जैकी श्राफ ने निभाया है। उनका रोल निगेटिव है।


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