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उजड़ा चमन फिल्म रिव्यू- दिल को नहीं छूएगी गंजेपन की यह 'दर्द भरी' कहानी

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Rating:
2.5/5

Ujda Chaman Public Review |Sunny Singh | Maanvi Gagroo |FilmiBeat

कलाकार- सनी सिंह, मानवी गगरू, सौरभ शुक्ला, शारिब हाशमी

निर्देशक- अभिषेक त्रिपाठी

प्यार किसी की सूरत से नहीं, सीरत से करो। सालों से ये बातें गाहे बगाहे हम फिल्मों के जरीए सुनते आ रहे हैं। इसी विषय को गंजेपन की समस्या के साथ मिलाकर सामने लेकर आए हैं निर्देशक अभिषेक पाठक। फिल्म 'उजड़ा चमन' कहती है कि कमियां हर किसी में होती हैं, लेकिन यदि हम अपनी कमियों को छिपाने या उससे चिढ़ने लगते हैं.. यह गलत है। फिल्म का विषय संवेदनशील है और काफी अलग भी, लेकिन अफसोस फिल्म की कमजोर पटकथा दिल छूने में सफल नहीं होती है।

फिल्म की कहानी

फिल्म की कहानी

दिल्ली में रहने वाला 30 वर्षीय चमन कोहली युवावस्था में ही गंजा हो चुका है और यही उसके जीवन की सबसे बड़ी समस्या है। उसकी कुंडली के अनुसार, यदि 31 साल होने से पहले उसकी शादी नहीं होती है को वह आजीवन ब्रह्मचारी ही रहेगा। लिहाजा, वह और उनका परिवार जोर शोर से लड़की की तलाश में जुट जाते हैं। कॉलेज में प्रोफेसर होते हुए भी चमन को गंजेपन की वजह से एक के बाद एक लड़कीवाले रिजेक्ट करते जाते हैं। वहीं, चमन को भी अपने लिए एक परफेक्ट खूबसूरत पत्नी की तलाश रहती है और वह अपनी सोच पर अडिग रहता है। ऐसे में क्या चमन को अपनी पसंद की लड़की मिलेगी? या क्या चमन से कोई लड़की शादी करने के लिए तैयार होगी? इसी उलटफेर के बीच कहानी बुनी गई है। मुख्य तौर पर निर्देशक ने इस कहानी के साथ समाज की सोच को दर्शाने की कोशिश की है। कभी कभी हम बाहरी खूबसूरती को लेकर इतने अड़ियल हो जाते हैं कि संवेदना और भावनाओं को नजरअंदाज़ कर देते हैं।

अभिनय

अभिनय

उजड़ा चमन या चमन कोहली के किरदार में सनी सिंह ने अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश की है, लेकिन शायद वह काफी नहीं। कई दृश्यों में उन्हें दर्शकों की भावनाओं को पकड़ने का मौका मिला, लेकिन वहां वह चूक गए। फिल्म की शुरुआत से अंत तक वह कुछ गिने चुने हाव भाव देते ही नजर आए। वहीं, अप्सरा के रोल में मानवी गगरू काफी प्रभावी रहीं। अपने मोटापे को लेकर बेफिक्री हो या इमोशनल दृश्य, मानवी ने अपना बेहतरीन दिया है। वहीं, बतौर सह कलाकार सौरभ शुक्ला, शारिब हाशमी, करिश्मा शर्मा, ऐश्वर्या सखूजा आदि अपने किरदारों में जंचे हैं।

निर्देशन व तकनीकि पक्ष

निर्देशन व तकनीकि पक्ष

यह एक अच्छी नीयत से बनाई गई फिल्म है, लेकिन कह सकते हैं कि निर्देशक अभिषेक पाठक ने एक दमदार मौका गंवा दिया। इस विषय के इर्द गिर्द एक अच्छी कहानी की जरूरत थी, जिसे बुनने में राइटर राज शेट्टी कुछ खास नहीं कर पाए। वहीं, निर्देशन भी काफी कमजोर दिखा। महज दो घंटे की यह फिल्म भी इंटरवल के बाद खिंची सी लगने लगती है। एक संजीदा विषय को कॉमेडी में पिरोना और साथ ही उचित मनोरंजन का ध्यान रखना, आसान नहीं है। फिल्म के फर्स्ट हॉफ में कॉलेज में विद्यार्थी जिस तरह से प्रोफेसर के गंजे होने का मजाक उड़ाते हैं, या गंजे लड़के को लड़कीवाले जिस तरह घर से बाहर निकालते हैं.. वह अतिशयोक्ति लगती है। जिस वजह से फिल्म से आप जुड़ नहीं पाते हैं। वहीं, किरदारों को मजबूती से गढ़ने में भी निर्देशक चूक गए हैं।

देंखे या ना देंखे

देंखे या ना देंखे

फिल्म के विषय से आकर्षित हैं और घिसी पिटी प्रेम कहानी से कुछ अलग देखना चाहते हैं तो यह एक बार देखी जा सकती है। अभिषेक पाठक की 'उजड़ा चमन' एक अच्छे विषय पर बनी कमजोर फिल्म है। फिल्मीबीट की ओर से फिल्म को 2.5 स्टार।

English summary
Sunny Singh and Maanvi Gagroo starrer film Ujda Chaman deals about premature hairfall, but lacks soul. The film is directed by Abhishek Pathak.
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