Ulajh Review: बोरिंग फर्स्ट हाफ, उलझती कहानी, जान्हवी कपूर की एक्टिंग देख उलझन में पड़ जाएंगे आप!

ulajh

Rating:
2.5/5

Cast: Janhvi Kapoor, Gulshan Devaiah, Roshan Mathew, Meiyang Chang

Director: Sudhanshu Saria

Ulajh Review: जान्हवी कपूर अक्सर ऐसे रोल चुनती हैं, जो उनकी एक्टिंग को डिफाइन कर सके। एक्ट्रेस ने अब तक ऐसी कई फिल्में की हैं, जिसमे पूरा का पूरा फोकस बस उन पर हो होता है और उलझ भी उनमें से एक है। जान्हवी ने इस फिल्म में यंग IFS का रोल निभाया है जो देशभक्तों के एक प्रतिष्ठित परिवार से ताल्लुक रखती है। वह अपने होम टाउन से दूर, एक अहम पद पर रहते हुए, एक खतरनाक साजिश का शिकार बन जाती है।

क्या है कहानी

इस फिल्म की कहानी शुरू होती है एक लड़की से जो अपने पापा को प्राउड करवाने के लिए कुछ भी कर सकती है। वो अपने करियर को लेकर इतनी ज्यादा ओब्सेसिव है कि उसे अपनी पर्सनल लाइफ की भी खबर नहीं है। सुहाना भाटिया जिसका परिवार सरकार में बड़े-बड़े ओहदे पर है, वो भी अपने परिवार में कुछ बनना चाहती है और वो बन भी जाती है। उसे बेहद कम उम्र में ही डिप्यूटी हाई कमिश्नर बन जाती है। लेकिन बाद में पता चलता है कि ये पोस्ट देना तो सुहाना के खिलाफ एक साजिश थी।

सुहाना भाटिया जो लंदन में जाकर काम करती है, उसकी जॉइनिंग से सभी परेशान होते है और उस पर नेपोटिज्म का इल्जाम लगाते हैं। इस बीच वो एक लड़के के प्यार में पड़ा जाती है और बाद में वही लड़का उसका अश्लील वीडियो रिकॉर्ड करके उससे सरकारी चीजें लीक करवाता है और सुहाना उसके जाल में फंसती जाती है। अब वो इस जाल से कैसे निकलेगी, उसे क्यों फंसाया जा रहा था ये तो आपको फिल्म देखने के बाद ही पता चलेगा। फिल्म का फर्स्ट हाफ थोड़ा बोरिंग है लेकिन दूसरे हाफ ने थोड़ी ग्रिप जरूर पकड़ी है।

कैसी है एक्टिंग

इस फिल्म में जान्हवी कपूर ने अच्छा काम किया है और वो हर फिल्म के साथ अपनी एक्टिंग के हुनर को तराश रही हैं। गुलशन दैवेया ने फिल्म में निगेटिव रोल निभाया है और वो इस रोल में काफी जंचे हैं। रोशन मैथ्यू को इंटरवल के बाद स्पेस मिलता है और वो उसी स्पेस में कमाल का काम करते हैं।

कैसा है डायरेक्शन

इस फिल्म का डायरेक्शन सुधांशु सरिया ने किया है और ये इनकी बिग स्क्रीन पर पहली फिल्म है। फिल्म की कहानी काफी अच्छी है, लेकिन फिल्म को कैची बनाए रखने के लिए और मेहनत की जा सकती थी। फिल्म में इतने ज्यादा ट्विस्ट और टर्न्स हैं कि, कई ट्विस्ट्स को कैमरे पर ढंग से स्पेस नहीं मिल पाया है। कुल मिलाकर फिल्म और बेहतर हो सकती थी लेकिन कई सीन को ढीला छोड़ दिया गया।

फाइनल रिव्यू

'उलझ' के दो मतलब है- एक उलझन जो कि फर्स्ट हाफ में दिखाई देती है, जिसमें जान्हवी यानी सुहाना भाटिया फंसती ही जा रही थी। वही दूसरे हाफ में ये फिल्म उलझन से उलझ में तब्दील हो जाती है और यहां इस मौके पर आकर सुहाना उन बड़े लोगों से उलझती है जो उसके खिलाफ साजिश रच रहे हैं, जो उसके परिवार को बर्बाद करने की कोशिश कर रहे हैं। इस फिल्म को एक बार देखा जा सकता है लेकिन फिल्म को देखकर कई लोगों को निराशा हाथ लग सकती है। फिल्मीबीट हिंदी की तरफ से इस फिल्म 2.5 रेटिंग।

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