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    Review:आपके अंदर जो कुछ भी बचा है सब UGLY है!

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    [तृषा गौड़] अनुराग कश्यप हमेशा कुछ ऐसा करते हैं जो आपको सोचने पर मजबूर करता है। उनका डार्क ह्यूमर आपको ज़िंदगी के उन पन्नों में लेकर जाना चाहता है जिन्हें ना आप कभी याद करते हैं ना ही पलटना चाहते हैं। अगली आपको ज़िंदगी के उन्हीं पन्नों पर ले जाने को मजबूर करेगी।
    ये साल इंटरटेनमेंट के लिए कुछ ज़्यादा ही मशहूर हो गया, ऐसे में अगली आपको फिल्मों के उस क्षेत्र में वापस ले जाएगी जिसे इस साल आपने मिस किया....कहानी। अगली में ना म्यूज़िक है ना रोमांस ना एक्शन....बस एक कहानी और एक किरदार जो अपने आसपास के सारे किरदारों को जोड़ते हुए उन्हें इंसानियत के तराज़ू पर नंगा करके तौलता है। काली एक आवाज़ लोगों को खोई हुई आत्मा के लिए जो आपको झकझोरी और आपकी इंसानियत और पैसे के लिए भूखी दौड़ के बीच फर्क करना सिखाएगी।
    Warning: फिल्म का अंत आपको हैरान करके रख देगा!

    कहानी

    कहानी

    फिल्म 'अगली' की कहानी घूमती है एक स्ट्रगलिंग एक्टर और उसकी अगवा हुई बेटी के गिर्द, जिसकी तफ्तीश पूरी फिल्म में चलती रहती है। अगवा लड़की के पिता के रोल में हैं राहुल भट्ट, मां के किरदार में हैं तेजस्विनी कोल्हापुरी और केस की तफ्तीश कर रहे पुलिस ऑफिसर की भूमिका में हैं रोनित रॉय। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती, हर किरदार के साथ अतीत के कुछ पन्ने जुड़े मिलेंगे जो आपको आपके रिश्तों के सच से रूबरू कराएंगे।

    किरदार

    किरदार

    फिल्म में एक ही मुख्य किरदार है काली। उसे चाहे आप एक बच्ची मानिये जो खो जाती है या फिर आपकी आत्मा और इंसानियत जो पैसा, नाम, दौलत, शोहरत की धुंध में कहीं छुपी है। अनुराग कश्यप आपको मजबूर करते हैं उस धुंध को पोंछकर अपनी ज़िंदगी का काला सच आईने में देखने को। हर किरदार आपको खुद के करीब दिखेगा और सच्चाई के करीब। क्योंकि फिलहाल आप और आपके इर्द गिर्द का हर इंसान भी यही है झूठा और फरेबी।

    एक्टिंग

    एक्टिंग

    फिल्म एक से बढ़कर एक मंझे हुए कलाकारों का बेहतरीन अभिनय है। मराठी कलाकार गिरीश कुलकर्णी को देखकर आप बस उन्हें और देखना चाहेंगे। वहीं रोनित रॉय आपको उड़ान की याद दिलाएंगे। राहुल भट्ट इतने दमदार तरीके से परदे पर वापसी करते हैं कि आप हैरान रह जाएंगे। वहीं सुरवीन चावला यहां टिकने आईं हैं और वो ये बात साबित करती हैं। पर फिल्म का सरप्राइज़ पैकेज हैं तेजस्विनी कोल्हापुरे।

    निर्देशन

    निर्देशन

    जो लोग कह रहे हैं कि ब्लैक फ्राइडे के बाद ये फिल्म अनुराग कश्यप की अब तक की बेहतरीन फिल्म है वो ठीक हैं शायद। फिल्म में कोई कमी नहीं लगती सिवाय इसके कि फिल्म थोड़ी सी धीमी है पर इसके बावजूद फिल्म कहीं भी छूटती नहीं है।

    खोल के रखती है इंसान की तह

    खोल के रखती है इंसान की तह

    फिल्म के सारे किरदार हालात की मार के आगे मजबूर हैं। सब कमजोर हैं। किसी का चरित्र ठोस नहीं दिखता। परिवार के खोखलेपन का शिकार बच्चे कैसे होते हैं यही फिल्म बताती है। आपसी दुश्मनी, खींचतान, स्वार्थ, लालच और रिश्तों की कमजोरियों को सामने ले आती है। अनुराग बड़े ही दमदार ढंग में बता गए हैं कि आपके अंदर जो कुछ भी बचा है सब खोखला है।

    हिट या मिस

    हिट या मिस

    अगर आपको वाकई कहानी देखने के लिए फिल्में देखना पसंद है तो आप ये नहीं मिस कर सकते हैं। साल का अंत है और ये इस साल की चुनिंदा कहानी प्रधान फिल्मों में से एक है। फिल्म का अंत आपको चौंकाएगा और काफी कुछ सोचने पर मजबूर करेगा। अगर आपने खुद का काला सच देखने की सच्चाई है तो फिल्म आपके लिए हिट है।

    English summary
    Anurag Kashyap is known for his unorthodox approach towards relationships and this film Ugly digs deep into the human nature which is certainly ugly at times. Ugly tells us what William Shakespeare did centuries ago. Human nature, by its very nature, is rotten and to the core. You cannot escape your basic nature of self-serving greed.
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