बढ़िया पारिवारिक फिल्म 'टूनपुर का सुपरहीरो'

By Jaya Nigam

निर्देशक - किरीट खुराना
निर्माता - अजय देवगन
कलाकार - अजय देवगन, काजोल, तनूजा

रेटिंग - 2.5/5

समीक्षा - 'टूनपुर का सुपरहीरो' नाम से ही बच्चों की फिल्म लगती है। फिल्म में इस्तेमाल किया गया एनीमेशन और ग्राफिक पहली नजर में ही आपको ये धारणा बनाने पर मजबूर कर देते हैं कि ये फिल्म बड़ों या युवाओं के लिए बल्कि नन्हे-मुन्ने, प्यारे-प्यारे बच्चों के लिए ही है। लेकिन हमें एक बात याद रखनी चाहिए कि कभी भी किसी फिल्म के पोस्टर से उस फिल्म के अंदर का रोमांच नहीं पता लगता।

फिल्म बनाते समय इस बात का बेहद ख्याल रखा गया है कि बच्चों को फिल्म दिखाने ले जाने वाले बड़े कहीं बोर ना हो जाएं। इसलिए कार्टून कैरेक्टर्स का इस्तेमाल होते हुए भी ये फिल्म बच्चों की नहीं बल्कि पारिवारिक फिल्म कही जाएगी। अन्य बॉलीवुड फिल्मों की तरह इस फिल्म में एक हीरो भी है और उसकी हीरोइन भी, एक विलेन भी है और दो प्यारे-प्यारे बच्चे भी। मतलब हर तरह से हंसता-खेलता जगमगाता परिवार इस कहानी के केंद्र में है।

हीरो अजय देवगन फिल्म में भी बॉलीवुड एक्टर बने हैं। उनका नाम है आदित्य कपूर और पूरी दुनिया उनके अभिनय को सराहती है। स्क्रीन हीरो आदित्य की फैमिली में उसकी बीवी प्रिया (काजोल) है और उसके दो बच्चे हैं। दोनों बच्चे अपने पापा को स्क्रीन पर स्टंट करते देख और विलेन की पिटाई करते देख कर बेहद खुश होते हैं। लेकिन जब बात असल जिंदगी की आती है तो स्क्रीन से निकलते ही आदित्य भी साधारण इंसानों की तरह हर (अनोखे) काम नहीं कर सकता।

आदित्य के बच्चे उसे रियल लाइफ में भी 'सुपरहीरो' के रूप में ही देखना चाहते हैं। एक दिन किसी तरह से आदित्य अपने बच्चों के फेवरेट कार्टून गेम टूनपुर में घुस जाते हैं। अब आदित्य के सिर पर जुनून सवार है कि उसे देवटूनों की मदद से दूनासुरों को हरा कर अपने बच्चों की निगाह में सच का सुपरहीरो बनाना है। बस यही टूनपुर के सुपरहीरो की छोटी सी कहानी है। यही इस फिल्म की आत्मा है। एक पिता की अपने बच्चों का भरोसा जीतने के खातिर की गई हजार कोशिशें उसे सचमुच का 'सुपरहीरो' बना देती हैं।

'टूनपुर का सुपरहीरो' एक टिपिकल हॉलीवुड पटकथा लगती है लेकिन अच्छी बात ये है कि इसके प्रस्ततुतीकरण में भारतीय शहरों की जीवनशैली ही आपको मिलेगी। इसलिए आपको देख कर ये नहीं लगने वाला कि किसी हॉलीवुड फिल्म को देखने आ गए। एक और अच्छी बात ये है कि इसमें किए गए एक्शंस, स्टंट्स कहीं से भी हॉलीवुड की कॉपी या फूहड़ नकल नहीं लगते। इसकी वजह है फिल्म की टीम की रिसर्च और मेहनत।

कुल मिलाकर क्रिसमस के मौके पर एक अच्छी और पारिवारिक फिल्म देने के लिए हमें अजय देवगन और काजोल का शुक्रगुजार होना चाहिए। क्योंकि साल के अंत में आ रही टूनपुर का सुपरहीरो शायद इस साल बच्चों को केंद्र में रख कर बनाई गई पहली मनोरंजक फिल्म है। इससे पहले इस साल 'थैंक्स मां' और 'वी आर फैमिली' में भी बच्चों को दिखाया गया था लेकिन ये फिल्में पहली अपने विषय की वजह से सीरियस फिल्म थी और दूसरी फिल्म में बच्चे होने के बाद भी वह बड़ों की फिल्म थी। लेकिन 'टूनपुर का सुपरहीरो' बड़े और बच्चों दोनों के मनोरंजन का इंश्योरेंस है।

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