Total Dhamaal Review: फीकी है अजय देवगन की ये फिल्म- कॉमेडी फिल्म से कॉमेडी गायब
किसी को हंसाना, किसी को रूलाने से बहुत मुश्किल काम है। शायद इसलिए कॉमेडी हमेशा से ही ट्रैजेडी से ज़्यादा मुश्किल रहती है। अब जैसे रोहित शेट्टी अपनी गोलमाल फ्रेंचाईज़ी के साथ हर बार हमें हंसाने की बेहतरीन कोशिश करते हैं वहीं इंद्र कुमार भी अपनी धमाल फ्रेंचाइज़ी के साथ लौटे लेकिन बस बंसाने की कोशिश ही करते रहेंगे। हालांकि 2007 में इंद्र कुमार ने जब अपनी कॉमेडी फिल्म धमाल से दर्शकों को रूबरू करवाया था तो लोग ठहाके मार कर हंसे थे। इसके बाद 2011 में डबल धमाल के साथ ये ठहाके फीके और हल्के हो गए।
और अब 2019 में टोटल धमाल के साथ सारे चुटकुले तो वापस आए लेकिन ठहाके कहीं रास्ते में ही छूट गए। इंद्र कुमार टोटल धमाल के साथ एक बेहतरीन स्टारकास्ट लेकर आए हैं। फिल्म एक शानदार टाईटल ट्रैक के साथ शुरू होती है जहां हर किरदार एक बात बिल्कुल साफ कर देता है कि फिल्म केवल पैसों के बारे में है।

दो ठग हैं - गुड्डू और जॉनी यानि कि अजय देवगन और संजय मिश्रा, एक लड़ता हुआ, तलाक के करीब पहुंच चुका शादीशुदा जोड़ा है - अविनाश और बिंदू यानि कि अनिल कपूर और माधुरी दीक्षित का। एक फायरमैन और उसका साथी - लल्लन यानि कि रितेश देशमुख और पीतोबाश त्रिपाठी।
और हर फिल्म की तरह इस फिल्म में भी पैसों के भूखे दो भाई - आदि और मानव यानि कि अरशद वारसी और जावेद जाफरी। इन सबके पीछे पड़ा है एक चालाक पुलिस कमिशनर बमन ईरानी। और ये सारे अलग अलग ढूंढने निकले हैं जनकपुर के एक चिड़ियाघर में छिपे 50 करोड़ रूपये।
अब दो घंटे की फिल्म में कभी हेलीकॉप्टर क्रैश होते दिखते हैं तो कभी पुल टूटते हुए, कभी नदियों में बाढ़ आ जाती है तो कभी इन किरदारों की चिड़ियाघर के जानवरों से दोस्ती हो जाती है। अगर देखा जाए तो इंद्र कुमार ने अपनी पूरी कास्ट ऐसी रखी है जो कॉमेडी के महारथी हैं।
इन्हीं सुपरस्टार्स के कंधों पर पूरी फिल्म का बोझ है। लेकिन फिल्म की कहानी और लेखन इतना कमज़ोर है कि सबकुछ स्वाहा हो जाता है। चुटकुले में हंसी की कमी है और कुछ समय बाद तो पूरी फिल्म में चुटकुलों की भी कमी है। अभिनय की बात करें तो माधुरी दीक्षित और अनिल कपूर को आज भी साथ देखकर दिल धक धक करता है।
दोनों फिल्म में थोड़ी सी जान फूंकने की कोशिश करते हैं। अजय देवगन का किरदार बिल्कुल झीला है जिसे आप डायरेक्टर और लेखक की गलती कह सकते हैं। संजय मिश्रा भी फिल्म की इसी कमी का शिकार हो जाते हैं।
पूरी फिल्म में कहीं कहीं जो हंसी की राहत दे जाता है वो है रितेश देशमुख। वहीं अरशद वारसी और जावेद जाफरी, दर्शकों को अपनी केमिस्ट्री से तब हंसा पाते जब स्क्रीन पर दिखते। उनका स्क्रीन टाइम बिल्कुल ही कम है।
बमन ईरानी और जॉनी लीवर के हिस्से जो भी कॉमेडी आई उन्होंने अच्छे से निभा दी है। फिल्म के दोनों पुराने गानों का नया वर्जन - पैसा ये पैसा और मुंगड़ा, ना तो सुनने लायक है और ना ही देखने लायक।
फिल्म के अंत में आने वाला गाना स्पीकर फट जाएगा भी दर्शकों को रोकने में असफल रहा। एक शानदार स्टारकास्ट के बावजूद इंद्र कुमार की टोटल धमाल कॉमेडी के एरिया में बहुत ही कमज़ोर कोशिश है। इतने स्टार्स को एक साथ ठूंसने की बजाय, फिल्म को कहानी ढूंढने की कोशिश करनी चाहिए थी। हमारी तरफ से फिल्म को 2.5 स्टार।


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